राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शांति विधेयक 2025 को मंजूरी दी। यह अपडेट 23 दिसंबर 2025 का है। इसका मुख्य बिंदु यह है कि निजी कंपनियों को भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने और संचालित करने की अनुमति दी गई है। यह भागीदारी सरकारी लाइसेंस और नियामकीय निगरानी के तहत सीमित रूप में होगी। पहले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को बहुत कड़े सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाता था; इसलिए निजी निवेश के लिए रास्ता खुलना भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इस विधेयक का घोषित लक्ष्य 2047 तक भारत की परमाणु क्षमता को 100 गीगावॉट तक ले जाना है। इसके साथ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में 49% तक एफडीआई की अनुमति भी जोड़ी गई है। परीक्षा में इससे निजी निवेश, औद्योगिक क्षमता-वृद्धि, केंद्र सरकार की लाइसेंसिंग भूमिका और ऊर्जा नीति में नियमन जैसे कोणों पर प्रश्न बन सकते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए चार तथ्य सीधे याद रखने योग्य हैं: शांति विधेयक 2025, निजी कंपनियों द्वारा परमाणु संयंत्र निर्माण और संचालन की अनुमति, सरकारी लाइसेंस व नियामकीय निगरानी, तथा 2047 तक 100 गीगावॉट का लक्ष्य। 49% एफडीआई की सीमा भी संभावित तथ्यात्मक प्रश्न बन सकती है। RAS और UPSC जैसे पेपरों में इसे समसामयिकी को स्टैटिक जीके से जोड़ने वाले विषय के रूप में पढ़ना चाहिए। मुख्य परीक्षा में यह विषय ऊर्जा मिश्रण, निजी क्षेत्र की भूमिका, नियमन, निवेश और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों से जोड़ा जा सकता है। स्टैटिक जीके से जोड़कर देखें तो परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा नीति और सरकारी नियमन जैसे विषयों की बुनियादी समझ यहाँ काम आती है।
