भारत के प्रमुख बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलान के 13वें संस्करण का औपचारिक उद्घाटन 19 फरवरी 2026 को विशाखापट्टनम (विज़ाग) में हुआ, जहाँ पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय है। यह मिलान के इतिहास का सबसे बड़ा संस्करण था और इसमें 74 देशों ने भाग लिया। इसके साथ आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़ा समीक्षा में 19 विदेशी युद्धपोतों सहित कुल 85 जहाज शामिल थे। 1995 में अभ्यास शुरू होने के बाद से यह भागीदारी का नया रिकॉर्ड था।

उद्घाटन समारोह के बाद 19 फरवरी को समुद्री चरण भी शुरू हुआ। हिंदी में "मिलान" का अर्थ "मिलना" है। यह अभ्यास मूल रूप से हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा और यह नौसेनाओं के बीच संवाद का वैश्विक मंच बन गया। अब इसमें एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका की नौसेनाएँ भाग लेती हैं।

प्रमुख गतिविधियों में समुद्री सुरक्षा अभ्यास, समुद्री डकैती-रोधी अभियान, खोज और बचाव अभ्यास (SAR), मार्ग अभ्यास (PASSEX) तथा नौसैनिक सहयोग पर विशेषज्ञ संगोष्ठियाँ शामिल हैं। समुद्री चरण से पहले हुए बंदरगाह चरण में विषय-विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श, खेल आयोजन और सांस्कृतिक मेल-जोल हुआ।

13वें संस्करण में अमेरिका, फ्रांस, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा हिंद-प्रशांत और अफ्रीका के कई अन्य देशों की नौसेनाओं ने भाग लिया। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़ा समीक्षा में 85 जहाजों की मौजूदगी ने प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में भारत की बढ़ती हैसियत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समग्र सुरक्षा में उसके योगदान को रेखांकित किया।

RAS परीक्षार्थियों के लिए यह अभ्यास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की बढ़ती सामरिक पहुँच, उसकी विदेश नीति में हिंद महासागर की केंद्रीय भूमिका और ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (सागर) दृष्टिकोण के तहत क्षेत्रीय सुरक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका को दर्शाता है।