राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि जयपुर 15 जनवरी 2026 को पहली बार किसी सैन्य छावनी या सैन्य क्षेत्र के बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी करेगा। सेना दिवस 1949 में जनरल के.एम. करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की स्मृति में मनाया जाता है। जयपुर में परेड आयोजित करने का निर्णय सेना की प्रमुख परेडों को बारी-बारी से अलग-अलग शहरों में कराने की हालिया प्रथा के अनुरूप है, ताकि जनसंपर्क बढ़े और समृद्ध सैन्य परंपरा वाले राज्यों के योगदान को सम्मान मिले। राजस्थान की सैन्य विरासत मजबूत है, जिसमें राजपूताना राइफल्स जैसी प्रसिद्ध रेजीमेंट और वीर चक्र-परमवीर चक्र विजेताओं की परंपरा शामिल है। 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी 8-12 जनवरी 2026 को जयपुर के सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन कॉलेज परिसर में आयोजित होने वाली थी। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह आयोजन राजस्थान के नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संबंध को और गहरा करेगा।
जयपुर पहली बार सैन्य क्षेत्र के बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी करेगा: राजस्थान के मुख्यमंत्री ने 15 जनवरी 2026 को भव्य उत्सव की घोषणा की
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि जयपुर 15 जनवरी 2026 को पहली बार किसी सैन्य छावनी या सैन्य क्षेत्र के बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी की। सेना दिवस 1949 में जनरल के.एम. करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की स्मृति में मनाया जाता है। जयपुर में परेड आयोजित करने का निर्णय सेना की प्रमुख परेडों को अलग-अलग शहरों में बारी-बारी से कराने की हालिया प्रथा के अनुरूप है, ताकि जनसंपर्क बढ़े और समृद्ध सैन्य परंपरा वाले राज्यों के योगदान को सम्मान मिले। राजस्थान की सशक्त सैन्य विरासत है; राजपूताना राइफल्स जैसी प्रसिद्ध रेजीमेंट और वीर चक्र-परमवीर चक्र विजेता इसका उदाहरण हैं। 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी 8-12 जनवरी 2026 को जयपुर के सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन कॉलेज परिसर में आयोजित होने वाली थी। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह आयोजन राजस्थान के नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच संबंध गहरा करेगा।
मुख्य तथ्य
- जयपुर ने 15 जनवरी 2026 को पहली बार सैन्य छावनी से बाहर 78वीं सेना दिवस परेड की मेजबानी की।
- परेड का मार्ग जगतपुरा के महल रोड पर अक्षय पात्र सर्किल से बॉम्बे हॉस्पिटल तक था।
- सेना दिवस 1949 में जनरल के.एम. करियप्पा के भारत के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की स्मृति में मनाया जाता है।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे राजस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया।
- 2023 के बाद यह लगातार चौथा वर्ष था जब परेड दिल्ली से बाहर आयोजित हुई।
- जनता की भागीदारी के लिए पंजीकरण खोला गया जिससे सेना नागरिकों के करीब आई।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सेना दिवस परेड के ऐतिहासिक महत्व एवं जनवरी 2026 आयोजन की मेज़बानी में राजस्थान की भूमिका की चर्चा करें।
उत्तर (50 शब्द):
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के अनुसार, जयपुर 15 जनवरी 2026 को पहली बार सैन्य क्षेत्र के बाहर सेना दिवस परेड की मेज़बानी करेगा। 1949 में जनरल के.एम. करिअप्पा पहले भारतीय सेनाध्यक्ष बने और सर फ्रांसिस बुचर की जगह ली। राजस्थान में राजपूताना राइफल्स एवं अनेक परमवीर चक्र विजेता हैं।
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78वीं सेना दिवस परेड जनवरी 2026 में जयपुर में किस तारीख को आयोजित हुई?
78वीं सेना दिवस परेड 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित हुई।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?
सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को 1949 की उस ऐतिहासिक घटना की याद में मनाया जाता है, जब जनरल के.एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर फ्रांसिस बुचर से पदभार ग्रहण किया और भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने। यह सेना की शीर्ष कमान के पूर्ण भारतीयकरण का प्रतीक है।
जनवरी 2026 में जयपुर में आयोजित 78वीं सेना दिवस परेड में क्या ऐतिहासिक था?
15 जनवरी 2026 को जयपुर में हुई 78वीं सेना दिवस परेड पहली बार किसी सैन्य छावनी या सैन्य क्षेत्र के बाहर आयोजित की गई थी। यह सैन्य समारोहों को आम जनता के करीब लाने की भारतीय सेना की कोशिश में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
2026 में जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड का मार्ग क्या था?
15 जनवरी 2026 को जयपुर में सेना दिवस परेड महल रोड, जगतपुरा पर आयोजित हुई, जो अक्षय पात्र सर्किल से शुरू होकर बॉम्बे हॉस्पिटल पर समाप्त हुई।
78वीं सेना दिवस परेड के लिए जयपुर की घोषणा किसने की और राजस्थान के लिए इसका क्या महत्व था?
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर को स्थल घोषित किया और इसे राजस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया। 2023 के बाद यह लगातार चौथा वर्ष था जब सेना दिवस परेड दिल्ली से बाहर — बेंगलुरु, लखनऊ और पुणे के बाद — आयोजित हुई।
जनरल K.M. करियप्पा कौन थे और भारतीय सेना के इतिहास में उनकी क्या भूमिका थी?
जनरल के.एम. करियप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ थे। उन्हें 15 जनवरी 1949 को नियुक्त किया गया था, जब उन्होंने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर फ्रांसिस बुचर से पदभार ग्रहण किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष इस तिथि पर सेना दिवस मनाया जाता है।
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