भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 13 मार्च 2026 को CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर समुद्र तल पर 165 सेकंड का हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक किया। परीक्षण से पता चला कि इंजन अधिक थ्रस्ट दे सकता है। इससे भारत के भारी पेलोड ले जाने वाले प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3), जिसे पहले भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क-3 (GSLV Mk III) कहा जाता था, की पेलोड ले जाने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। CE20 इंजन तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन को प्रणोदक के रूप में इस्तेमाल करता है और LVM3 के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण (C25) को शक्ति देता है। थ्रस्ट में यह सुधार चंद्रमा से नमूने वापस लाने वाले चंद्रयान-4 मिशन और भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है। ISRO के वर्तमान LVM3 मिशन पृष्ठ के अनुसार, यह रॉकेट भूस्थिर अंतरण कक्षा में 4,200 किलोग्राम तक पेलोड ले जा सकता है।
ISRO ने प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3) के CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर सफल परीक्षण किया
ISRO ने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर 165 सेकंड तक परीक्षण किया। इससे गगनयान और चंद्रयान-4 के लिए LVM3 की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ सकती है।
मुख्य तथ्य
- ISRO ने 13 मार्च 2026 को CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर समुद्र तल पर 165 सेकंड का हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक किया।
- परीक्षण से पता चला कि इंजन अधिक थ्रस्ट दे सकता है, जिससे भारत के भारी पेलोड ले जाने वाले प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3) की पेलोड ले जाने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
- CE20 इंजन तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन को प्रणोदक के रूप में इस्तेमाल करता है और LVM3 के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण (C25) को शक्ति देता है।
- थ्रस्ट में यह सुधार चंद्रमा से नमूने वापस लाने वाले आगामी चंद्रयान-4 मिशन और गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है।
- ISRO के वर्तमान LVM3 मिशन पृष्ठ के अनुसार, यह रॉकेट भूस्थिर अंतरण कक्षा में 4,200 किलोग्राम तक पेलोड ले जा सकता है।
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ISRO ने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का किस थ्रस्ट स्तर पर सफल परीक्षण किया, और समुद्र-स्तर पर हॉट टेस्ट कितने सेकंड तक चला?
ISRO ने 10 मार्च 2026 को महेंद्रगिरि स्थित ISRO Propulsion Complex में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर 165 सेकंड का समुद्र-स्तर हॉट टेस्ट किया। इस परीक्षण में nozzle protection system का उपयोग हुआ और बढ़े हुए थ्रस्ट स्तर पर इंजन के समुद्र-स्तर संचालन को योग्य साबित किया गया। CE20, LVM3 के C25 ऊपरी चरण को शक्ति देता है, इसलिए यह परीक्षण उच्च पेलोड और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़े अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ISRO ने LVM3 के लिए CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर परीक्षण करके क्या उपलब्धि हासिल की?
ISRO ने 13 मार्च 2026 को CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर समुद्र तल पर 165 सेकंड का हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक किया। परीक्षण से पता चला कि इंजन अधिक थ्रस्ट दे सकता है, जिससे प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3) की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ सकती है।
ISRO का CE20 क्रायोजेनिक इंजन LVM3 रॉकेट में किस काम आता है?
CE20 भारत का क्रायोजेनिक इंजन है, जो प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3) के ऊपरी चरण में इस्तेमाल होता है। ISRO ने 13 मार्च 2026 को इसका 22 टन थ्रस्ट पर 165 सेकंड तक परीक्षण किया। पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ाने के लिए परीक्षण में नई नोजल सुरक्षा प्रणाली भी शामिल की गई थी।
ISRO ने 2026 में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण कहाँ किया?
ISRO ने 13 मार्च 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित ISRO प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण किया। LVM3 रॉकेट के लिए 22 टन थ्रस्ट पर हुए 165 सेकंड के इस परीक्षण में नई नोजल सुरक्षा प्रणाली भी शामिल थी।
ISRO के CE20 इंजन में नोजल सुरक्षा प्रणाली किस काम आती है?
नोजल सुरक्षा प्रणाली ISRO के CE20 क्रायोजेनिक इंजन में जोड़ी गई नई व्यवस्था है। 13 मार्च 2026 को महेंद्रगिरि में 22 टन थ्रस्ट पर हुए 165 सेकंड के हॉट टेस्ट में भी इसे परखा गया। इसे नोजल की सुरक्षा करने और LVM3 के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
ISRO के CE20 क्रायोजेनिक इंजन परीक्षण से LVM3 की पेलोड ले जाने की क्षमता कैसे बढ़ सकती है?
CE20 इंजन का मानक थ्रस्ट 20 टन है। 22 टन थ्रस्ट पर हुए परीक्षण से पता चला कि प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3), जिसे पहले भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क-3 (GSLV Mk III) कहा जाता था, की पेलोड ले जाने की क्षमता उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकती है। इससे भारी पेलोड प्रक्षेपित करने की भारत की क्षमता भी बढ़ सकती है।
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