प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' शीर्षक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा रत्न अवशेषों के पुनर्मिलन का प्रतीक है, जिन्हें जुलाई 2025 में 127 वर्षों के बाद भारत वापस लाया गया था। ये अवशेष मूल रूप से 1898 में उत्तर प्रदेश के कपिलवस्तु क्षेत्र के पिपरहवा में ब्रिटिश उपनिवेशकालीन पुरातत्ववेत्ता विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा खोजे गए थे और तब से यूनाइटेड किंगडम में पेप्पे परिवार के संग्रह में रहे थे। इस प्रदर्शनी में 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक की 80 से अधिक सांस्कृतिक वस्तुएँ हैं, जिनमें अवशेष पात्र, बौद्ध पांडुलिपियाँ, मूर्तियाँ और अनुष्ठान कलाकृतियाँ शामिल हैं। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत कूटनीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत को बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक जन्मभूमि के रूप में पुनः स्थापित करता है। 2014 से अब तक 653 पुरावशेष भारत वापस लाए जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी का उद्घाटन किया: 127 वर्षों बाद पवित्र पिपरहवा बौद्ध अवशेष प्रदर्शित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' शीर्षक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा रत्न अवशेषों के पुनर्मिलन का प्रतीक है, जिन्हें जुलाई 2025 में 127 वर्षों के बाद भारत वापस लाया गया था। ये अवशेष मूल रूप से 1898 में उत्तर प्रदेश के कपिलवस्तु क्षेत्र के पिपरहवा में ब्रिटिश उपनिवेशकालीन पुरातत्ववेत्ता विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने खोजे थे और तब से यूनाइटेड किंगडम में पेप्पे परिवार के संग्रह में थे। इस प्रदर्शनी में 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक की 80 से अधिक सांस्कृतिक वस्तुएँ हैं, जिनमें अवशेष पात्र, बौद्ध पांडुलिपियाँ, मूर्तियाँ और अनुष्ठान कलाकृतियाँ शामिल हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत कूटनीति के लिहाज से यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत को बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक जन्मभूमि के रूप में फिर से स्थापित करता है। 2014 से अब तक 653 पुरावशेष भारत वापस लाए जा चुके हैं।
मुख्य तथ्य
- प्रधानमंत्री मोदी ने 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राय पिथौरा परिसर में 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
- प्रदर्शनी में 127 वर्षों बाद विदेश से वापस लाए गए पवित्र पिपरहवा बौद्ध अवशेष प्रदर्शित हैं।
- अवशेष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता W.C. पेप्पे ने खोजे थे।
- जुलाई 2025 में इन्हें पेप्पे परिवार संग्रह से भारत वापस लाया गया।
- ये अवशेष कपिलवस्तु क्षेत्र से हैं और बुद्ध के काल के हैं।
- यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण क्षण है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की बौद्ध विरासत राजनय के लिए पिपरहवा अवशेष पुनर्प्राप्ति तथा 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी के महत्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
प्रधानमंत्री मोदी ने 3 जनवरी 2026 को राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 127 वर्षों बाद वापस लाए गए पिपरहवा रत्न अवशेष कोलकाता भारतीय संग्रहालय की 80+ कलाकृतियों के साथ प्रदर्शित किए गए। यह प्रदर्शनी भारत की सभ्यतागत विरासत राजनय को सुदृढ़ करती है; 2014 से 653 पुरावशेष लौटे।
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नई दिल्ली के राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में उद्घाटन की गई 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी में कितनी सांस्कृतिक वस्तुएँ शामिल हैं?
लेख के अनुसार प्रदर्शनी में 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व से वर्तमान तक की 80 से अधिक सांस्कृतिक वस्तुएँ रखी गई हैं। इनमें अवशेष-पात्र, बौद्ध पांडुलिपियाँ, मूर्तियाँ और अनुष्ठानिक कलाकृतियाँ शामिल हैं। ये वस्तुएँ कोलकाता के भारतीय संग्रहालय और भारत लौटाए गए पेप्पे परिवार के संग्रह से ली गई हैं।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी क्या है?
'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन' एक प्रदर्शनी है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में किया। इसमें भगवान बुद्ध के पिपरहवा के पवित्र रत्न अवशेष प्रदर्शित हैं, जिन्हें 127 वर्षों के बाद जुलाई 2025 में भारत वापस लाया गया था।
पिपरहवा बौद्ध अवशेष मूल रूप से कहाँ और कब मिले थे?
ये अवशेष 1898 में ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने उत्तर प्रदेश के कपिलवस्तु क्षेत्र के पिपरहवा में खोजे थे। खोज के बाद ये 127 साल तक विदेश में पेप्पे परिवार के संग्रह में रहे और जुलाई 2025 में भारत वापस लाए गए।
पिपरहवा अवशेषों का भारत के लिए क्या महत्व है?
पिपरहवा अवशेष भगवान बुद्ध के काल की सबसे पवित्र बौद्ध कलाकृतियों में से हैं और कपिलवस्तु क्षेत्र से जुड़े हैं। इनकी वापसी भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वापस लाने की कोशिशों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और भारत की बौद्ध विरासत से जुड़ी कूटनीति को मज़बूत करती है।
राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर कहाँ है और यह प्रदर्शनी के लिए क्यों चुना गया?
राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर नई दिल्ली में स्थित है और 'द लाइट एंड द लोटस' प्रदर्शनी के स्थल के रूप में इसे चुना गया। 3 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने यहीं वापस लाए गए पिपरहवा बौद्ध अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
पिपरहवा अवशेष कितने समय तक भारत से बाहर रहे और वापस कैसे आए?
ये अवशेष 1898 में खोजे जाने के बाद 127 साल तक पेप्पे परिवार के संग्रह में विदेश में रहे। भारत सरकार के सांस्कृतिक विरासत प्रत्यावर्तन पहल के तहत जुलाई 2025 में इन्हें वापस लाया गया।
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