भारत सरकार ने तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में राष्ट्रीय जहाज निर्माण और भारी उद्योग पार्क, यानी एनशिप, के लिए विशेष प्रयोजन वाहन स्थापित किया है। यह वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण और सिपकॉट का संयुक्त उद्यम है। प्रस्तावित क्लस्टर 2,000 एकड़ क्षेत्र में फैलेगा और इसके पास 2 किमी का वॉटरफ्रंट होगा। परीक्षा की दृष्टि से इसका सबसे सीधा तथ्य यह है कि इसे भारत का पहला मेगा जहाज निर्माण क्लस्टर बताया गया है।

यह पहल आर्थिक विकास, बंदरगाह-आधारित औद्योगीकरण और समुद्री क्षमता को एक साथ जोड़ती है। जहाज निर्माण केवल उद्योग का मुद्दा नहीं है; यह बंदरगाह अवसंरचना, भारी इंजीनियरिंग, रक्षा और वाणिज्यिक जहाजों तथा मरम्मत यार्ड से भी जुड़ता है। तूतुकुड़ी का चयन इसलिए भी परीक्षा-उपयोगी है क्योंकि यह मन्नार की खाड़ी से जुड़ा बंदरगाह शहर है और मौजूदा समुद्री अवसंरचना का लाभ उठा सकता है।

भारत की वैश्विक जहाज निर्माण हिस्सेदारी 1% से कम बताई गई है, इसलिए एनशिप को वैश्विक समुद्री केंद्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा से जोड़कर पढ़ना चाहिए। यह मैरीटाइम इंडिया विजन 2030, सागरमाला कार्यक्रम और मेक इन इंडिया जैसे व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप बताया गया है। राज्य की भूमिका भूमि, अवसंरचना सहायता और नियामकीय सुविधा से जुड़ी है, जबकि विशेष प्रयोजन वाहन की संरचना केंद्र और तमिलनाडु के संयुक्त विकास को संस्थागत रूप देती है। प्रीलिम्स में स्थान, भागीदार संस्थाएं, 2,000 एकड़ क्षेत्र, 2 किमी वॉटरफ्रंट और पहला मेगा जहाज निर्माण क्लस्टर जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे बंदरगाह-आधारित विकास, औद्योगिक क्लस्टर नीति और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे 31 जनवरी 2026 के करेंट अफ़ेयर्स संदर्भ में याद रखें।