राजस्थान सरकार ने 22 नवंबर 2025 को भामाशाह नीति 2025 को मंज़ूरी दी। इसका उद्देश्य परोपकारी दाताओं और कॉर्पोरेट संस्थाओं से मिलने वाले दान से सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाना है। नीति व्यक्तिगत दाताओं, अनिवासी भारतीयों, कॉर्पोरेट संस्थाओं, ट्रस्टों और पूर्व छात्र समूहों को कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, स्मार्ट कक्षाओं, खेल सुविधाओं, पेयजल इकाइयों, स्कूलों की चारदीवारी और परिसरों के सुधार में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है।

दाताओं को पट्टिकाओं, प्रमाण-पत्रों और एक अलग राज्य पोर्टल पर डिजिटल पावती के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलती है। नीति का नाम भामाशाह (1547-1600) के नाम पर रखा गया है, जो महाराणा प्रताप के दरबार में प्रसिद्ध कोषाध्यक्ष और दानवीर थे। यह नीति समाज की भागीदारी से होने वाली जनसेवा और निःस्वार्थ योगदान का प्रतीक है।