परमाणु प्रौद्योगिकी, रिएक्टर और उनके उपयोग
मुख्य तथ्य
- संघ सूची की प्रविष्टि 6 परमाणु ऊर्जा और उससे जुड़े खनिज संसाधनों को संसद के खास विधायी क्षेत्र में रखती है।
- विखंडनीय पदार्थ विखंडन चला सकता है; थोरियम-232 जैसा जनक पदार्थ पहले विखंडनीय ईंधन में बदलना पड़ता है।
- भारत का 3-चरण कार्यक्रम भारी जल रिएक्टर, तीव्र प्रजनक रिएक्टर और थोरियम-यूरेनियम-233 चक्र को जोड़ता है।
- परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड 1983 में बना; यह सुरक्षा नियमन करता है, पर संवैधानिक निकाय नहीं है।
- शांति अधिनियम, 2025 सख्त, बिना गलती सिद्ध किए परमाणु दायित्व का ढांचा और श्रेणीबद्ध संचालक दायित्व रखता है।
मुख्य बिंदु
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संघ सूची की प्रविष्टि 6 परमाणु ऊर्जा और उससे जुड़े खनिज संसाधनों को संसद के खास विधायी क्षेत्र में रखती है।
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विखंडनीय पदार्थ विखंडन चला सकता है; थोरियम-232 जैसा जनक पदार्थ पहले विखंडनीय ईंधन में बदलना पड़ता है।
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भारत का 3-चरण कार्यक्रम भारी जल रिएक्टर, तीव्र प्रजनक रिएक्टर और थोरियम-यूरेनियम-233 चक्र को जोड़ता है।
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परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड 1983 में बना; यह सुरक्षा नियमन करता है, पर संवैधानिक निकाय नहीं है।
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शांति अधिनियम, 2025 सख्त, बिना गलती सिद्ध किए परमाणु दायित्व का ढांचा और श्रेणीबद्ध संचालक दायित्व रखता है।
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कलपक्कम के तीव्र प्रजनक रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को पहली क्रांतिकता हासिल की, जो दूसरे चरण का बड़ा पड़ाव है।
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खाद्य विकिरण खराबी और कीट घटाता है; इससे भोजन रेडियोधर्मी नहीं बनता।
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परमाणु खबरों में घोषित क्षमता-लक्ष्य और चालू रिएक्टर क्षमता को अलग रखें।
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अर्थ, संवैधानिक आधार और कानूनी ढांचा
परमाणु प्रौद्योगिकी का मतलब है परमाणु नाभिक की ऊर्जा, विकिरण और समस्थानिकों का नियंत्रित उपयोग। UPSC के लिए यह विषय केवल बिजली-घर नहीं, बल्कि बुनियादी विज्ञान, कानून, सुरक्षा और हालिया नीति का साझा क्षेत्र है।
- मूल अर्थ: परमाणु प्रक्रिया में बदलाव नाभिक के स्तर पर होता है, सिर्फ बाहरी इलेक्ट्रॉनों में नहीं। इसी वजह से बहुत थोड़े ईंधन से बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है।
- मुख्य प्रक्रियाएं:
- परमाणु विखंडन: यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 जैसा भारी नाभिक न्यूट्रॉन सोखकर टूटता है, ऊर्जा और नए न्यूट्रॉन छोड़ता है।
- परमाणु संलयन: हल्के नाभिक बहुत ऊंचे तापमान और दाब पर जुड़ते हैं। तारों में यही प्रक्रिया चलती है, पर इससे वाणिज्यिक बिजली अभी सामान्य रूप से नहीं बन रही।
- रेडियोधर्मी क्षय: अस्थिर नाभिक अल्फा, बीटा या गामा विकिरण छोड़कर अपेक्षाकृत स्थिर रूप में जाता है।
- भारत में संवैधानिक आधार:
- अनुच्छेद 246 विधायी शक्तियों को 7वीं अनुसूची की सूचियों में बांटता है।
- संघ सूची की प्रविष्टि 6 परमाणु ऊर्जा और उसके लिए जरूरी खनिज संसाधनों को केंद्र के दायरे में रखती है।
- परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा पर विवाद हो तो अनुच्छेद 21 जीवन और सुरक्षित पर्यावरण के अधिकार से जुड़ता है।
- अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) पर्यावरण संरक्षण की संवैधानिक दिशा देते हैं; अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और संधियों के संदर्भ में उपयोगी है।
- मुख्य कानून:
- शांति अधिनियम, 2025: परमाणु ऊर्जा में विकास, अनुमति, सुरक्षा नियमन और नागरिक दायित्व का मौजूदा केंद्रीय कानून।
- परमाणु ऊर्जा (विकिरण संरक्षण) नियम, 2004 और अन्य बचाए गए नियम: नए कानून से टकराव न हो तो विकिरण-सुरक्षा, सुरक्षित निपटान और अनुमति की प्रक्रियाएं जारी रहती हैं।
- निरसन-बचत नियम: परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 निरस्त हैं, पर पहले की वैध कार्रवाइयां और नियम शांति अधिनियम के तहत जारी माने जाते हैं।
- सामूहिक विनाश के हथियार और उनकी वितरण प्रणाली अधिनियम, 2005: अप्रसार और निर्यात-नियंत्रण का ढांचा।
- परीक्षा में अहम फर्क: परमाणु प्रौद्योगिकी को सिर्फ बिजली उत्पादन समझना गलत है; समस्थानिक, खाद्य विकिरण, कचरा, नियमन और भारत का 3-चरण कार्यक्रम भी इसी अध्याय में आते हैं।
- इस नोट का दायरा शांतिपूर्ण उपयोग, चिकित्सा, कृषि और उद्योग तक है; हथियार और मिसाइल वितरण प्रणाली मुख्यतः रक्षा प्रौद्योगिकी तथा अंतरराष्ट्रीय संबंध में पढ़े जाते हैं।
- कानूनी ढांचा पढ़ने का तरीका: हर परमाणु तथ्य को सिर्फ विज्ञान न मानें। सवाल में संसद, अनुमति, दायित्व या निगरानी आए तो तुरंत कानूनी ढांचे पर जाएं।
- केंद्र का नियंत्रण इतना मजबूत क्यों है: परमाणु खनिज, रिएक्टर तकनीक, सुरक्षा-संवेदनशील जानकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित होती हैं; राज्य-स्तर की चिंताएं भूमि, लोक व्यवस्था, स्वास्थ्य, जल और स्थानीय पर्यावरण में आती हैं।
- शांतिपूर्ण उपयोग की भाषा: विज्ञान के सवालों में परमाणु का अर्थ अक्सर ऊर्जा, समस्थानिक या विकिरण उपयोग होता है; इसे सीधे हथियारों से न जोड़ें।
- संस्था और नीति संदर्भ: भारत का कार्यक्रम साधारण बिजली विभागों से नहीं, बल्कि परमाणु ऊर्जा आयोग, परमाणु ऊर्जा विभाग और विशेष शोध केंद्रों से विकसित हुआ।
- आंकड़ा सावधानी: रिएक्टर संख्या और क्षमता धीरे बदलती हैं, पर स्थिर नहीं रहतीं। समसामयिकी में ताजा आधिकारिक संख्या लें और पुराने आंकड़े तभी लिखें जब वे दिनांकित स्रोत से बंधे हों।
- अनुच्छेद 21 संबंध: कोई संयंत्र राष्ट्रीय महत्व का हो सकता है, फिर भी भरोसेमंद सुरक्षा प्रक्रिया जरूरी रहती है; अदालतें विकास को पूरा उत्तर नहीं मानतीं, बल्कि विशेषज्ञ आकलन को जीवन और पर्यावरण चिंताओं के साथ संतुलित करती हैं।
- परमाणु खनिज संकेत: यूरेनियम, थोरियम और संबंधित तटीय रेत खनिज इस अध्याय में साधारण खनन तथ्य नहीं हैं; ये भूविज्ञान, रणनीतिक नियंत्रण, रिएक्टर ईंधन और निर्यात-नियंत्रण को जोड़ते हैं।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQपरमाणु पदार्थों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. यूरेनियम-235 विखंडनीय है। 2. थोरियम-232 जनक है। 3. कोई रेडियोधर्मी समस्थानिक जरूरी तौर पर रिएक्टर ईंधन के लिए उपयुक्त होता है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
यूरेनियम-235 विखंडनीय है और थोरियम-232 जनक है। केवल रेडियोधर्मिता किसी पदार्थ को रिएक्टर विखंडन के लिए उपयुक्त नहीं बनाती।
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