मुख्य तथ्य

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र की मूल कानूनी रूपरेखा देता है।
  • प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ; रंथंभौर 1973-74 में शुरुआती टाइगर रिजर्वों में शामिल हुआ और 1980 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित हुआ।
  • सरिस्का 1978-79 में टाइगर रिजर्व बना; बाघ पुनर्स्थापन के कारण यह राजस्थान और भारत दोनों के संरक्षण इतिहास में महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।
  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर 1980 के दशक की शुरुआत में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित हुआ और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ।
  • राजस्थान में 3 राष्ट्रीय उद्यान हैं: केवलादेव, रंथंभौर और मुकुंदरा हिल्स;

मुख्य बिंदु

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    वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र की मूल कानूनी रूपरेखा देता है।

  2. 2

    प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ; रंथंभौर 1973-74 में शुरुआती टाइगर रिजर्वों में शामिल हुआ और 1980 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित हुआ।

  3. 3

    सरिस्का 1978-79 में टाइगर रिजर्व बना; बाघ पुनर्स्थापन के कारण यह राजस्थान और भारत दोनों के संरक्षण इतिहास में महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।

  4. 4

    केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर 1980 के दशक की शुरुआत में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित हुआ और 1985 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ।

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    राजस्थान में 3 राष्ट्रीय उद्यान हैं: केवलादेव, रंथंभौर और मुकुंदरा हिल्स; ये क्रमशः आर्द्रभूमि, शुष्क पर्णपाती वन और हाड़ौती-विंध्य परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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    मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान अभयारण्य जैसलमेर और बाड़मेर में फैला है; गोडावण और थार मरुस्थल के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला नाम है।

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    राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व रंथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली हैं; अंतिम दो 2022 और 2023 में जुड़े।

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    जवई बांध तेंदुआ संरक्षण आरक्षित क्षेत्र 2013 में और दूसरा जवई बांध तेंदुआ संरक्षण आरक्षित क्षेत्र 2018 में अधिसूचित हुआ; जोड़बीड़ गाढ़वाला, बिसलपुर, सुंधामाता और गुड़ा विश्नोइयां भी उच्च-उपज संरक्षण आरक्षित क्षेत्र हैं।

राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और संरक्षण आरक्षित क्षेत्र में फर्क क्या है?

राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और संरक्षण आरक्षित क्षेत्र में मुख्य फर्क कानूनी दर्जे, संरक्षण की कठोरता और स्थानीय उपयोग की अनुमति में होता है। राजस्थान के वन्यजीव प्रश्नों में सबसे पहले श्रेणी पहचाननी होती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य पारंपरिक संरक्षित क्षेत्र हैं। राष्ट्रीय उद्यान में संरक्षण का दर्जा अधिक कठोर माना जाता है; वहां वन्यजीव, आवास और प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा प्राथमिक उद्देश्य होती है और मानवीय उपयोग बहुत सीमित रहता है। अभयारण्य भी वन्यजीव संरक्षण के लिए घोषित क्षेत्र है, पर कुछ स्थानीय अधिकार और नियंत्रित गतिविधियां अधिसूचना और नियमों के अनुसार रह सकती हैं। संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र 2002 के संशोधन के बाद अधिक स्पष्ट रूप से उभरे। इनका उद्देश्य सरकारी, सामुदायिक या निजी भूमि पर ऐसे आवासों की रक्षा करना है जो राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य जितने बड़े न हों, पर जैव-विविधता, गलियारे, जलाशय या पक्षी आवास के लिए महत्त्वपूर्ण हों। राजस्थान वन विभाग की संरक्षित क्षेत्र सूची में राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों का कुल क्षेत्रफल 510.31 वर्ग किलोमीटर दिया गया है, इसलिए श्रेणी के साथ क्षेत्रफल और जिला भी परीक्षा में काम आता है।

भर्ती परीक्षा में परिभाषा से अधिक उपयोगी बात यह है कि किस श्रेणी में कौन-सा नाम आता है। केवलादेव, रंथंभौर और मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान हैं; सरिस्का और मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान अभयारण्य नाम में अलग दिखते हैं, पर परीक्षा में उनकी श्रेणी सावधानी से पढ़नी चाहिए। नाम में “राष्ट्रीय उद्यान” दिखने से पहले आधिकारिक श्रेणी देखना जरूरी है, क्योंकि मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान अभयारण्य को सूची में अभयारण्य श्रेणी के तहत पढ़ाया जाता है।

सार यही है: पहले श्रेणी, फिर जिला, फिर प्रमुख जीव या पारिस्थितिकी याद करें।

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