भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के मौके पर सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए। यह भारत और EU के बीच पहली व्यापक सुरक्षा साझेदारी है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष सहयोग और रक्षा औद्योगिक सहयोग शामिल हैं। RBI और यूरोपीय प्रतिभूति और बाजार प्राधिकरण (ESMA) ने भी केंद्रीय प्रतिपक्षों (CCPs) पर सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए। शिखर सम्मेलन के एजेंडे में स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण, लोगों के बीच सहयोग, और क्षेत्रीय तथा बहुपक्षीय सहयोग शामिल थे। भारत-EU संबंध 2004 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत हुए थे।
16वें शिखर सम्मेलन में भारत-EU सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर
पहली भारत-EU सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर; RBI-ESMA MoU; समुद्री, साइबर और आतंकवाद-रोधी सहयोग शामिल।
मुख्य तथ्य
- 27 जनवरी 2026 को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में पहली व्यापक भारत-EU सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए।
- इसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष सहयोग और रक्षा औद्योगिक सहयोग शामिल है।
- RBI और European Securities and Markets Authority (ESMA) ने केंद्रीय प्रतिपक्षों पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- EU-India संबंध 2004 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँचे थे; उसके बाद से यह शिखर सम्मेलन संबंधों को गहरा करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण माना गया।
- शिखर सम्मेलन के एजेंडे में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, लोगों के बीच सहयोग तथा क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग भी शामिल था।
6-अक्ष वर्गीकरण
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ईयू-भारत संबंधों को पहली बार किस वर्ष रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर उन्नत किया गया था?
8 नवंबर 2004 को हेग में हुए 5वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने पर सहमति दी। इसलिए सही वर्ष 2004 है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
16वें शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षरित भारत-EU सुरक्षा और रक्षा भागीदारी क्या है?
**भारत-EU सुरक्षा और रक्षा भागीदारी** पर **16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन** में हस्ताक्षर हुए — यह पहली बार है जब EU ने किसी गैर-EU देश के साथ इस स्तर पर **औपचारिक सुरक्षा और रक्षा समझौता** किया। इस भागीदारी में **संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी का सह-विकास, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-विरोध** और खुफिया साझाकरण शामिल है।
EU के भारत के साथ सुरक्षा और रक्षा भागीदारी पर हस्ताक्षर करने का क्या महत्व है?
**भारत-EU सुरक्षा और रक्षा भागीदारी** का महत्व: (1) EU की **केवल नागरिक शक्ति** वाली छवि से आगे बढ़कर सुरक्षा भागीदारी की ओर रणनीतिक बदलाव; (2) भारत की **प्रमुख रक्षा शक्ति** के रूप में स्थिति की पुष्टि; (3) **साइबर रक्षा** को शामिल करना; (4) भारतीय सशस्त्र बलों और EU सैन्य टुकड़ियों के बीच **संयुक्त अभ्यास**; और (5) बड़े पैमाने पर **EU-भारत रक्षा प्रौद्योगिकी व्यापार** को आसान बनाना।
नई भागीदारी के तहत भारत-EU रक्षा सहयोग के क्षेत्र क्या हैं?
**भारत-EU रक्षा भागीदारी** के क्षेत्र: (1) **समुद्री सुरक्षा** — हिंद महासागर में संयुक्त गश्त; (2) **साइबर सुरक्षा** — CERT समन्वय; (3) **अंतरिक्ष सुरक्षा**; (4) **रक्षा में AI** — नैतिक AI रूपरेखा; (5) **रक्षा उद्योग में सह-उत्पादन**; और (6) **आतंकवाद-विरोधी खुफिया** जानकारी साझा करना।
भारत-EU सुरक्षा भागीदारी की तुलना भारत की अन्य रक्षा भागीदारियों से कैसे होती है?
भारत की **अमेरिका, फ्रांस, इज़राइल, जापान और ऑस्ट्रेलिया (QUAD)** के साथ द्विपक्षीय रक्षा भागीदारी है। **भारत-EU रक्षा भागीदारी** अलग है क्योंकि यह **27 राष्ट्रों के बहुपक्षीय समूह** के साथ है — इससे संभावित रूप से **EU सामूहिक रक्षा क्षमताओं** और फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड की NATO-मानक सेनाओं के साथ अभ्यास तक पहुंच का रास्ता खुलता है।
व्यापक भारत-EU रणनीतिक साझेदारी क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
**भारत-EU रणनीतिक साझेदारी** **2004** में स्थापित हुई, जब भारत एशिया में EU का पहला रणनीतिक भागीदार बना। **2022 में भारत-EU व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC)** — EU-US TTC पर आधारित — सेमीकंडक्टर, AI और स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर समन्वय का काम करती है। **16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन** 2004 से इस साझेदारी का **सबसे महत्वपूर्ण उन्नयन** है।
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