संविधान दिवस, 26 नवंबर 2025, पर 10 ट्रेड यूनियनों ने नई श्रम संहिताओं के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। विरोध के केंद्र में तीन मुद्दे थे: निश्चित अवधि वाला रोजगार, कामकाजी घंटों में बढ़ोतरी और हड़ताल के अधिकार पर प्रतिबंध। यूनियनों ने कहा कि नई श्रम संहिताओं को लागू करने से पहले व्यापक परामर्श होना चाहिए। परीक्षा की दृष्टि से यह मुद्दा केवल एक श्रमिक आंदोलन नहीं है; यह अर्थव्यवस्था, शासन और राजनीतिक प्रक्रिया के बीच संबंध को दिखाता है। श्रम कानूनों पर बहस रोजगार संबंधों, कार्यस्थल की शर्तों और औद्योगिक संबंधों को समझने में मदद करती है। इसलिए RAS और UPSC की तैयारी में इसे समसामयिकी के साथ-साथ स्टैटिक जीके से भी जोड़कर पढ़ना चाहिए। प्रीलिम्स में सवाल विरोध के कारणों, संबंधित प्रावधानों और यूनियनों की मांग पर आ सकता है। मुख्य परीक्षा में यह विषय श्रमिक अधिकार, आर्थिक सुधार, नीतिगत परामर्श और राज्य की नियामक भूमिका जैसे बिंदुओं से जुड़ सकता है। श्रम सुधारों से जुड़ा यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का है और अर्थव्यवस्था-राजनीति दोनों को छूता है; यह बताता है कि नीति बनाते समय कार्यान्वयन से पहले संवाद और परामर्श क्यों जरूरी हो जाते हैं। समसामयिकी नोट में इसे रोजगार नीति और औद्योगिक संबंधों की बहस से जोड़ना उपयोगी रहेगा। छात्रों को मुख्य तथ्य साफ रखने चाहिए: विरोध संविधान दिवस पर हुआ, इसमें 10 ट्रेड यूनियन शामिल थीं, विरोध नई श्रम संहिताओं के खिलाफ था, और मांग कार्यान्वयन से पहले व्यापक परामर्श की थी। उत्तर लिखते समय इन बिंदुओं को शासन, अर्थव्यवस्था और श्रमिक अधिकारों के नज़रिए से देखना ज्यादा उपयोगी रहेगा।