जनजातीय कार्य मंत्रालय ने TRIFED द्वारा लागू RISA 'टाइमलेस ट्राइबल' पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य जनजातीय वस्त्रों, कढ़ाई और हस्तशिल्प की प्रीमियम ब्रांडिंग करना है। शुरुआती चरण में राज्यों के 10 क्लस्टर शामिल हैं — असम से एरी रेशम, लद्दाख से पश्मीना, छत्तीसगढ़ से ढोकरा कला और तमिलनाडु से टोडा कढ़ाई। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय कारीगरों के उत्पादों को प्रीमियम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करना और पारंपरिक शिल्पकला को संरक्षित रखते हुए कारीगरों को उचित मूल्य दिलाना है।
जनजातीय वस्त्रों की प्रीमियम ब्रांडिंग के लिए RISA 'टाइमलेस ट्राइबल' पहल शुरू
जनजातीय कार्य मंत्रालय और TRIFED ने 10 क्लस्टरों में जनजातीय वस्त्रों की प्रीमियम ब्रांडिंग के लिए RISA 'टाइमलेस ट्राइबल' शुरू किया।
मुख्य तथ्य
- जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने रिसा 'टाइमलेस ट्राइबल' पहल शुरू की है, जिसे TRIFED आदिवासी वस्त्रों और हस्तशिल्प को प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए लागू कर रहा है।
- RISA असम के बोडो समुदाय का पारंपरिक परिधान है जिसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी।
- यह पहल One District One Product (ODOP) के अंतर्गत आदिवासी उत्पादों को बाजार में स्थान दिलाने का प्रयास है।
- TRIFED जनजातीय उत्पादों के विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने वाली केंद्रीय संस्था है।
- इस पहल से लाखों आदिवासी बुनकरों और कारीगरों की आजीविका सुधरने की उम्मीद है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
RISA 'टाइमलेस ट्राइबल' पहल क्या है और इसे कौन लागू कर रहा है?
**RISA 'टाइमलेस ट्राइबल'** **जनजातीय कार्य मंत्रालय** द्वारा जनजातीय वस्त्रों, कढ़ाई और हस्तशिल्प की प्रीमियम ब्रांडिंग के लिए शुरू की गई पहल है। इसे **TRIFED (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ)** लागू कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय कारीगरों के उत्पादों को **प्रीमियम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों** में स्थापित करना है।
RISA टाइमलेस ट्राइबल पहल के पहले चरण में कौन से जनजातीय वस्त्र क्लस्टर शामिल हैं?
RISA 'टाइमलेस ट्राइबल' के प्रारंभिक चरण में राज्यों के **10 क्लस्टर** शामिल हैं: - **असम** से **एरी रेशम** — एक अनूठा अहिंसक, पर्यावरण-अनुकूल रेशम - **लद्दाख** से **पश्मीना** — बेहद बारीक और कीमती ऊन - **छत्तीसगढ़** से **ढोकरा कला** — मोम-क्षय विधि से होने वाली प्राचीन धातु ढलाई - **तमिलनाडु** से **टोडा कढ़ाई** — टोडा जनजाति की UNESCO-मान्यता प्राप्त सुईकारी ये भारत भर की विविध जनजातीय शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
RISA टाइमलेस ट्राइबल योजना के तहत TRIFED जनजातीय कारीगरों को क्या सहायता प्रदान करता है?
**RISA 'टाइमलेस ट्राइबल'** पहल के तहत, **TRIFED** जनजातीय कारीगरों को व्यापक सहायता देता है: - **डिजाइन सहायता** — प्रामाणिकता बनाए रखते हुए बाजार में आकर्षण बढ़ाने के लिए डिजाइन संबंधी पेशेवर सुझाव - **गुणवत्ता मानकीकरण** — प्रीमियम कीमतें पाने के लिए निरंतर गुणवत्ता सुनिश्चित करना - **बाजार पहुंच** — TRIFED की **खुदरा श्रृंखला** (Tribes India स्टोर) और **ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म** से लक्ष्य जनजातीय कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियम खरीदारों से सीधे जोड़ना है।
TRIFED क्या है और भारत की जनजातीय अर्थव्यवस्था में इसकी क्या भूमिका है?
**TRIFED (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ)** **जनजातीय कार्य मंत्रालय** के तहत एक राष्ट्रीय शीर्ष संगठन है जो: - जनजातीय उत्पादों और हस्तशिल्प के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विपणन में मदद करता है - **जनजातीय कारीगरों और वन उपज संग्रहकर्ताओं** को उचित मूल्य दिलाता है - जनजातीय समुदायों में कौशल विकास को बढ़ावा देता है RISA 'टाइमलेस ट्राइबल' पहल से TRIFED जनजातीय शिल्पों को वैश्विक बाजारों में **प्रीमियम ब्रांड दर्जा** दिलाने की दिशा में काम कर रहा है।
RISA टाइमलेस ट्राइबल पहल क्यों शुरू की गई और यह जनजातीय कारीगरों की किस समस्या का समाधान करती है?
**RISA 'टाइमलेस ट्राइबल'** पहल जनजातीय कारीगरों को **उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए कम कीमत** मिलने की दीर्घकालिक समस्या को दूर करने के लिए शुरू की गई क्योंकि: - प्रीमियम बाजारों तक पहुंच नहीं (स्थानीय या कम लाभ वाली बिक्री तक सीमित) - पेशेवर ब्रांडिंग और गुणवत्ता प्रमाणन का अभाव - बिचौलिए मूल्य श्रृंखला का अधिकांश हिस्सा अपने पास रख लेते हैं जनजातीय शिल्पों को **प्रीमियम ब्रांड पहचान** देकर, इस पहल का लक्ष्य **कारीगरों की आय में सुधार** करना और लुप्तप्राय शिल्प परंपराओं को संरक्षित करना है।
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