16 फरवरी 2026 को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित ओल चिकी लिपि शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। यह समारोह पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में ओल चिकी लिपि के आविष्कार के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया। यह लिपि संथाली भाषा — भारत की सबसे अधिक बोली जाने वाली आदिवासी भाषाओं में से एक — को उसकी अपनी स्वदेशी लिपि देने के लिए बनाई गई थी।

ओल चिकी से पहले संथाली रोमन, देवनागरी, ओड़िया और बंगाली लिपियों में लिखी जाती थी, लेकिन ये लिपियां भाषा की ध्वन्यात्मक विशेषताओं को सटीक रूप से व्यक्त नहीं कर पाती थीं। ओल चिकी में 30 अक्षर हैं और प्रत्येक अक्षर सीधे संथाली की एक अलग ध्वनि से मेल खाता है। संथाली को 2003 में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।

समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने शताब्दी के उपलक्ष्य में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। एक ऐतिहासिक उपलब्धि की भी घोषणा की गई: भारत के संविधान का ओल चिकी लिपि में संथाली भाषा का आधिकारिक अनुवाद दिसंबर 2025 में जारी किया गया — यह पहली बार था जब भारत का मूल विधिक ग्रंथ संथाली में उसकी स्वदेशी लिपि में उपलब्ध हुआ। राष्ट्रपति मुर्मू ने ओल चिकी को 'संथाली पहचान का शक्तिशाली प्रतीक' बताया।