अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी — ISRO मिशन, उपग्रह और प्रक्षेपण यान
मुख्य तथ्य
- ISRO के परिचालन प्रक्षेपण यान PSLV, GSLV और एलवीएम3 हैं; एसएसएलवी छोटे उपग्रहों की मांग के लिए है।
- चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर सुरक्षित अवतरण और रोवर क्षमता दिखाई; आदित्य-एल1 एल1 क्षेत्र से सूर्य का अध्ययन करता है।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ISRO, इन-स्पेस, एनएसआईएल और अंतरिक्ष विभाग की भूमिकाएं अलग करती है।
मुख्य बिंदु
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अंतरिक्ष प्रश्नों में केवल मिशन-नाम नहीं, मिशन, कक्षा, पेलोड और उपयोग को साथ जांचा जाता है।
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ISRO के परिचालन प्रक्षेपण यान PSLV, GSLV और एलवीएम3 हैं; एसएसएलवी छोटे उपग्रहों की मांग के लिए है।
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संचार, पृथ्वी अवलोकन, नौवहन, मौसम और विज्ञान उपग्रहों में पेलोड और उनका काम अलग-अलग होता है।
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चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर सुरक्षित अवतरण और रोवर क्षमता दिखाई; आदित्य-एल1 एल1 क्षेत्र से सूर्य का अध्ययन करता है।
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नाविक क्षेत्रीय स्थिति, नौवहन और समय सेवा देता है; गगन विमानन के लिए उपग्रह नौवहन को बेहतर करता है।
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भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ISRO, इन-स्पेस, एनएसआईएल और अंतरिक्ष विभाग की भूमिकाएं अलग करती है।
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भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदार FDI अनुमति है, पर गतिविधि-विशेष अनुमति और सुरक्षा चिंताएं बनी रहती हैं।
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दूरसंवेदी शासन में मदद करता है, पर असर स्थलीय सत्यापन, आंकड़ा नीति और विभागीय क्षमता पर निर्भर है।
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UPSC के लिहाज़ से: सार्वजनिक तकनीक के रूप में अंतरिक्ष
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को केवल प्रसिद्ध मिशनों की सूची मानकर पढ़ना UPSC में पर्याप्त नहीं होता। असली समझ यह है कि कक्षा में गया उपग्रह जमीन पर कौन-सी सेवा देता है, कौन-सी सूचना बनाता है और नीति में कैसे काम आता है।
- मूल अर्थ: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में उपग्रह, प्रक्षेपण यान, पेलोड, स्थलीय स्टेशन, अनुगमन नेटवर्क, सूचना-उत्पाद और वे संस्थाएं आती हैं जो अंतरिक्ष से मिली सूचना को सार्वजनिक सेवाओं में बदलती हैं।
- संस्थागत ढांचा: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अंतरिक्ष विभाग, ISRO, एनएसआईएल और इन-स्पेस की अलग-अलग भूमिका है। सुधारों के बाद ISRO शोध और नई तकनीक पर, एनएसआईएल व्यावसायिक उपयोग पर और इन-स्पेस निजी भागीदारी की अनुमति तथा प्रोत्साहन पर केंद्रित है।
- परीक्षा की सीमा: प्रीलिम्स के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है — मिशन, कक्षा, पेलोड और उपयोग को साथ पढ़ना। चंद्र मिशन, नौवहन उपग्रह और संचार उपग्रह सभी अंतरिक्ष से जुड़े हैं, पर पूछे जाने वाले तथ्य अलग होते हैं।
- अहम उपग्रह परिवार: संचार उपग्रह दूरसंचार, टीवी, रणनीतिक संचार, मौसम चेतावनी और खोज-बचाव में काम आते हैं। दूरसंवेदी उपग्रह भूमि, जल, समुद्र, वातावरण, मानचित्रण, कृषि और आपदा प्रबंधन में उपयोगी हैं। नौवहन उपग्रह स्थिति, रास्ता बताने और सटीक समय देने से जुड़े हैं।
- प्रक्षेपण यान की समझ: ISRO के सक्रिय परिचालन प्रक्षेपण यानों में PSLV, GSLV और एलवीएम3 प्रमुख हैं; एसएसएलवी छोटे उपग्रहों और मांग-आधारित प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया है। गलती नाम याद रखने में नहीं, नाम को गलत कक्षा या पेलोड से जोड़ने में होती है।
- नीति में बदलाव: भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने भूमिकाएं साफ की हैं। ISRO नई तकनीक और अनुप्रयोग विकसित करता है, एनएसआईएल सार्वजनिक निवेश से बनी तकनीकों को बाजार तक ले जाता है, और इन-स्पेस निजी संस्थाओं को अनुमति व प्रोत्साहन देने वाले निकाय की तरह काम करता है।
- कानूनी पहलू: भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष संधियों से जुड़ा है, लेकिन घरेलू स्तर पर पूर्ण अंतरिक्ष गतिविधि कानून अभी नीति और अनुमति-आधारित ढांचे की जगह नहीं ले पाया है। इस अंतर को विकल्पों में अक्सर उलझाया जाता है।
- हालिया उदाहरण: चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, एक्सपोसैट, गगनयान परीक्षण, स्पेडेक्स, एनवीएस-श्रृंखला और निसार बताते हैं कि भारत केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक क्षमता बना रहा है।
- सामान्य गलती: उपग्रह और प्रक्षेपण यान को एक न मानें। उपग्रह वह अंतरिक्ष यान या पेलोड है जिसे कक्षा में रखा जाता है; प्रक्षेपण यान वह रॉकेट प्रणाली है जो उसे तय कक्षा या पथ तक पहुंचाती है।
- ऐतिहासिक निरंतरता: कार्यक्रम साउंडिंग रॉकेट और प्रायोगिक प्रक्षेपण यानों से परिचालन सेवाओं, राष्ट्रीय अनुप्रयोगों और गहरे अंतरिक्ष विज्ञान तक पहुंचा है। यह क्रम इसलिए अहम है क्योंकि UPSC पूछ सकता है कि कोई मिशन प्रायोगिक था, परिचालन था, व्यावसायिक था या वैज्ञानिक था।
- संवैधानिक संबंध: संविधान में अंतरिक्ष अलग विषय के रूप में नहीं लिखा है, पर राष्ट्रीय रक्षा, विदेश मामले, संचार, वैज्ञानिक संस्थाएं और संधि-दायित्व केंद्र की जिम्मेदारी से जुड़े हैं। इसलिए इसे राज्य-स्तर की सेवा नहीं, संघ-स्तर की रणनीतिक तकनीक मानकर पढ़ें।
- विकास का उद्देश्य: भारत के मॉडल में अंतरिक्ष हमेशा राष्ट्रीय विकास से जुड़ा रहा है — दूरस्थ क्षेत्रों का संचार, संसाधन मानचित्रण, मौसम चेतावनी, शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रतिक्रिया और रणनीतिक स्वायत्तता। इसलिए ISRO को केवल प्रतिष्ठा-आधारित कहानी की तरह पढ़ना अधूरा है।
- क्षमता की सीढ़ी: परिपक्व अंतरिक्ष कार्यक्रम को उपग्रह बनाना, पेलोड तैयार करना, उन्हें प्रक्षेपित करना, संचालित करना, आंकड़े संसाधित करना, उपयोगकर्ताओं को सेवा देना और भागीदारों को विनियमित करना आना चाहिए। किसी भी सीढ़ी की कमी निर्भरता बढ़ाती है।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. आदित्य-एल1 सूर्य-पृथ्वी एल1 क्षेत्र के चारों ओर हेलो कक्षा में रखा गया है। 2. इस क्षेत्र का लाभ यह है कि पृथ्वी की नियमित आड़ के बिना सूर्य को लगातार देखा जा सकता है। 3. आदित्य-एल1 चंद्र ध्रुवीय परिक्रमा यान है। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-से सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि आदित्य-एल1 सौर वेधशाला मिशन है, चंद्र परिक्रमा यान नहीं।
~50 शब्द · 1 अंक
