तैयारी गाइड
राजस्थान LDC टाइपिंग टेस्ट में क्या होता है?
राजस्थान LDC टाइपिंग टेस्ट में कंप्यूटर पर हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं की टाइपिंग जांची जाती है; हर भाषा में स्पीड टेस्ट और कंप्यूटर पर काम की जांच होती है। हर हिस्सा 10 मिनट और 25 मार्क्स का है; अभ्यर्थी को दूसरे चरण के तय न्यूनतम मार्क्स भी लाने होते हैं और लिखित व टाइपिंग, दोनों चरणों के मार्क्स से अंतिम मेरिट बनती है। आधिकारिक परीक्षा योजना में शब्द प्रति मिनट की कोई तय सीमा नहीं दी गई है।
राजस्थान LDC टाइपिंग टेस्ट में ठीक-ठीक क्या होता है?
दूसरे चरण में कंप्यूटर पर हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं की टाइपिंग होती है। हर भाषा में RSSB काम को स्पीड टेस्ट और कंप्यूटर पर काम की जांच में बांटता है। आधिकारिक परीक्षा योजना इन दोनों हिस्सों का नाम देती है, लेकिन शब्द प्रति मिनट का लक्ष्य तय नहीं करती। उसमें हर हिस्से के लिए 10 मिनट और 25 मार्क्स तय हैं। इसलिए किसी दूसरे विभाग, अदालत की भर्ती या निजी अभ्यास सामग्री में दी गई स्पीड को राजस्थान RSSB LDC का नियम न मानें। परीक्षा के दिन काम कैसे होगा, इसके लिए उसी भर्ती चक्र के RSSB टाइपिंग निर्देश मानें, क्योंकि ये निर्देश सेवा नियमों की परीक्षा योजना से अलग जारी हो सकते हैं। जब तक RSSB लागू भर्ती चक्र के लिए स्पीड सीमा न बताए, प्रकाशित समय में सही काम का अभ्यास करें, लेकिन अभ्यास के लक्ष्य को आधिकारिक कट-ऑफ न बताएं।
हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग के मार्क्स कैसे बंटते हैं?
आधिकारिक परीक्षा योजना में दोनों भाषाओं के लिए एक जैसा ढांचा है। यह टेबल प्रकाशित समय और मार्क्स का पूरा बंटवारा दिखाती है; इसमें कोई गैर-आधिकारिक स्पीड लक्ष्य न जोड़ें।
| भाषा | हिस्सा | समय | मार्क्स |
|---|---|---|---|
| हिंदी | स्पीड टेस्ट | 10 मिनट | 25 |
| हिंदी | कंप्यूटर पर काम की जांच | 10 मिनट | 25 |
| अंग्रेजी | स्पीड टेस्ट | 10 मिनट | 25 |
| अंग्रेजी | कंप्यूटर पर काम की जांच | 10 मिनट | 25 |
इसका मतलब है कि अभ्यर्थी दोनों भाषाओं और दोनों तरह के काम का अभ्यास करें। अच्छी अंग्रेजी टाइपिंग, कमजोर हिंदी टाइपिंग की जगह नहीं ले सकती और केवल तेज टाइपिंग से कंप्यूटर पर काम की जांच हट नहीं जाती। परीक्षा योजना इन्हें दूसरे चरण के मार्क्स वाले पेपर मानती है, केवल हाजिरी वाला बिना मार्क्स का अभ्यास नहीं। हर दूसरे चरण के पेपर में तय न्यूनतम मार्क्स भी ज़रूरी हैं, इसलिए केवल कुल जोड़ पर भरोसा न करें।
टाइपिंग चरण के पासिंग मार्क्स क्या हैं?
RSSB ऐसे अभ्यर्थी की सिफारिश नहीं कर सकता जो दूसरे चरण के हर पेपर में कम से कम 36% मार्क्स न लाए। नियम में “हर पेपर” लिखा है; यह नहीं कहा गया कि एक भाषा के ज़्यादा मार्क्स दूसरी भाषा की कमी पूरी कर देंगे। SC और ST अभ्यर्थियों को हर चरण के हर पेपर के न्यूनतम मार्क्स में 5% तक छूट मिल सकती है। यह छूट स्कोर में सीधे जोड़ नहीं है और साफ नियम के बिना इसे किसी दूसरी श्रेणी पर लागू नहीं मानना चाहिए। दूसरे चरण में प्रवेश भी लिखित चरण से तय होता है: हर लिखित पेपर में कम से कम 40% मार्क्स चाहिए और अभ्यर्थी विज्ञापित पदों के 3 गुना दायरे में होना चाहिए; उस दायरे की आखिरी जगह पर समान प्रतिशत वाले सभी अभ्यर्थी शामिल होते हैं। ये न्यूनतम और शॉर्टलिस्ट के नियम हैं, अंतिम चयन कट-ऑफ नहीं।
क्या टाइपिंग टेस्ट के मार्क्स अंतिम मेरिट में जुड़ते हैं?
हां। लागू परीक्षा योजना साफ कहती है कि लिखित चरण और टाइपिंग चरण में मिले मार्क्स को अंतिम मेरिट क्रम तय करने में गिना जाएगा। इसलिए राजस्थान RSSB LDC टाइपिंग केवल ऐसा पासिंग टेस्ट नहीं है जिसके मार्क्स पास होने के बाद हट जाएं। अभ्यर्थी को पहले लिखित पेपर की शर्तें पूरी करके दूसरे चरण की शॉर्टलिस्ट में आना होगा, फिर दूसरे चरण के हर पेपर का तय न्यूनतम पूरा करना होगा और आखिर में दोनों चरणों से गिने गए मार्क्स पर मुकाबला करना होगा। 2024 भर्ती के RSSB नतीजों में यही क्रम दिखता है: पहले टाइपिंग टेस्ट के लिए चुनी सूची, फिर पास अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और बाद में अंतिम सिफारिश के रिकॉर्ड जारी हुए। “टाइपिंग के लिए चुना गया”, “टाइपिंग पास” और “अंतिम सिफारिश” तीन अलग स्थितियां हैं। टाइपिंग का बुलावा चयन की गारंटी नहीं है और केवल न्यूनतम मार्क्स लाने से अंतिम मेरिट में जगह पक्की नहीं होती।
दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए दूसरे चरण का नियम कैसे काम करता है?
आधिकारिक परीक्षा योजना उन दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए खास व्यवस्था करती है जो उसकी पात्रता की परिभाषा में आते हैं: सामान्य हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग पेपर की जगह उन्हें लिखित चरण में मिले औसत मार्क्स दिए जाते हैं। इसे केवल अपने दावे के आधार पर सभी के लिए मिलने वाली छूट नहीं मानना चाहिए। परीक्षा योजना इस व्यवस्था को लागू दिव्यांग नियमों की पात्रता से जोड़ती है और तय प्रमाण मांगती है। इसलिए अभ्यर्थी अपने भर्ती चक्र के विज्ञापन और RSSB निर्देशों में लागू प्रमाण और जांच की शर्त देखें। इस नियम का मतलब इतना ही है कि औसत मार्क्स वाली व्यवस्था तभी लागू होगी, जब RSSB अभ्यर्थी को बताए गए दिव्यांग नियम में स्वीकार करे। किसी दूसरी परीक्षा की सुविधा या छूट उठाकर यह न मानें कि उससे LDC की मेरिट गणना बदल जाती है। यह व्यवस्था किसी अभ्यर्थी पर लागू होगी या नहीं, यह RSSB के उसी भर्ती चक्र के आधिकारिक रिकॉर्ड से तय होगा।
टाइपिंग और दस्तावेज जांच के बाद क्या होता है?
दूसरे चरण के बाद RSSB पास अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी कर सकता है और अंतिम सिफारिश से पहले पात्रता व दस्तावेज जांच कर सकता है। दस्तावेज जांच में यह देखा जाता है कि अभ्यर्थी ने भर्ती की शर्तों के बारे में जो दावा किया है, वह सही है; दी गई परीक्षा योजना में यह मार्क्स वाला तीसरा पेपर नहीं है। उसी भर्ती चक्र के बुलावे में बताए गए मूल दस्तावेज और ज़रूरी प्रतियां साथ रखें तथा किसी अंतर को आधिकारिक प्रक्रिया से ठीक कराएं। 2024 भर्ती में RSSB ने पहले टाइपिंग शॉर्टलिस्ट, फिर पास अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और उसके बाद अंतिम सिफारिश व कट-ऑफ रिकॉर्ड जारी किए। इसलिए अंतिम सिफारिश दोनों चरणों के गिने गए मार्क्स और सफल जांच, दोनों पर निर्भर है। अभ्यर्थी टाइपिंग का न्यूनतम पूरा करके भी उपलब्ध मेरिट दायरे से बाहर रह सकता है या ज़रूरी दावा साबित न होने पर अटक सकता है। इसलिए टाइपिंग पास करना ज़रूरी चरण है, नियुक्ति आदेश नहीं।
आधिकारिक स्रोत
इस गाइड के लिए उपयोग किए गए स्रोत दस्तावेज़ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान LDC में कितनी टाइपिंग स्पीड चाहिए?
दी गई RSSB परीक्षा योजना में शब्द प्रति मिनट की कोई कट-ऑफ नहीं लिखी है। उसमें हिंदी और अंग्रेजी के हर स्पीड टेस्ट के लिए 10 मिनट और 25 मार्क्स हैं, इसलिए किसी दूसरे विभाग की स्पीड सीमा उठाने के बजाय आधिकारिक अंक देने के नियम और उसी भर्ती चक्र के निर्देश मानें।
क्या राजस्थान LDC टाइपिंग टेस्ट केवल पासिंग है?
नहीं। दूसरे चरण का न्यूनतम पूरा करना ज़रूरी है, लेकिन लिखित और टाइपिंग दोनों चरणों में मिले मार्क्स अंतिम मेरिट में गिने जाते हैं।
LDC टाइपिंग चरण में न्यूनतम मार्क्स कितने हैं?
परीक्षा योजना में दूसरे चरण के हर पेपर में कम से कम 36% मार्क्स ज़रूरी हैं। SC और ST अभ्यर्थियों को हर चरण के हर पेपर के न्यूनतम मार्क्स में 5% तक छूट मिल सकती है।
क्या अभ्यर्थियों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में टाइप करना होता है?
हां, सामान्य दूसरे चरण में कंप्यूटर पर हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग होती है तथा हर भाषा में स्पीड टेस्ट और कंप्यूटर पर काम की जांच होती है। अलग दिव्यांग व्यवस्था में पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों को लिखित चरण के औसत मार्क्स दिए जाते हैं।
क्या टाइपिंग पास करने से अंतिम चयन पक्का हो जाता है?
नहीं। अंतिम मेरिट में लिखित और टाइपिंग दोनों चरणों के मार्क्स गिने जाते हैं तथा अंतिम सिफारिश से पहले पात्रता और दस्तावेजों की जांच भी सफल होनी चाहिए।
