जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार परिषद के ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने फरीदाबाद स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर परिसर में अपना तीसरा वार्षिक सम्मेलन, सिंचन 2026, आयोजित किया। इसमें वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि, जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, जोखिम पूंजी निवेशक, स्टार्टअप और नीति निर्माता शामिल हुए। उद्देश्य आपसी तालमेल की कमियों को दूर करना और प्रयोगशाला के वैज्ञानिक शोध को व्यावसायिक स्तर के रोगी समाधानों में बदलने की राह आसान बनाना था। मुख्य अतिथि डॉ. किरण मजूमदार शॉ ने कहा कि खोज से व्यावसायीकरण तक नवाचार को सहज रूप से ले जाने में टीएचएसटीआई जैसे संस्थान और सिंचन जैसे प्लेटफ़ॉर्म महत्वपूर्ण हैं। टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर गणेशन कार्तिकेयन ने संस्थान के चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और त्वरित उत्पाद निर्माण एवं महामारी तैयारी पहल की जानकारी दी। इस केंद्र में शुरुआती चरण के नैदानिक परीक्षण की इकाई, उन्नत सीएआर-टी कोशिका अनुसंधान इकाई और भारत की पहली नियंत्रित मानव संक्रमण अध्ययन सुविधा है। यह पहल प्रमाणित शोध निष्कर्षों और बड़े स्तर पर बनाए जा सकने वाले जैविक उत्पादों के बीच की दूरी घटाने के लिए राष्ट्रीय उत्पादन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करती है। बैठक में नियमों और वित्त की बाधाओं पर भी चर्चा हुई। डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि सीडीएससीओ जैविक दवाओं के लिए नई नियामक व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें सरकार से बाहर के उद्योग विशेषज्ञ भी शामिल हैं। डॉ. मनीष दीवान ने हाल में स्थापित बीआईआरएसी अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष को स्टार्टअप, उद्योग और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की पूरे विकास-चक्र की वित्तीय कमी दूर करने वाला प्रमुख साधन बताया। अलग-अलग सत्रों में वैश्विक स्वास्थ्य साझेदारी, शुरुआती नैदानिक शोध को मानव परीक्षण तक जल्दी पहुँचाने और जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के व्यावसायीकरण की बाधाएँ घटाने पर विचार हुआ।