ISRO ने 30 दिसंबर 2025 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सॉलिड मोटर स्टैटिक टेस्ट फ़ैसिलिटी में एसएसएलवी के उन्नत तृतीय चरण का स्थैतिक परीक्षण सफलतापूर्वक किया। यह परीक्षण 108 सेकंड तक चला। इस दौरान 233 सेंसरों से दबाव, थ्रस्ट, तापमान और कंपन जैसे मानकों पर नज़र रखी गई। परीक्षा की दृष्टि से यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रक्षेपण यान के चरण, परीक्षण-प्रक्रिया और छोटे उपग्रह मिशनों से जुड़ी बुनियादी समझ एक साथ जुड़ती है।
उन्नत तृतीय चरण में कार्बन-एपॉक्सी मोटर केस, बेहतर इग्नाइटर और बेहतर नोजल शामिल हैं। इन बदलावों से एसएसएलवी की पेलोड क्षमता लगभग 90 किलोग्राम बढ़ने की बात दर्ज है। एसएसएलवी तीन-चरण वाला पूरी तरह ठोस ईंधन वाला रॉकेट है, जिसे मांग-आधारित छोटे उपग्रह मिशनों के लिए तैयार किया गया है। ऐसे प्रश्नों में ठोस प्रणोदन, पेलोड क्षमता, प्रक्षेपण यान डिज़ाइन और छोटे उपग्रहों की उपयोगिता को साथ पढ़ना उपयोगी रहता है। RAS और UPSC शैली की तैयारी में इसे सीधे तथ्य और बुनियादी अवधारणा, दोनों रूपों में पढ़ा जा सकता है।
स्टैटिक जीके के लिए सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा और एसएसएलवी जैसे तथ्य सीधे याद रखने योग्य हैं। मुख्य परीक्षा में इसका उपयोग स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमता, छोटे उपग्रहों के तेज़ प्रक्षेपण और तकनीकी परीक्षणों की भूमिका पर लिखते समय किया जा सकता है। सबसे परीक्षा-उपयोगी बिंदु यह है कि उन्नत तृतीय चरण मोटर का सफल स्थैतिक परीक्षण इसे उड़ान में शामिल करने के लिए तैयार माने जाने का संकेत देता है, जबकि प्रारंभिक परीक्षा में तारीख, स्थान, अवधि, सेंसरों की संख्या और पेलोड-वृद्धि जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं।
