राजस्थान के पाली जिले में रवींद्र सिंह के रूप में जन्मीं रवीना सिंह ने राजस्थान बार काउंसिल में एक महिला के रूप में पंजीकृत होने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति बनकर इतिहास रचा है। उन्होंने पहले ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी। यह उपलब्धि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के बाद भारत में ट्रांसजेंडर पहचान को मिलती कानूनी मान्यता के विस्तार को दर्शाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में लगभग 4.88 लाख ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं।
रवीना सिंह राजस्थान की पहली ट्रांसजेंडर वकील बनीं
रवीना सिंह, जिनका जन्म राजस्थान के पाली जिले में रवींद्र सिंह के रूप में हुआ था, राजस्थान बार काउंसिल में महिला के रूप में पंजीकृत होने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति बनकर इतिहास रच चुकी हैं। उन्होंने पहले ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी। यह उपलब्धि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के बाद भारत में ट्रांसजेंडर पहचान को मिल रही विकसित कानूनी मान्यता को दर्शाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में लगभग 4.88 लाख ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं।
मुख्य तथ्य
- पाली में जन्मी रवीना सिंह (रवींद्र सिंह) राजस्थान की पहली ट्रांसजेंडर वकील बनीं।
- उन्होंने राजस्थान बार काउंसिल में महिला के रूप में पंजीकरण कराया।
- उन्होंने ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।
- यह उपलब्धि NALSA बनाम भारत संघ (2014) फैसले के तहत भारत की प्रगति को दर्शाती है।
- ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
- यह उपलब्धि पेशेवर क्षेत्रों में वंचित समुदायों के समावेश को बढ़ावा देती है।
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राजस्थान बार काउंसिल में महिला के रूप में पंजीकृत होने वाली पहली ट्रांसजेंडर वकील रवीना सिंह किस जिले से हैं?
रवीना सिंह का जन्म राजस्थान के पाली जिले में रवींद्र सिंह के रूप में हुआ था और वे राजस्थान बार काउंसिल में महिला के रूप में पंजीकृत होने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति बनीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रवीना सिंह कौन हैं और उन्होंने क्या ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की?
रवीना सिंह का जन्म राजस्थान के पाली जिले में रवींद्र सिंह के रूप में हुआ था। वे राजस्थान बार काउंसिल में महिला के रूप में पंजीकृत होने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति बनीं और इसी तरह राजस्थान की पहली ट्रांसजेंडर वकील बनीं।
भारत में ट्रांसजेंडर पहचान की मान्यता के लिए कौन-सी कानूनी व्यवस्था है?
भारत में ट्रांसजेंडर पहचान को सर्वोच्च न्यायालय के NALSA बनाम भारत संघ (2014) फैसले और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत कानूनी मान्यता और सुरक्षा प्रदान की गई है।
वकील बनने से पहले रवीना सिंह ने ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए क्या कानूनी कदम उठाया?
बार काउंसिल में पंजीकरण से पहले रवीना सिंह ने ट्रांसजेंडर अधिकारों की पैरवी करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। यह वंचित समुदायों के लिए न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की संख्या कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लगभग 4.88 लाख ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं। यह आँकड़ा उस समुदाय के आकार को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है, जिसके कानूनी अधिकार धीरे-धीरे मान्यता पा रहे हैं।
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