वन प्रशासन और अग्नि एवं वन्यजीव सुरक्षा
मुख्य तथ्य
- भारतीय वन अधिनियम, 1927 वन अपराध, वन उपज, आरक्षित वन और जब्ती जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं के लिए मुख्य केंद्रीय कानून है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीव, अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और शिकार-निषेध की प्रमुख कानूनी नींव देता है।
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने पर केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति को मुख्य शर्त बनाता है।
मुख्य बिंदु
- 1
भारतीय वन अधिनियम, 1927 वन अपराध, वन उपज, आरक्षित वन और जब्ती जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं के लिए मुख्य केंद्रीय कानून है।
- 2
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीव, अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और शिकार-निषेध की प्रमुख कानूनी नींव देता है।
- 3
वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने पर केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति को मुख्य शर्त बनाता है।
- 4
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राष्ट्रीय वन, वन्यजीव, जैव-विविधता और जलवायु नीति से जुड़ा केंद्रीय मंत्रालय है।
- 5
देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण भारत वन स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित करता है और वन आवरण आकलन में दूरसंवेदी तकनीक का उपयोग करता है।
- 6
वन प्रशासन की मैदानी इकाई बीट से शुरू होकर रेंज, डिवीजन और सर्किल तक जाती है; वनरक्षक बीट और वनपाल प्रायः ब्लॉक स्तर से जुड़े होते हैं।
- 7
वनाग्नि नियंत्रण में फायरलाइन, गश्त, शीघ्र सूचना, स्थानीय सहयोग और नियंत्रित ईंधन प्रबंधन सबसे उपयोगी निवारक उपाय हैं।
- 8
अवैध शिकार और अवैध कटाई में मौके का पंचनामा, जब्ती, सुरक्षित मालखाना, रिपोर्ट और सक्षम अधिकारी को समय पर सूचना पूरी प्रक्रिया की रीढ़ हैं।
आगे पढ़ें
वन प्रशासन की मूल संरचना क्या है?
वन प्रशासन की मूल संरचना केंद्र की नीति-निर्माण भूमिका, राज्य वन विभाग की मैदानी जिम्मेदारी और बीट से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक तक की आदेश-शृंखला पर टिकती है। वन प्रशासन का उद्देश्य केवल पेड़ों की रक्षा करना नहीं है; यह वन भूमि, वन उपज, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र, चराई, आग, अतिक्रमण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाता है। भारत में वन विषय संविधान की समवर्ती सूची में है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका है। केंद्र स्तर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नीति, केंद्रीय कानून और राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ा है, जबकि राज्य वन विभाग मैदानी प्रबंधन, अपराध नियंत्रण, रोपण, संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा का दैनिक काम करता है। पीआईबी के माध्यम से जारी भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार 2021 की तुलना में वन और वृक्ष आवरण की बढ़ोतरी में राजस्थान 394 वर्ग किमी की वृद्धि के साथ देश के प्रमुख चार राज्यों में शामिल था।
राज्य वन विभाग में सामान्य प्रशासनिक शृंखला प्रधान मुख्य वन संरक्षक से शुरू मानी जाती है। उसके नीचे अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, उप वन संरक्षक या मंडल वन अधिकारी, सहायक वन संरक्षक, क्षेत्रीय वन अधिकारी, वनपाल और वनरक्षक जैसे पद आते हैं। नामों और जिम्मेदारियों में राज्य के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, पर परीक्षा में मूल क्रम और मैदानी जिम्मेदारी अधिक महत्वपूर्ण है। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में मरुस्थलीय, अरावली, नदीय और संरक्षित क्षेत्रों की अलग-अलग जरूरतें प्रशासन को क्षेत्र-विशेष बनाती हैं।
याद रखने योग्य बात: नीति और नियंत्रण ऊपर से आते हैं, लेकिन वास्तविक संरक्षण की पहली रेखा बीट, गश्त और स्थानीय सूचना तंत्र से बनती है।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
7 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलें