भौतिकी की अवधारणाएं और रोजमर्रा के उपयोग
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 51A(h), विधिक मापविज्ञान अधिनियम, भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम और विद्युत अधिनियम वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मापन, मानक और सुरक्षा को जोड़ते हैं।
- 2019 एसआई संशोधन ने मात्रकों को प्राकृतिक नियतांकों से जोड़ा; किलोग्राम अब भौतिक नमूने से परिभाषित नहीं है।
- शोर, विकिरण, बिजली-दोष और औद्योगिक दबाव-प्रणालियां भौतिकी को अनुच्छेद 21 से जुड़े स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों से जोड़ती हैं।
- हालिया संदर्भों में चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, स्पैडेक्स, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और लाइगो-इंडिया शामिल हैं।
मुख्य बिंदु
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UPSC में भौतिकी का मतलब सिद्धांत और उपयोग साथ-साथ है: बल, ऊष्मा, प्रकाश, ध्वनि, बिजली, विकिरण और अंतरिक्ष तकनीक।
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अनुच्छेद 51A(h), विधिक मापविज्ञान अधिनियम, भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम और विद्युत अधिनियम वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मापन, मानक और सुरक्षा को जोड़ते हैं।
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2019 एसआई संशोधन ने मात्रकों को प्राकृतिक नियतांकों से जोड़ा; किलोग्राम अब भौतिक नमूने से परिभाषित नहीं है।
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शोर, विकिरण, बिजली-दोष और औद्योगिक दबाव-प्रणालियां भौतिकी को अनुच्छेद 21 से जुड़े स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों से जोड़ती हैं।
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ट्रांसफॉर्मर को बदलता चुंबकीय फ्लक्स चाहिए; उच्च-वोल्टेज पर पारेषण धारा घटाता है और धारा के वर्ग के अनुपात वाली प्रतिरोधी हानि कम करता है।
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क्वांटम, अर्धचालक और परमाणु भौतिकी उपकरणों, मिशनों, सेंसर, रिएक्टर और हालिया सरकारी कार्यक्रमों से पूछी जाती है।
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स्कूली स्तर के हर नियम की शर्तें होती हैं; UPSC अक्सर परिभाषा से अधिक सीमा पर प्रश्न बनाता है।
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हालिया संदर्भों में चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, स्पैडेक्स, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और लाइगो-इंडिया शामिल हैं।
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दायरा, मापन और कानूनी आधार
- भौतिकी पदार्थ, ऊर्जा, गति, बल, क्षेत्र, तरंग और इनके मापे जा सकने वाले संबंधों का अध्ययन है। UPSC सामान्य विज्ञान में इससे लंबी गणना कम और रोजमर्रा की चीजों की समझ ज्यादा पूछी जाती है।
- रोजमर्रा का दायरा बहुत बड़ा है: प्रेशर कुकर, लिफ्ट, सीट बेल्ट, साइकिल का ब्रेक, चश्मा, बिजली मीटर, मोबाइल नेटवर्क, इंडक्शन चूल्हा, सौर सेल, मेडिकल अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, विकिरण चेतावनी, उपग्रह की कक्षा और तड़ित चालक, सबके पीछे वही बुनियादी नियम हैं।
- मापन शुरुआत का बिंदु है। NCERT के अनुसार मापन किसी स्वीकृत इकाई से तुलना है; साझा मात्रक न हों तो व्यापार, इलाज, मौसम चेतावनी, इंजीनियरिंग सुरक्षा और शोध-आंकड़े भरोसेमंद नहीं बनते।
- 20 मई 2019 से लागू एसआई संशोधन ने सभी एसआई मात्रकों को प्रकृति के स्थिर नियतांकों से जोड़ा। परीक्षा में खास बात यह है कि किलोग्राम अब किसी धातु के नमूने से परिभाषित नहीं है; एम्पियर, केल्विन और मोल की परिभाषाएं भी नियतांक-आधारित हैं।
- भारत में कानूनी आधार अनुच्छेद 51A(h) से शुरू होता है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासा तथा सुधार की भावना विकसित करने का मूल कर्तव्य बताता है। अनुच्छेद 21 तब जुड़ता है जब ध्वनि, विकिरण, औद्योगिक गैस, बिजली या कार्यस्थल की भौतिक स्थितियां जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
- सातवीं अनुसूची में कई संबंधित प्रविष्टियां हैं: संघ सूची प्रविष्टि 6 परमाणु ऊर्जा और उससे जुड़े खनिज संसाधनों पर है; प्रविष्टि 31 डाक, तार, दूरभाष, वायरलेस और प्रसारण पर; प्रविष्टि 65 तकनीकी प्रशिक्षण संस्थाओं पर; प्रविष्टि 66 उच्च शिक्षा और शोध के मानकों के समन्वय पर।
- विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 बाट-माप के मानक लागू करता है और वजन, माप या संख्या के आधार पर होने वाले व्यापार को नियंत्रित करता है। इसी कारण पेट्रोल पंप, तराजू, पैक की मात्रा और मापने वाले यंत्र निजी अनुमान पर नहीं छोड़े जा सकते।
- भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 भारतीय मानक ब्यूरो को वस्तुओं, प्रक्रियाओं, प्रणालियों और सेवाओं के मानकीकरण तथा गुणवत्ता आश्वासन के लिए राष्ट्रीय मानक निकाय बनाता है। हेलमेट, तार, घरेलू उपकरण, दबाव-पात्र, एलईडी और माप-यंत्रों में भौतिकी सीधे सुरक्षा-मानक बन जाती है।
- विद्युत अधिनियम, 2003 बिजली के उत्पादन, पारेषण, वितरण, व्यापार और उपयोग को एक ढांचे में लाता है; शक्ति, ऊर्जा, वोल्टेज, धारा, ट्रांसफॉर्मर हानि और मीटरिंग इसलिए केवल किताब के शब्द नहीं रहते।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 ध्वनि-तीव्रता, डेसिबल और क्षेत्र-वर्गीकरण को लागू मानक बनाते हैं। परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 परमाणु ऊर्जा, रेडियोधर्मी पदार्थ और विकिरण-संबंधी संस्थाओं पर संघ का नियंत्रण तय करता है।
- संविधान या कानून न्यूटन के नियम नहीं बदलते; वे यह तय करते हैं कि मानक कौन बनाएगा, सुरक्षा कौन लागू करेगा, नुकसान पर जवाबदेही किसकी होगी और भौतिक प्रक्रिया जब सार्वजनिक जोखिम बने तो कौन-सी संस्था कार्रवाई करेगी।
- वैज्ञानिक पद्धति भी इसी विषय का हिस्सा है। परिकल्पना जांची जा सकने वाली होनी चाहिए, अवलोकन दोहराए जा सकें, यंत्रों का अंशांकन हो और अनिश्चितता ईमानदारी से बताई जाए। इसी कारण चिकित्सा-यंत्र, गति-निगरानी यंत्र, प्रदूषण मीटर या विकिरण डोजिमीटर में ट्रेस हो सकने वाला मापन चाहिए, केवल कंपनी का दावा नहीं।
- आंकड़ों की समझ भी जरूरी है: सटीकता सही मान के पास होना है, परिशुद्धता बार-बार एक जैसे परिणाम देना है, संवेदनशीलता छोटे बदलाव को पकड़ने की क्षमता है और अंशांकन यंत्र को भरोसेमंद मानक से जोड़ता है। UPSC इन्हें स्वास्थ्य, पर्यावरण और उपभोक्ता संदर्भ में कथन-प्रश्न बना सकता है।
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. किलोग्राम अब प्लैंक नियतांक के निश्चित संख्यात्मक मान से परिभाषित है। 2. 2019 एसआई संशोधन ने सभी व्युत्पन्न मात्रकों का उपयोग समाप्त कर दिया। 3. विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 वजन, माप या संख्या के आधार पर व्यापार से संबंधित है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 और 3 सही हैं। एसआई संशोधन ने व्युत्पन्न मात्रक समाप्त नहीं किए; उसने आधार मात्रकों को नियतांकों से परिभाषित किया।
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