भारत ने 17 जनवरी 2026 को महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर अपनी रणनीतिक कूटनीतिक पहल की घोषणा की। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत 2031 तक ₹34,300 करोड़ आवंटित किए गए। लिथियम, कोबाल्ट, निकल, वैनेडियम, नायोबियम, जर्मेनियम, रीनियम, बेरिलियम, टैंटलम और स्ट्रॉन्शियम—इन 10 महत्वपूर्ण खनिजों की ज़रूरत पूरी करने के लिए भारत 100% आयात पर निर्भर है। वैश्विक स्तर पर भारत एल्युमीनियम का दूसरा सबसे बड़ा और लौह अयस्क का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए 368 परियोजनाएँ शुरू की हैं। खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) से जुड़ी पहलों के तहत भारत ने अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और चिली के साथ साझेदारी की है। राजस्थान में फ़्लोराइट, वोलेस्टोनाइट और सीसा-जस्ता के बड़े भंडार हैं। राजसमंद स्थित हिंदुस्तान जिंक, जस्ता, सीसा और चाँदी का प्रमुख उत्पादक है। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए महत्वपूर्ण हैं।