77वें गणतंत्र दिवस का विषय बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्रित था। 7 नवंबर 1875 को पहली बार प्रकाशित वंदे मातरम को बाद में 1882 के उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया और यह स्वतंत्रता आंदोलन का नारा बना। यह गीत पहली बार 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सत्र में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। यह विषय परेड के सांस्कृतिक प्रदर्शनों और संस्कृति मंत्रालय की विजेता झांकी 'वंदे मातरम — एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार' में दिखाई दिया। उत्सव ने गीत की उपनिवेश-विरोधी भावना को 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत आधुनिक भारत की आकांक्षाओं से जोड़ा।