केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 24 फरवरी 2026 को राजस्थान में जल संचय जन भागीदारी 2.0 के कार्यान्वयन की समीक्षा की। राज्य की भौगोलिक स्थिति, कम वर्षा और लंबे समय से चली आ रही पानी की कमी को देखते हुए यह राजस्थान के लिए महत्त्वपूर्ण समसामयिकी विषय है, क्योंकि यह सीधे राज्य के जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ा है।

राष्ट्रीय जल संचय जन भागीदारी पहल 6 सितंबर 2024 को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के तहत शुरू हुई थी। 2.0 चरण का लक्ष्य 31 मई 2026 तक 1 करोड़ कृत्रिम पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाएं बनाना है। राजस्थान में इस अभियान का फोकस सामुदायिक भागीदारी, वर्षा जल संचयन, कृत्रिम पुनर्भरण, बंद पड़े बोरवेल के पुनर्जीवन और पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण पर है। जोहड़, बावड़ी और वर्षा जल संचयन प्रणालियां राजस्थान के स्थानीय जल-प्रबंधन अनुभव से जुड़ी हैं, इसलिए यह पहल केवल निर्माण-लक्ष्य नहीं है, बल्कि स्थानीय स्वामित्व और दीर्घकालिक रखरखाव को भी उतना ही अहम बनाती है।

RAS और UPSC में इससे राजस्थान के शुष्क भूगोल, जल संसाधन प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी पर सीधे प्रश्न बन सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में अभियान का नाम, लॉन्च पृष्ठभूमि, लक्ष्य-तिथि और संरचनाओं के प्रकार पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे जल संकट, जल संसाधन प्रबंधन और समुदाय आधारित संरक्षण के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है। राजस्थान जैसे शुष्क राज्य में जल संचय जन भागीदारी 2.0 यह दिखाती है कि सरकारी अभियान तभी टिकाऊ बनता है जब स्थानीय समाज उसके निर्माण, उपयोग और रखरखाव में भागीदार हो।