नीति आयोग ने अक्टूबर 2025 में भारत के सेवा क्षेत्र पर दो रिपोर्ट जारी कीं। इनमें देश के 18.8 करोड़ सेवा क्षेत्र कर्मचारियों के लिए "कम वेतन के जाल" को लेकर तीखी चेतावनी दी गई है। "India's Services Sector: Towards Global Leadership" और "Formalisation of the Services Sector" शीर्षक वाली ये रिपोर्टें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से जारी की गईं।
रिपोर्टों के अनुसार भारत के 18.8 करोड़ सेवा क्षेत्र कर्मचारियों में से 73% अनौपचारिक क्षेत्र में हैं। इनके पास सामाजिक सुरक्षा, भविष्य निधि, स्वास्थ्य लाभ और नौकरी की स्थिरता का अभाव है। यह संरचनात्मक अनौपचारिकता वेतन को दबाती है, उत्पादकता घटाती है और इस क्षेत्र की समावेशी विकास क्षमता को सीमित करती है। अनौपचारिक सेवाओं में औसत दैनिक वेतन 350–500 रुपये अनुमानित है।
रिपोर्टों की मुख्य अनुशंसाएं हैं: GST पंजीकरण अभियान, EPFO ऑनबोर्डिंग, सूक्ष्म-सेवा उद्यमों के लिए UDYAM पंजीकरण, और सेवा प्रदाताओं को ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना। रिपोर्टें Tier-II और Tier-III शहरों — जिनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर शामिल हैं — को सेवा क्षेत्र के संभावित केंद्रों के रूप में चिह्नित करती हैं।
भारत का सेवा क्षेत्र GDP में लगभग 55% योगदान करता है और कुल निर्यात में 45% हिस्सेदारी रखता है। औपचारिकीकरण से सालाना 1.5–2% अतिरिक्त GDP वृद्धि के बराबर उत्पादकता लाभ मिल सकता है।
