भारतीय फार्माकोपिया आयोग और उत्तर प्रदेश फार्मा काउंसिल ने 14 जुलाई 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित वाईईआईडीए मेडटेक इन्वेस्टर्स मीट एंड साइट विजिट 2026 के दौरान हुआ। इसका उद्देश्य गुणवत्ता मानकों, नियामक व्यवस्था में उत्कृष्टता, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देकर दवा तथा चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को मजबूत करना है।
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थाएँ दवा और चिकित्सा उपकरण उद्योगों में गुणवत्ता मानकों तथा नियमों के पालन को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगी। वे भारतीय औषध संहिता, औषध सतर्कता और पदार्थ सतर्कता के बारे में जागरूकता बढ़ाएँगी। हितधारकों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए जाएँगे। अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-जगत व शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना भी सहमति के दायरे में है।
समझौते में लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रतिकूल घटनाओं की सूचना देने के लिए डिजिटल साधन उपलब्ध कराने का स्पष्ट प्रावधान है। रोगी सुरक्षा बढ़ाने के लिए गुणवत्ता आश्वासन और बिक्री के बाद बाजार निगरानी से जुड़ी पहलें भी की जाएँगी। इस तरह नियमों का पालन, कौशल-विकास, सूचना व्यवस्था और निगरानी को एक साथ जोड़ा गया है।
यह समझौता उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा के मानकों को आगे बढ़ाने, नवाचार को सहारा देने और भारत की नियामक व्यवस्था मजबूत करने की आयोग की प्रतिबद्धता दर्शाता है। इससे उत्तर प्रदेश को दवा, चिकित्सा उपकरण और स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी योगदान मिलने का लक्ष्य है। साझेदारी गुणवत्ता, सुरक्षा, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली मजबूत व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करेगी।
