तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में स्थित वी ओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी ने उन्नत एंटी-ड्रोन सुरक्षा सिस्टम लागू करने की शुरुआत कर भारत के बंदरगाह सुरक्षा ढांचे में अहम मिसाल रखी। यह भारत का पहला बंदरगाह है जिसने ऐसे सिस्टम के क्रियान्वयन की पहल की। परियोजना पर वी ओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी के मुख्य यांत्रिक अभियंता ए गणेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की ओर से अनुराग अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। इसे 3 महीने के भीतर पूरा किया जाना निर्धारित था।

यह सिस्टम बंदरगाह जैसे जटिल और संवेदनशील क्षेत्र के लिए बनाया गया है। इसमें रेडियो फ़्रीक्वेंसी और रडार आधारित ड्रोन डिटेक्शन तथा जैमिंग क्षमता शामिल है। ड्रोन डिटेक्टर, ड्रोन डिटेक्शन रडार और मैन-पैक जैमर मिलकर 360-डिग्री कवरेज देते हैं और इसकी प्रभावी रेंज 5 किलोमीटर तक है। इससे अनधिकृत ड्रोन की रियल-टाइम पहचान करने, उन पर नज़र रखने, वर्गीकरण करने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता मिलती है। सिस्टम रणनीतिक संपत्तियों, कर्मचारियों और बंदरगाह संचालन की सुरक्षा से भी जुड़ा है। परीक्षा की दृष्टि से यह केवल एक तकनीकी खबर नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक ड्रोन-रोधी क्षमता से जुड़ा मामला है।

यह पहल मैरीटाइम इंडिया विजन 2030, सागरमाला कार्यक्रम और अमृत काल विजन 2047 से भी जुड़ती है। इसका उद्देश्य हवाई क्षेत्र की निगरानी, उभरते तटीय रक्षा मानकों के अनुपालन और बंदरगाह की आपात प्रतिक्रिया तैयारी को मजबूत करना है। स्टैटिक जीके में इसे प्रमुख बंदरगाहों, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन तकनीक और शासन में विज्ञान-प्रौद्योगिकी के उपयोग से जोड़ा जा सकता है। प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, संस्था, रेंज और तकनीकी घटक पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में यह राष्ट्रीय सुरक्षा और बंदरगाह आधुनिकीकरण का उदाहरण बन सकता है।