केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 के अंत में 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना' को 7,280 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए भारत का पहला एकीकृत घरेलू विनिर्माण तंत्र स्थापित करना है, जिसमें 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) उत्पादन क्षमता का लक्ष्य है। वित्तीय संरचना में पाँच वर्षों में वितरित 6,450 करोड़ रुपये की बिक्री से जुड़ी प्रोत्साहन राशि और उन्नत विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की पूंजी सब्सिडी शामिल है। वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली से अधिकतम पाँच लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा उपकरणों में महत्वपूर्ण घटक हैं। वर्तमान में चीन वैश्विक REPM उत्पादन के 90% से अधिक पर हावी है। यह योजना 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य, विकसित भारत 2047 और महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा के अनुरूप है।
कैबिनेट ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी: स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का प्रयास
केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 के अंत में 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना' को 7,280 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य उच्च मूल्य वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए भारत में पहली एकीकृत घरेलू विनिर्माण व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) उत्पादन क्षमता का लक्ष्य है। वित्तीय संरचना में पाँच वर्षों में दी जाने वाली 6,450 करोड़ रुपये की बिक्री से जुड़ी प्रोत्साहन राशि और उन्नत विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की पूंजी सब्सिडी शामिल है। वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली के ज़रिए पाँच लाभार्थियों तक का चयन किया जाएगा। रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा उपकरणों में महत्वपूर्ण घटक हैं। वर्तमान में चीन वैश्विक REPM उत्पादन के 90% से अधिक हिस्से पर हावी है। यह योजना 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य, विकसित भारत 2047 और महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सहायक है।
मुख्य तथ्य
- कैबिनेट ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी।
- योजना का लक्ष्य रेयर अर्थ मैग्नेट की 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
- वित्तीय संरचना में पाँच वर्षों में 6,450 करोड़ रुपये की बिक्री से जुड़ी प्रोत्साहन राशि शामिल है।
- REPM इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, रक्षा प्रणालियों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- भारत वर्तमान में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट की अपनी लगभग 100% आवश्यकता आयात से पूरी करता है।
- यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत में सिंटर्ड दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक निर्माण के लिए कैबिनेट द्वारा अनुमोदित 7,280 करोड़ रुपये की योजना के रणनीतिक औचित्य और स्वच्छ ऊर्जा एवं रक्षा आत्मनिर्भरता पर इसके प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
कैबिनेट ने दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक निर्माण के लिए प्रतिवर्ष 6,000 मीट्रिक टन क्षमता वाली 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। पांच लाभार्थियों को सात वर्षों में 6,450 करोड़ रुपये प्रोत्साहन मिलेंगे। चीन 90% से अधिक वैश्विक उत्पादन नियंत्रित करता है, इसलिए विद्युत वाहनों और रक्षा में आयात निर्भरता घटाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत सिंटर्ड रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (आरईपीएम) विनिर्माण संवर्धन योजना का कुल वित्तीय परिव्यय क्या है?
मंत्रिमंडल ने आरईपीएम विनिर्माण योजना को 7,280 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृति दी। इसमें पाँच वर्षों के लिए बिक्री-संबद्ध प्रोत्साहन के रूप में 6,450 करोड़ रुपये और पूँजी सब्सिडी के रूप में 750 करोड़ रुपये रखे गए हैं। योजना का लक्ष्य 6,000 एमटीपीए क्षमता हासिल करना है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित REPM योजना का कुल वित्तीय परिव्यय क्या है और इसका उत्पादन लक्ष्य क्या है?
केंद्रीय कैबिनेट ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) निर्माण संवर्धन योजना को 7,280 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी। योजना का लक्ष्य 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की उत्पादन क्षमता हासिल करना है।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों हैं?
REPM इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), पवन टर्बाइनों, मिसाइल और रडार जैसी रक्षा प्रणालियों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में अहम घटक हैं। भारत की वर्तमान REPM आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात से पूरा होता है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला में स्वतंत्रता के लिए घरेलू निर्माण जरूरी हो जाता है।
REPM योजना की वित्तीय संरचना क्या है?
कुल 7,280 करोड़ रुपये के परिव्यय में से 6,450 करोड़ रुपये पाँच वर्षों में दिए जाने वाले बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन (SLI) के रूप में रखे गए हैं, ताकि निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिले। शेष राशि बुनियादी ढांचे और उन्नत प्रौद्योगिकी अधिग्रहण के लिए है।
वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट आपूर्ति पर कौन से देशों का वर्चस्व है और भारत की निर्भरता चिंताजनक क्यों है?
चीन वैश्विक रेयर अर्थ खनन और REPM निर्माण पर वर्चस्व रखता है और वैश्विक आपूर्ति का 85% से अधिक नियंत्रित करता है। REPM पर भारत की लगभग पूर्ण आयात निर्भरता उसके EV, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में रणनीतिक कमजोरियाँ पैदा करती है; REPM योजना घरेलू क्षमता निर्माण के ज़रिए इसी समस्या से निपटती है।
REPM योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत लक्ष्यों में कैसे मदद करती है?
REPM इलेक्ट्रिक वाहन मोटरों और पवन टर्बाइन जनरेटरों के निर्माण के लिए आवश्यक हैं, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के दो अहम स्तंभ हैं। घरेलू REPM उत्पादन क्षमता विकसित करके यह योजना आयात पर निर्भरता घटाती है, मेक इन इंडिया को बढ़ावा देती है और आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्वच्छ ऊर्जा तथा रक्षा, दोनों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करती है।
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