राजस्थान का वन्यजीव — जीव-जंतु, आवास और संरक्षित प्रजातियाँ
मुख्य तथ्य
- राजस्थान का अभिलिखित वन क्षेत्र 32,869 वर्ग किमी है, जबकि ISFR 2023 के अनुसार वास्तविक वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है।
- राजस्थान की वर्तमान संरक्षित-क्षेत्र सूची में 5 बाघ अभयारण्य हैं: रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली।
- केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान को 1981 में रामसर स्थल और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला।
- मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान 3,162 वर्ग किमी में फैला है और गोडावण का प्रमुख प्राकृतिक आवास है।
- 1730 में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोइयों ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए बलिदान दिया।
मुख्य बिंदु
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राजस्थान का अभिलिखित वन क्षेत्र 32,869 वर्ग किमी है, जबकि ISFR 2023 के अनुसार वास्तविक वन आवरण 16,548.21 वर्ग किमी है।
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राज्य में प्रमुख वन प्रकारों में उष्णकटिबंधीय कंटीला वन, उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, उपोष्णकटिबंधीय पहाड़ी वन और मिश्रित विविध वन शामिल हैं।
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खेजड़ी राज्य वृक्ष, रोहिड़ा राज्य पुष्प, गोडावण राज्य पक्षी और चिंकारा राज्य पशु है।
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राजस्थान की वर्तमान संरक्षित-क्षेत्र सूची में 5 बाघ अभयारण्य हैं: रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली।
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केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान को 1981 में रामसर स्थल और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला।
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मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान 3,162 वर्ग किमी में फैला है और गोडावण का प्रमुख प्राकृतिक आवास है।
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1730 में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोइयों ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए बलिदान दिया।
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क्रेसेप परियोजना जाइका-समर्थित है; इसका ध्यान गोडावण आवास और ओरण संरक्षण पर है।
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राजस्थान के वन्यजीव आवास का आधार क्या है?
राजस्थान के वन्यजीव आवास का आधार शुष्क जलवायु, अरावली पर्वतमाला, थार मरुस्थल, चंबल नदी तंत्र, पूर्वी मैदान, घासभूमि, झाड़ी क्षेत्र और ओरणों का संयुक्त जाल है। राजस्थान का वन्यजीव राज्य की शुष्क जलवायु, अरावली पर्वतमाला, थार मरुस्थल, चंबल नदी तंत्र और पूर्वी मैदानों से गहराई से जुड़ा है। राज्य का अभिलिखित वन क्षेत्र 32,869 वर्ग किमी है, पर वास्तविक वन आवरण भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार 16,548.21 वर्ग किमी है। भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार राजस्थान का कुल वन और वृक्ष आवरण 30,415.01 वर्ग किमी था, इसलिए परीक्षा में केवल घने वन नहीं बल्कि वृक्ष-आवरण और खुले आवास भी साथ पढ़ने पड़ते हैं। इसीलिए यहाँ वन्यजीव केवल घने जंगलों में नहीं, बल्कि घासभूमि, झाड़ीदार क्षेत्र, ओरण, नदी किनारे की पट्टियों और खुले मरुस्थलीय मैदानों में भी मिलते हैं।
वनों के बाहर वृक्ष आवरण और झाड़ी क्षेत्र भी परीक्षा में महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि राजस्थान में कई प्रजातियाँ खुले और अर्ध-खुले आवासों पर निर्भर हैं। चिंकारा, काला हिरण, गोडावण और रेगिस्तानी लोमड़ी जैसे जीव घने जंगल की बजाय खुले मैदान, सेवण घास और रेतीले-झाड़ीदार क्षेत्र पसंद करते हैं। दूसरी ओर बाघ, तेंदुआ, सुस्त भालू और सांभर जैसे जीव अरावली और पूर्वी राजस्थान के शुष्क पर्णपाती वनों से जुड़े हैं।
याद रखने योग्य बात: राजस्थान में वन्यजीव अध्ययन का केंद्र केवल “जंगल” नहीं, बल्कि मरुस्थल, घासभूमि, आर्द्रभूमि और नदी आवास का संयुक्त नेटवर्क है।
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