प्रकाशित: 23 दिसंबर 2025टॉपिक
राष्ट्रपति ने निजी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को अनुमति देने वाले शांति विधेयक 2025 को मंजूरी दी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2025 में शांति विधेयक को मंजूरी दी, जिससे भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा ढांचे में बड़ा बदलाव आया। इसका मुख्य असर यह है कि निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों को सरकारी लाइसेंस के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने, स्वामित्व रखने, चलाने और बंद करने की अनुमति मिलती है। पहले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पर सरकारी नियंत्रण बहुत मजबूत था और निजी भागीदारी सीमित थी। इसलिए यह कदम ऊर्जा नीति, औद्योगिक सुधार और विज्ञान-प्रौद्योगिकी शासन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
शांति अधिनियम, 2025 ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 की जगह लेकर एक नया संयुक्त कानूनी ढांचा बनाया। इसका उद्देश्य परमाणु क्षमता को 2047 तक 100 गीगावॉट तक ले जाने की दीर्घकालिक योजना से जुड़ा है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति में संशोधन पर विचार की बात भी इस बदलाव की पृष्ठभूमि में आती है, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से इसे पक्की 49% अनुमति की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
नियमन के स्तर पर सुरक्षा नियंत्रण कमजोर नहीं किए गए हैं। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक मान्यता दी गई है और विकिरण जोखिम वाली गतिविधियों के लिए सुरक्षा अनुमति ज़रूरी रहेगी। संवेदनशील गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण भी केंद्रीय मुद्दा बना रहता है। RAS और UPSC तैयारी में यह विषय प्रीलिम्स के लिए कानून, संस्थान, लक्ष्य और ऊर्जा नीति से जुड़ता है, जबकि मुख्य परीक्षा में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, निजी निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और रणनीतिक क्षेत्रों के नियमन पर तर्क लिखने में काम आता है। स्टैटिक जीके में इसे परमाणु ऊर्जा शासन, दायित्व व्यवस्था और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शांति विधेयक 2025 क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा ढांचे में बदलाव करता है क्योंकि निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों को सरकारी लाइसेंस के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने, स्वामित्व रखने, चलाने और बंद करने की अनुमति मिलती है।
शांति अधिनियम, 2025 ने किन कानूनों की जगह ली?
इसने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 की जगह लेकर एक संयुक्त कानूनी ढांचा बनाया।
2047 से जुड़ा लक्ष्य क्या है?
इस सुधार को 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाने की दीर्घकालिक योजना से जोड़ा गया है।
क्या शांति अधिनियम सुरक्षा नियमन को कमजोर करता है?
नहीं। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक मान्यता दी गई है और विकिरण जोखिम वाली गतिविधियों के लिए सुरक्षा अनुमति ज़रूरी रहती है।
RAS और UPSC के लिए यह विषय कैसे उपयोगी है?
प्रीलिम्स में यह कानून, संस्थान, लक्ष्य और ऊर्जा नीति से जुड़ता है। मुख्य परीक्षा में यह स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, निजी निवेश और रणनीतिक क्षेत्रों के नियमन पर उत्तर लिखने में मदद करता है।