प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान के बाँसवाड़ा में माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) की आधारशिला रखी। इस परियोजना में चार स्वदेशी 700 MW दबाव भारी जल रिएक्टर (IPHWR-700) शामिल हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 2,800 MW है और लागत ₹42,000 करोड़ है। इसे NPCIL और NTPC के संयुक्त उद्यम ASHVINI द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा — यह भारत की पहली परमाणु ऊर्जा परियोजना है जिसे दो केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम मिलकर स्थापित कर रहे हैं।
PM मोदी ने माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को राजस्थान के बाँसवाड़ा में माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) की आधारशिला रखी। इस परियोजना में चार स्वदेशी 700 MW दाबित भारी जल रिएक्टर (IPHWR-700) शामिल हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 2,800 MW है और लागत ₹42,000 करोड़ है। इसे NPCIL और NTPC के संयुक्त उद्यम ASHVINI द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा — यह भारत की पहली परमाणु ऊर्जा परियोजना है, जिसे दो केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम मिलकर स्थापित कर रहे हैं।
मुख्य तथ्य
- PM मोदी ने 25 सितंबर 2025 को बांसवाड़ा, राजस्थान में MBRAPP की आधारशिला रखी।
- परियोजना में 2,800 MW कुल क्षमता वाले चार स्वदेशी 700 MW IPHWR-700 रिएक्टर हैं।
- परियोजना की अनुमानित लागत ₹42,000 करोड़ है।
- NPCIL और राजस्थान सरकार परियोजना में संयुक्त भागीदार हैं।
- यह निर्माणाधीन भारत की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजना होगी।
- संयंत्र स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर तकनीक का उपयोग करेगा।
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महि बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (एमबीआरएपीपी) की कुल स्थापित क्षमता क्या है, जिसकी आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने 25 सितंबर 2025 को रखी?
एमबीआरएपीपी में 700 मेगावाट के चार स्वदेशी दाबयुक्त भारी जल रिएक्टर, यानी आईपीएचडब्ल्यूआर-700, शामिल हैं। इनकी कुल क्षमता 2,800 मेगावाट और लागत 42,000 करोड़ रुपये है। परियोजना का क्रियान्वयन अश्विनी कर रहा है, जो एनपीसीआईएल और एनटीपीसी का संयुक्त उद्यम है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) क्या है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
MBRAPP राजस्थान के बाँसवाड़ा में स्थित एक परमाणु ऊर्जा परियोजना है, जिसमें चार स्वदेशी 700 MW IPHWR-700 रिएक्टर शामिल हैं और कुल क्षमता 2,800 MW है। PM नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को इसकी आधारशिला रखी — यह दो केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित भारत की पहली परमाणु परियोजना है।
ASHVINI क्या है और MBRAPP में इसकी क्या भूमिका है?
ASHVINI, NPCIL (परमाणु ऊर्जा निगम) और NTPC (राष्ट्रीय तापीय विद्युत निगम) का संयुक्त उद्यम है, जो MBRAPP को क्रियान्वित करेगा। यह पहली बार है जब दो केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम मिलकर परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित कर रहे हैं — इसमें NPCIL की परमाणु विशेषज्ञता और NTPC की परियोजना क्रियान्वयन क्षमता का संयोजन है।
IPHWR-700 रिएक्टर क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
IPHWR-700 (स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर – 700 MW) भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाला रिएक्टर है। यह प्राकृतिक यूरेनियम पर चलता है, जिसके संवर्धन की जरूरत नहीं होती। इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होती है और भारत की परमाणु आत्मनिर्भरता दिखती है।
माही बाँसवाड़ा परियोजना की अनुमानित लागत क्या है और राजस्थान के लिए इसका क्या महत्व है?
परियोजना की अनुमानित लागत ₹42,000 करोड़ है और निर्माण शुरू होने पर यह भारत की सबसे बड़ी निर्माणाधीन परमाणु परियोजना होगी। राजस्थान के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी — कोयले पर निर्भरता कम होगी और राज्य के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मदद मिलेगी।
माही बाँसवाड़ा परियोजना भारत की ऊर्जा और जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ कैसे जुड़ती है?
भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है। MBRAPP जैसी परमाणु परियोजनाएं सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता के बीच भरोसेमंद बेसलोड बिजली देती हैं। इससे भारत के NDC लक्ष्यों और ग्रिड स्थिरता, दोनों को मदद मिलती है।
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