तीसरे पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोत (ASW SWC) 'अंजदीप' को 22 दिसंबर 2025 को INS अड्यार, चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया। इसे कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने L&T शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के सहयोग से सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया। कुल 77 मीटर लंबाई वाला यह डीजल इंजन और वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित सबसे बड़ा भारतीय नौसेना युद्धपोत है, जिससे उथले तटीय जल में बेहतर संचालन क्षमता मिलती है। यह उन्नत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रूप से विकसित पनडुब्बी-रोधी रॉकेट (ASWROC) और उथले पानी की सोनार प्रणालियों से लैस है। पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिससे रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत पहल को सीधा बढ़ावा मिलता है। इसे 27 फरवरी 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर आईएनएस अंजदीप के रूप में भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। पनडुब्बी-रोधी उथले जल पोत कार्यक्रम हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तटीय और उथले जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
INS अंजदीप: तीसरा स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोत चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया; रक्षा में आत्मनिर्भर भारत की झलक
तीसरे पनडुब्बी-रोधी युद्धक उथले जल पोत (ASW SWC) 'अंजदीप' को 22 दिसंबर 2025 को INS अड्यार, चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया। इसे कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने L&T शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के सहयोग से सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया। 77 मीटर लंबाई वाला यह डीजल इंजन और वाटरजेट प्रणोदन से संचालित भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा युद्धपोत है, जो उथले तटीय जल में बेहतर संचालन क्षमता देता है। यह उन्नत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रूप से विकसित पनडुब्बी-रोधी रॉकेट (ASWROC) और उथले पानी की सोनार प्रणालियों से लैस है। पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जिससे रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत पहल को सीधे बढ़ावा मिलता है। ASW SWC कार्यक्रम हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तटीय और उथले जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य तथ्य
- तीसरा ASW SWC 'अंजदीप' 22 दिसंबर 2025 को INS अड्यार, चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया।
- GRSE ने L&T शिपयार्ड के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत इसका निर्माण किया।
- 77 मीटर लंबाई वाला यह डीजल इंजन और वॉटरजेट प्रणोदन से चलने वाला सबसे बड़ा भारतीय नौसेना युद्धपोत है।
- इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री, उन्नत टॉरपीडो और पनडुब्बी-रोधी रॉकेट हैं।
- 27 फरवरी 2026 को चेन्नई में INS अंजदीप के रूप में इसे भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया।
- उथले जल में पनडुब्बी-रोधी पोत बनाने का यह कार्यक्रम हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती मौजूदगी के बीच तटीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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INS अंजादीप, उथले पानी में पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए तीसरा युद्धपोत, किस शिपयार्ड ने डिजाइन और निर्मित किया था?
INS अंजादीप को कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया था। यह काम सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत L&T शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के साथ साझेदारी में हुआ।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
INS अंजदीप क्या है और इसे भारतीय नौसेना को कब सौंपा गया?
INS अंजदीप उथले जल में पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए बना तीसरा स्वदेशी पोत (ASW SWC) है। इसे 22 दिसंबर 2025 को INS अड्यार, चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया और 27 फरवरी 2026 को कमीशन किया गया।
INS अंजदीप का निर्माण किस शिपयार्ड ने और किस मॉडल के तहत किया?
INS अंजदीप का निर्माण कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने L&T शिपयार्ड, कट्टुपल्ली के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत किया। यह भारतीय शिपिंग रजिस्ट्री (IRS) के नौसेना नियमों के अंतर्गत वर्गीकृत है।
INS अंजदीप की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ क्या हैं?
INS अंजदीप 77 मीटर लंबा है और डीजल इंजन-वॉटरजेट प्रणोदन वाला भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा युद्धपोत है। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है और यह उन्नत हल्के टॉरपीडो व पनडुब्बी-रोधी रॉकेट से लैस है।
भारत के लिए ASW SWC कार्यक्रम का रणनीतिक महत्व क्या है?
ASW SWC कार्यक्रम हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की तटीय सुरक्षा को मजबूत करता है, जहाँ चीनी पनडुब्बी गतिविधि बढ़ रही है। इस कार्यक्रम के तहत आठ पोतों का ऑर्डर दिया गया है, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल को बढ़ावा मिलता है।
INS अंजदीप रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि को कैसे दर्शाता है?
INS अंजदीप में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है और इसे घरेलू सार्वजनिक-निजी भागीदारी से बनाया गया है। यह विदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम कर उन्नत नौसेना युद्धपोतों के स्थानीय स्तर पर डिजाइन और निर्माण की भारत की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करता है।
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