मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य में राज्यपाल का पद देता है; राजस्थान में वास्तविक संसदीय कार्यपालिका मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के माध्यम से चलती है।
  • अनुच्छेद 163 राज्यपाल को मुख्यमंत्री-प्रधान मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से जोड़ता है; संवैधानिक विवेक इसका सीमित अपवाद है।
  • राजस्थान विधान सभा एकसदनीय है, जयपुर में बैठती है और वर्तमान में 200 सदस्यों वाली प्रत्यक्ष निर्वाचित संस्था है।
  • अनुच्छेद 170 विधान सभा की रचना को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों और प्रत्यक्ष चुनाव से जोड़ता है।
  • राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ; जयपुर इसकी न्यायिक पीठ के रूप में महत्वपूर्ण है।

मुख्य बिंदु

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    अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य में राज्यपाल का पद देता है; राजस्थान में वास्तविक संसदीय कार्यपालिका मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के माध्यम से चलती है।

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    अनुच्छेद 163 राज्यपाल को मुख्यमंत्री-प्रधान मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से जोड़ता है; संवैधानिक विवेक इसका सीमित अपवाद है।

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    राजस्थान विधान सभा एकसदनीय है, जयपुर में बैठती है और वर्तमान में 200 सदस्यों वाली प्रत्यक्ष निर्वाचित संस्था है।

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    अनुच्छेद 170 विधान सभा की रचना को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों और प्रत्यक्ष चुनाव से जोड़ता है।

  5. 5

    राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ; जयपुर इसकी न्यायिक पीठ के रूप में महत्वपूर्ण है।

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    संविधान (73वां संशोधन) अधिनियम, 1992 और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का मुख्य आधार हैं।

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    पेसा अधिनियम, 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को आदिवासी स्वशासन की केंद्रीय इकाई बनाता है।

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    राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान सूचना आयोग के आधार और काम अलग-अलग हैं।

राजस्थान की राज्य कार्यपालिका का संवैधानिक ढांचा क्या है?

राजस्थान की राज्य कार्यपालिका का संवैधानिक ढांचा राज्यपाल को औपचारिक संवैधानिक प्रमुख और मुख्यमंत्री-मंत्रिपरिषद को विधान सभा के प्रति उत्तरदायी वास्तविक कार्यपालिका बनाकर चलता है। राजस्थान विधानसभा सचिवालय के आरटीआई मैनुअल 2022 के अनुसार वर्तमान विधान सभा की सदस्य संख्या 200 है।

राजस्थान की राज्य कार्यपालिका में राज्यपाल औपचारिक संवैधानिक प्रमुख है, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद उत्तरदायी कार्यपालिका हैं। अनुच्छेद 153 राज्यपाल का पद बनाता है और अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित बताता है। लेकिन संसदीय शासन में दैनिक प्रशासन मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के माध्यम से चलता है, जो विधान सभा के प्रति उत्तरदायी रहती है।

अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर होती है। अनुच्छेद 164(1क) राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या को विधान सभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है और न्यूनतम संख्या 12 रखता है। राजस्थान की 200 सदस्यीय विधान सभा के आधार पर यह अधिकतम संख्या 30 बनती है।

याद रखें: राज्यपाल पद का औपचारिक केंद्र है, लेकिन नीति और प्रशासन की राजनीतिक जवाबदेही मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद पर रहती है। इसलिए परीक्षा में राज्यपाल को “संवैधानिक मुखिया” और मंत्रिपरिषद को “उत्तरदायी शासन चलाने वाली संस्था” के रूप में अलग-अलग पहचानना चाहिए।

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