रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने 22 दिसंबर 2025 को चेन्नई बंदरगाह पर भारतीय नौसेना को तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC), INS अंजदीप, सौंपा। यह GRSE द्वारा निर्मित 115वाँ युद्धपोत और भारतीय नौसेना को दिया गया 77वाँ जहाज है। अकेले 2025 में यह GRSE का पाँचवाँ युद्धपोत हस्तांतरण है। ASW SWC वर्ग वॉटरजेट से चलने वाला सबसे बड़ा भारतीय नौसैनिक युद्धपोत है। अंजदीप में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिसमें GRSE द्वारा स्वयं निर्मित स्वदेशी 30 मिमी नेवल सर्फेस गन शामिल है। जहाज हल्के टॉरपीडो, स्वदेश में डिजाइन किए गए एंटी-सबमरीन रॉकेट और उथले पानी की SONAR प्रणालियों से सुसज्जित है। कुल आठ ASW SWC नौसेना ने GRSE से मंगाए हैं। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती पनडुब्बी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए ये हस्तांतरण महत्वपूर्ण हैं।
GRSE ने भारतीय नौसेना को तीसरा ASW उथले जल पोत 'अंजदीप' सौंपा; 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा जहाज निर्माण में मील का पत्थर
रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने 22 दिसंबर 2025 को चेन्नई बंदरगाह पर भारतीय नौसेना को तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC), INS अंजदीप, सौंपा। यह GRSE द्वारा निर्मित 115वाँ युद्धपोत और भारतीय नौसेना को सौंपा गया 77वाँ जहाज है। अकेले 2025 में GRSE का यह पाँचवाँ युद्धपोत हस्तांतरण है। ASW SWC वर्ग वॉटरजेट से चलने वाला सबसे बड़ा भारतीय नौसैनिक युद्धपोत है। अंजदीप में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिसमें GRSE द्वारा स्वयं निर्मित स्वदेशी 30 मिमी नेवल सर्फेस गन शामिल है। जहाज हल्के टॉरपीडो, स्वदेश में डिजाइन किए गए एंटी-सबमरीन रॉकेट और उथले पानी की SONAR प्रणालियों से सुसज्जित है। नौसेना ने GRSE को कुल आठ ASW SWC का ऑर्डर दिया है। भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती पनडुब्बी सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर यह हस्तांतरण महत्वपूर्ण है।
मुख्य तथ्य
- GRSE ने 22 दिसंबर 2025 को भारतीय नौसेना को तीसरा ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट INS अंजदीप सौंपा।
- अंजदीप GRSE का 115वाँ युद्धपोत और 2025 में पाँचवाँ हस्तांतरण है।
- पोत में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलता है।
- लगभग 77 मीटर लंबा यह वॉटरजेट से चलने वाला सबसे बड़ा भारतीय नौसेना युद्धपोत है।
- इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट और उथले जल SONAR लगे हैं।
- हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती गतिविधि के बीच GRSE को आठ ASW SWC के ऑर्डर मिले हैं।
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INS अंजादीप का निर्माण करने वाली रक्षा PSU GRSE का मुख्यालय किस शहर में है?
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है, जिसका मुख्यालय कोलकाता में है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
GRSE ने INS अंजदीप को भारतीय नौसेना को कब सौंपा और यह किस बड़ी उपलब्धि को दर्शाता है?
GRSE ने 22 दिसंबर 2025 को चेन्नई बंदरगाह पर भारतीय नौसेना को तीसरा ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट INS अंजदीप सौंपा। यह GRSE का 115वाँ युद्धपोत है और अकेले 2025 में उसका 5वाँ युद्धपोत हस्तांतरण है, जिससे 2025 भारतीय नौसैनिक जहाज निर्माण के लिए रिकॉर्ड वर्ष बन गया।
INS अंजदीप में स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत कितना है और यह आत्मनिर्भर भारत को कैसे बढ़ावा देता है?
अंजदीप में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिसमें GRSE-डिज़ाइन के वॉटरजेट, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट और उथले जल SONAR प्रणालियाँ शामिल हैं। यह रक्षा विनिर्माण में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भर भारत पहल को सीधे बढ़ावा देता है।
ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट वर्ग की अनूठी तकनीकी विशेषता क्या है?
ASW SWC वर्ग लगभग 77 मीटर लंबा, वॉटरजेट से चलने वाला सबसे बड़ा भारतीय नौसेना युद्धपोत है। वॉटरजेट प्रणोदन उथले तटीय जल में बेहतर गतिशीलता देता है, जो पनडुब्बी-रोधी अभियानों के लिए आवश्यक है।
पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए INS अंजदीप में कौन से हथियार और सेंसर लगे हैं?
INS अंजदीप में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट और उथले जल SONAR प्रणाली लगी है। ये सभी प्रणालियाँ मिलकर पोत को तटीय और उथले जल में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम बनाती हैं।
GRSE को कितने ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट बनाने का अनुबंध मिला है और किस वजह से?
GRSE को भारतीय नौसेना से आठ ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधि के बीच दिया गया और ये पोत तटीय पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता मजबूत करने की भारत की रणनीति का हिस्सा हैं।
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