प्रकाशित: 5 मार्च 2026समाचार स्रोतराजस्थान
'एजुकेट गर्ल्स' की सफीना हुसैन TIME की वुमन ऑफ द ईयर 2026 सूची में; राजस्थान की शिक्षा क्रांति को वैश्विक पहचान
गैर-लाभकारी संस्था 'एजुकेट गर्ल्स' की संस्थापक सफीना हुसैन को TIME पत्रिका की 'वुमन ऑफ द ईयर 2026' सूची में शामिल किया गया। यह सूची 27 फरवरी से 5 मार्च 2026 के आसपास घोषित हुई थी। इसमें दुनिया भर में महिलाओं और बालिकाओं के लिए समानता और अवसर बढ़ाने वाले 16 नेताओं को स्थान मिला।
सफीना ने भारत के ग्रामीण, दूर-दराज़ और आदिवासी समुदायों में स्कूल से बाहर रह गई बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए 2007 में एजुकेट गर्ल्स की स्थापना की। यह काम राजस्थान के सिर्फ़ 50 गाँवों से शुरू हुआ था। संस्था अब राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के 30,000 से अधिक गाँवों में काम करती है। इसके 'टीम बालिका' नेटवर्क में 55,000 से अधिक सामुदायिक प्रतिनिधि हैं, जो स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करके उनका दाखिला कराने और उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद करते हैं। अब तक एजुकेट गर्ल्स 20 लाख से अधिक बालिकाओं को स्कूल वापस लाने में मदद कर चुकी है।
2025 में यह रेमन मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय गैर-लाभकारी संस्था बनी। इस पुरस्कार को अक्सर एशिया का नोबेल कहा जाता है। संस्था को यह सम्मान बालिका शिक्षा के लिए ज़मीनी स्तर पर समुदाय को साथ लेकर किए गए काम और समुदाय की सोच बदलने के लिए मिला। सफीना ने 2026 में 'एवरी लास्ट गर्ल: अ जर्नी टू एजुकेट इंडियाज़ फॉरगॉटन डॉटर्स' पुस्तक भी लिखी। यह पहचान राजस्थान के लिए खास मायने रखती है, जहाँ 2011 की जनगणना के अनुसार महिला साक्षरता दर 52.66% थी और बाड़मेर, जैसलमेर तथा जालोर जैसे ग्रामीण और आदिवासी जिलों में बालिकाओं का स्कूल छोड़ना अब भी एक चुनौती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सफीना हुसैन कौन हैं और वे समाचार में क्यों हैं?
सफीना हुसैन गैर-लाभकारी संस्था 'एजुकेट गर्ल्स' की संस्थापक हैं। करीब दो दशकों से बालिका शिक्षा के लिए किए गए उनके काम के कारण उन्हें TIME की वुमन ऑफ द ईयर 2026 सूची में शामिल किया गया। यह काम 2007 में राजस्थान के 50 गाँवों से शुरू हुआ था और इससे स्कूल से बाहर 20 लाख से अधिक बालिकाओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ने में मदद मिली है।
एजुकेट गर्ल्स को 2025 में कौन-सा पुरस्कार मिला?
एजुकेट गर्ल्स को समुदाय को साथ लेकर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 2025 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला, जिसे अक्सर एशिया का नोबेल कहा जाता है।
एजुकेट गर्ल्स इस समय कितने राज्यों और गाँवों में काम करती है?
एजुकेट गर्ल्स अब 4 राज्यों—राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार—के 30,000 से अधिक गाँवों में काम करती है। इसकी शुरुआत 2007 में राजस्थान के सिर्फ़ 50 गाँवों से हुई थी।
राजस्थान की महिला साक्षरता दर क्या है और RPSC अभ्यर्थियों के लिए इसका क्या महत्व है?
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की महिला साक्षरता दर 52.66% थी, इसलिए बालिका शिक्षा राज्य के विकास की एक अहम चुनौती है। राज्य की कल्याणकारी योजनाओं और नीतिगत कदमों को समझने के लिए RPSC अभ्यर्थियों के लिए यह संदर्भ महत्वपूर्ण है।
एजुकेट गर्ल्स अपने काम में समुदाय को कैसे शामिल करती है?
एजुकेट गर्ल्स साथिनों और बाल सभाओं की मदद से स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करके उनका दाखिला कराती है। यह तरीका निपुण भारत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप है।