समसामयिकी में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: खोजें, मिशन और पुरस्कार
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 51A का खंड एच वैज्ञानिक दृष्टिकोण को संवैधानिक महत्व देता है; यह मूल कर्तव्य है, लागू कराया जाने वाला मूल अधिकार नहीं।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 में नीति, क्रियान्वयन, अनुमति और वाणिज्यिक भूमिकाएं अंतरिक्ष विभाग, ISRO, इन-स्पेस और एनएसआईएल में अलग-अलग रखी गई हैं।
- राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन अधिनियम, 2023 शोध और नवाचार को रणनीतिक दिशा देने के लिए 5 फरवरी 2024 से लागू हुआ।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन 2023 में 2023-24 से 2030-31 के लिए ₹6,003.65 करोड़ खर्च के साथ मंजूर हुआ।
- अर्धचालक मिशन, बायोई3, विज्ञान धारा और डेटा संरक्षण अधिनियम विज्ञान खबरों को शासन प्रश्नों में बदलते हैं।
मुख्य बिंदु
- 1
अनुच्छेद 51A का खंड एच वैज्ञानिक दृष्टिकोण को संवैधानिक महत्व देता है; यह मूल कर्तव्य है, लागू कराया जाने वाला मूल अधिकार नहीं।
- 2
हर खबर को संस्था, कानून/नीति, मूल विज्ञान, उपयोग, सीमाएं और जुड़े हुए विषयों से मिलाकर पढ़ें।
- 3
भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 में नीति, क्रियान्वयन, अनुमति और वाणिज्यिक भूमिकाएं अंतरिक्ष विभाग, ISRO, इन-स्पेस और एनएसआईएल में अलग-अलग रखी गई हैं।
- 4
राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन अधिनियम, 2023 शोध और नवाचार को रणनीतिक दिशा देने के लिए 5 फरवरी 2024 से लागू हुआ।
- 5
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन 2023 में 2023-24 से 2030-31 के लिए ₹6,003.65 करोड़ खर्च के साथ मंजूर हुआ।
- 6
अर्धचालक मिशन, बायोई3, विज्ञान धारा और डेटा संरक्षण अधिनियम विज्ञान खबरों को शासन प्रश्नों में बदलते हैं।
- 7
पुरस्कार विजेता का नाम ही नहीं, पुरस्कार किस अवधारणा के लिए मिला है, यह पढ़ना जरूरी है।
- 8
सबसे कठिन गलतियां तब होती हैं जब अभ्यर्थी प्रदर्शन, मंजूरी, तैनाती, नियमन और सामाजिक असर को अलग नहीं कर पाता।
आगे पढ़ें
विज्ञान-प्रौद्योगिकी की समसामयिकी क्या मानें
विज्ञान-प्रौद्योगिकी की समसामयिकी अखबार की पंक्तियां याद करने का अभ्यास नहीं है। UPSC आम तौर पर यह देखता है कि अभ्यर्थी किसी खोज, मिशन, पुरस्कार या नीति का उसके विज्ञान, संस्था और सार्वजनिक असर से संबंध समझ पा रहा है या नहीं।
- परिभाषा: इस विषय में विज्ञान-प्रौद्योगिकी की समसामयिकी का अर्थ है वैज्ञानिक शोध, अंतरिक्ष मिशन, रक्षा प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल प्रणालियों, पदार्थ विज्ञान, पुरस्कारों और नियामक नीतियों में ऐसी हालिया प्रगति जिसे वस्तुनिष्ठ कथनों में बदला जा सके।
- तीन-स्तरीय अध्ययन: पहले तथ्य पहचानें: क्या हुआ, किसने किया, कब और कहां। फिर विज्ञान पहचानें: कक्षा, पेलोड, जीनोम, क्वांटम अवस्था, चिप नोड, टीका तकनीक, रेडियोसमस्थानिक, एल्गोरिदम या सामग्री। अंत में शासन संबंध देखें: कौन-सा मंत्रालय, कानून, मिशन, नियामक, नैतिक सीमा या अंतरराष्ट्रीय संस्था जुड़ी है।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 51A का खंड एच वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जांच तथा सुधार की भावना विकसित करने को मूल कर्तव्य बनाता है। यह मूल अधिकार की तरह अदालत से लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन वैज्ञानिक समझ को संवैधानिक महत्व देता है।
- संघीय और संघ-सूची संबंध: सातवीं अनुसूची संघ को बड़े साधन देती है: संघ सूची की प्रविष्टि 31 वायरलेस और प्रसारण से जुड़ी है; प्रविष्टि 64 संघ से पोषित वैज्ञानिक या तकनीकी शिक्षा संस्थानों से; प्रविष्टि 65 तकनीकी प्रशिक्षण और शोध की संघीय एजेंसियों से; प्रविष्टि 66 उच्च शिक्षा में समन्वय और मानक से; प्रविष्टि 68 भारतीय सर्वेक्षण विभाग और राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगठनों जैसे भूवैज्ञानिक, वनस्पति, प्राणी और मौसम सर्वे से।
- UPSC का पैटर्न: प्रश्न आम तौर पर किसी मिशन की हर छोटी बात नहीं पूछते। वे अंतर पकड़ते हैं: प्रक्षेपण यान बनाम उपग्रह, पेलोड बनाम प्लेटफ़ॉर्म, खोज बनाम उपयोग, पुरस्कार का क्षेत्र बनाम विजेता, नीति बनाम अधिनियम, और मिशन उद्देश्य बनाम बाद की उपलब्धि।
- अध्ययन का पक्का तरीका: हर खबर को दो कॉलम में लिखें: “इसके पीछे का आधारभूत विज्ञान” और “इससे जुड़ा ताजा तथ्य”। चंद्रमा पर उतरने की खबर को गुरुत्व, प्रणोदन, स्पेक्ट्रोस्कोपी और ध्रुवीय क्षेत्र से जोड़ें; नोबेल को पुरस्कृत अवधारणा से; और डेटा कानून को निजता, साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल शासन से।
- सीमा: भविष्य के मिशनों की घोषणाओं या घोषित न हुए पुरस्कारों पर अनुमान न लगाएं। कोई घटना तय है लेकिन पूरी नहीं हुई है तो उसे नियोजित लिखें, हासिल की गई उपलब्धि नहीं।
- समय-सीमा को लेकर सावधानी: गतिशील विषय में घटना की स्थिति साफ रखें। 2026 के लिए तय प्रक्षेपण, सिद्धांत रूप में मंजूर मिशन और कक्षा में स्थापित अंतरिक्षयान तीन अलग तथ्य हैं।
- स्थिर अवधारणा और समसामयिकी की कड़ी: खबर में “ध्रुवणमापन” आए तो विद्युतचुंबकीय विकिरण और ध्रुवण दोहराएं; “प्रतिरक्षा सहिष्णुता” आए तो टी कोशिका और प्रतिपिंड देखें; “क्वांटम टनलिंग” आए तो तरंग-कण व्यवहार और प्रायिकता पढ़ें।
- स्रोतों की प्राथमिकता: आधिकारिक मिशन पृष्ठ, पीआईबी विज्ञप्ति, कानून, नियामक अधिसूचना और नोबेल या पुरस्कार पृष्ठ को पहले रखें। अखबारी व्याख्या समझने में मदद करती है, लेकिन सटीक तारीख, खर्च या कानूनी स्थिति के लिए अकेला आधार नहीं होनी चाहिए।
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
7 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQविज्ञान-प्रौद्योगिकी समसामयिकी पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 51A का खंड एच वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ा है। 2. संघ सूची की प्रविष्टि 68 राष्ट्रीय सर्वे और वैज्ञानिक संगठनों से जुड़ी है। 3. मंत्रिमंडल से मंजूर मिशन अपने-आप संवैधानिक निकाय बन जाता है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
कथन 1 और 2 सही हैं। मंत्रिमंडल से मंजूर मिशन तब तक संवैधानिक निकाय नहीं बनता जब तक संविधान उसे न बनाए।
~50 शब्द · 1 अंक
