प्रकाशित: 4 मार्च 2026समाचार स्रोतराजस्थान
'एजुकेट गर्ल्स' की सफीना हुसैन TIME की वुमन ऑफ द ईयर 2026 सूची में; राजस्थान की शिक्षा क्रांति को वैश्विक पहचान
गैर-लाभकारी संगठन 'एजुकेट गर्ल्स' की संस्थापक सफीना हुसैन को TIME पत्रिका की 'वुमन ऑफ द ईयर 2026' सूची में शामिल किया गया (घोषणा 27 फरवरी – 5 मार्च 2026 के आसपास)। वे दुनिया भर में महिलाओं और बालिकाओं के लिए समानता और अवसर बढ़ाने वाले 16 वैश्विक नेताओं में शामिल हैं।
सफीना ने 2007 में भारत के ग्रामीण, दूरदराज और आदिवासी समुदायों में स्कूल से बाहर बालिकाओं की समस्या को दूर करने के लिए एजुकेट गर्ल्स की स्थापना की, जो राजस्थान के महज 50 गांवों से शुरू हुई थी। यह संगठन अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 25,000 से अधिक गांवों में काम करता है, जहां 1.5 लाख से अधिक सामुदायिक स्वयंसेवक ('टीम बालिका') बालिकाओं का शिक्षा में दाखिला कराने और उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए काम करते हैं। अब तक 20 लाख से अधिक बालिकाओं को स्कूल वापस लाया गया है।
2025 में, यह संगठन एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाने वाला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय गैर-सरकारी संस्था बनी। यह मान्यता राजस्थान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां बाड़मेर, जैसलमेर और जालोर जैसे ग्रामीण जिलों में महिला साक्षरता (52.12%) और बालिकाओं के स्कूल छोड़ने की चुनौतियां बनी हुई हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सफीना हुसैन कौन हैं और वे समाचार में क्यों हैं?
सफीना हुसैन 'एजुकेट गर्ल्स' NGO की संस्थापक हैं और उन्हें TIME वुमन ऑफ द ईयर 2026 नामित किया गया है। 2007 में राजस्थान के 50 गांवों से शुरू हुई उनकी संस्था ने 20 लाख से अधिक बालिकाओं को वापस स्कूल पहुंचाया है।
एजुकेट गर्ल्स ने 2025 में कौन सा पुरस्कार जीता?
एजुकेट गर्ल्स ने 2025 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार जीता, जिसे एशिया का नोबेल माना जाता है। यह पुरस्कार उसे समुदाय के नेतृत्व में चलने वाले बालिका शिक्षा दृष्टिकोण के लिए मिला।
एजुकेट गर्ल्स वर्तमान में कितने राज्यों और गांवों में काम करती है?
एजुकेट गर्ल्स अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 25,000+ गांवों में काम करती है; इसकी शुरुआत 2007 में राजस्थान के मात्र 50 गांवों से हुई थी।
राजस्थान की महिला साक्षरता दर क्या है?
राजस्थान की महिला साक्षरता दर भारत में सबसे कम दरों में से एक है — लगभग 52% — इसलिए बालिका शिक्षा राज्य की सबसे महत्वपूर्ण विकास चुनौतियों में गिनी जाती है।
एजुकेट गर्ल्स कौन-सा सामुदायिक मॉडल अपनाती है?
एजुकेट गर्ल्स साथिन और बाल सभाओं के ज़रिए स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान कर उनका नामांकन कराती है — यह दृष्टिकोण NIPUN भारत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप है।