प्रकाशित: 19 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
ISRO-नौसेना ने कोच्चि के INS गरुड़ में गगनयान चालक दल निकासी परीक्षण पूरे किए
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय नौसेना ने 20 फरवरी 2026 को कोच्चि स्थित INS गरुड़ के जल-उत्तरजीविता प्रशिक्षण केंद्र में गगनयान दल के आपात निकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह अभ्यास दक्षिणी नौसेना कमान के अंतर्गत आयोजित किया गया और इसमें उन स्थितियों का अभ्यास किया गया जिनका सामना गगनयान मिशन के बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में स्प्लैशडाउन के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को करना पड़ सकता है।
इन परीक्षणों में नामित अंतरिक्ष यात्रियों ने अलग-अलग समुद्री स्थितियों में नकली क्रू मॉड्यूल से आपातकालीन निकास प्रक्रियाओं का अभ्यास किया, जिसमें 2 मीटर तक की कृत्रिम तरंग ऊंचाई शामिल थी। मरीन कमांडो (MARCOS) और भारतीय तटरक्षक बल के नौसेना गोताखोरों ने ISRO इंजीनियरों के साथ कैप्सूल को स्थिर करने, हैच खोलने और अंतरिक्ष यात्रियों को इन्फ्लेटेबल राफ्ट में निकालने का अभ्यास किया।
ये अभ्यास ISRO के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC) द्वारा अनिवार्य क्रू बचाव और पुनर्प्राप्ति योजना का अहम हिस्सा हैं। ये 2026 के मध्य के लिए निर्धारित बिना चालक दल वाले गगनयान G1 मिशन से पहले अंतिम सत्यापन चरण हैं। G1 मिशन में ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्र जाएगी और किसी भी मानवयुक्त उड़ान से पहले लाइफ सपोर्ट, री-एंट्री और रिकवरी सिस्टम की पुष्टि करेगा।
दक्षिणी नौसेना कमान ने INS गरुड़ केंद्र को समुद्री रिकवरी ड्रिल के लिए प्राथमिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नामित किया है। दोनों संगठनों ने वास्तविक मिशन रिकवरी के लिए प्रतिक्रिया समयसीमा, संचार आवृत्तियों और बचाव पोतों की पहले से तैनाती की रूपरेखा देने वाले एक संयुक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं। इन परीक्षणों का सफल समापन भारत की मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान तैयारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गगनयान क्रू एग्रेस ट्रायल कहाँ हुए और इन्हें किसने कराया?
**गगनयान क्रू एग्रेस ट्रायल** **20 फरवरी 2026** को **कोच्चि में INS गरुड़ स्थित जल उत्तरजीविता प्रशिक्षण सुविधा** में हुए। इन्हें **दक्षिणी नौसेना कमान** के अंतर्गत **ISRO** और **भारतीय नौसेना** ने संयुक्त रूप से कराया।
गगनयान क्रू एग्रेस ट्रायल का उद्देश्य क्या है?
ये परीक्षण गगनयान मिशन के समुद्र में उतरने के बाद, यानी **स्प्लैशडाउन के बाद कैप्सूल से अंतरिक्ष यात्रियों को निकालने** जैसी स्थितियों का अभ्यास कराते हैं। ये ISRO के **मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (HSFC)** की अनिवार्य **क्रू बचाव और पुनर्प्राप्ति योजना** का हिस्सा हैं।
गगनयान G1 मिशन क्या है और यह कब निर्धारित है?
**गगनयान G1** भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की पहली **मानवरहित परीक्षण उड़ान** है, जो **2026 के मध्य** के लिए निर्धारित है। यह ह्यूमनॉइड रोबोट **व्योममित्र** को ले जाएगा और मानव अंतरिक्ष यात्री भेजने से पहले **लाइफ सपोर्ट, री-एंट्री और रिकवरी सिस्टम** की जांच करेगा।
गगनयान एग्रेस ट्रायल में किन नौसैनिक इकाइयों ने भाग लिया?
**MARCOS (मरीन कमांडो)** और **भारतीय तटरक्षक बल** ने ISRO इंजीनियरों के साथ भाग लिया। उन्होंने **2 मीटर तक की लहर ऊंचाई** जैसी समुद्री स्थितियों में **कैप्सूल को स्थिर करने, हैच खोलने** और **अंतरिक्ष यात्रियों को इन्फ्लेटेबल राफ्ट में निकालने** का अभ्यास किया।
व्योममित्र क्या है और गगनयान में इसकी क्या भूमिका है?
**व्योममित्र** ISRO द्वारा विकसित एक **ह्यूमनॉइड रोबोट** है जो मानवरहित **गगनयान G1 मिशन** पर उड़ान भरेगा। यह लाइफ सपोर्ट सिस्टम की निगरानी करेगा, क्रू मॉड्यूल नियंत्रणों से इंटरैक्ट करेगा और वास्तविक मानव अंतरिक्ष यात्री भेजने से पहले सभी ऑन-बोर्ड सिस्टम की जांच में मदद करेगा।