जीवविज्ञान — मानव शरीर क्रिया-विज्ञान, अंग-तंत्र और पोषण
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 21 स्वास्थ्य-सम्बंधी गरिमा का आधार देता है; अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण और लोक स्वास्थ्य उठाने का निर्देश देता है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम, 2006 दिखाते हैं कि पोषण, शरीर-क्रिया, कल्याण और खाद्य-सुरक्षा नियमन आपस में ज...
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान 2024 मार्गदर्शन विविध भोजन, सुरक्षित भोजन, कम नमक-चीनी-वसा और शारीरिक गतिविधि पर ज़ोर देता ह...
मुख्य बिंदु
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आंतरिक संतुलन सभी तंत्रों को जोड़ता है: प्रतिक्रिया-नियंत्रण तापमान, शर्करा, अम्ल-क्षार, रक्तचाप और पानी-लवण संतुलन संभालता है।
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अनुच्छेद 21 स्वास्थ्य-सम्बंधी गरिमा का आधार देता है; अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण और लोक स्वास्थ्य उठाने का निर्देश देता है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम, 2006 दिखाते हैं कि पोषण, शरीर-क्रिया, कल्याण और खाद्य-सुरक्षा नियमन आपस में जुड़े हैं।
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अधिकतर पोषक छोटी आंत में अवशोषित होते हैं; बड़ी आंत मुख्यतः पानी और लवण सोखती है।
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मनुष्य में दोहरा रक्त-संचार फुफ्फुसीय और प्रणालीगत प्रवाह को अलग रखता है, जिससे ऊतकों तक ऑक्सीजन बेहतर पहुंचती है।
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गुर्दे के नेफ्रॉन निस्यंदन, चयनात्मक पुनःअवशोषण और स्राव से मूत्र बनाते हैं।
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इंसुलिन रक्त-शर्करा घटाता है; ग्लूकागॉन उसे बढ़ाता है; दोनों अग्न्याशय के हार्मोन हैं, पर असर उल्टा है।
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान 2024 मार्गदर्शन विविध भोजन, सुरक्षित भोजन, कम नमक-चीनी-वसा और शारीरिक गतिविधि पर ज़ोर देता है।
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दायरा, संवैधानिक आधार और परीक्षा की दृष्टि
- इस विषय में क्या पढ़ना है: मानव शरीर क्रिया-विज्ञान यह समझाता है कि पाचन और पोषण, रक्त-संचार, श्वसन, उत्सर्जन, तंत्रिका नियंत्रण, हार्मोन नियंत्रण, गति, प्रजनन और प्रतिरक्षा से जुड़े अंग-तंत्र मिलकर जीवन कैसे बनाए रखते हैं। UPSC आम तौर पर केवल नाम नहीं, प्रक्रिया पूछता है।
- स्थिर आंतरिक संतुलन मुख्य विचार है: शरीर का तापमान, रक्त-शर्करा, रक्तचाप, अम्ल-क्षार संतुलन, ऑक्सीजन-कार्बन डाइऑक्साइड संतुलन और पानी-लवण संतुलन संकरी सीमा में रखे जाते हैं। सामान्य नियंत्रण पद्धति नकारात्मक प्रतिक्रिया है: बदलाव पहचाना जाता है, नियंत्रण केंद्र जवाब देता है, और प्रभावक उस बदलाव को उलटता है।
- पोषण जीवविज्ञान को शासन से जोड़ता है: भोजन केवल ऊर्जा नहीं देता; वह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, पानी और रेशा देता है। कमी, अधिकता और असुरक्षित भोजन तीनों लोक स्वास्थ्य, काम करने की क्षमता और सीखने पर असर डालते हैं।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या में स्वास्थ्य-सम्बंधी गरिमा और समय पर इलाज शामिल हुआ है। अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण-स्तर, जीवन-स्तर और लोक स्वास्थ्य उठाने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 39(च) बच्चों के विकास से जुड़ा है और अनुच्छेद 42 न्यायसंगत कामकाजी दशाओं तथा मातृत्व राहत से।
- कानूनी आधार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 रियायती खाद्यान्न, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के पोषण-सहयोग, तथा स्कूल भोजन को वैधानिक आधार देता है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 ने सुरक्षित भोजन और विज्ञान-आधारित खाद्य मानकों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की स्थापना की।
- न्यायिक आधार: परमानंद कटारा, 1989 ने कहा कि तुरंत चिकित्सा सहायता औपचारिकताओं के इंतज़ार में नहीं रोकी जा सकती। उपभोक्ता शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र, 1995 ने श्रमिकों के स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता को अनुच्छेद 21 से जोड़ा। पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति, 1996 ने माना कि सरकारी अस्पतालों द्वारा समय पर आपात इलाज न देना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। 2001 से चले पीयूसीएल भोजन-अधिकार मामलों ने खाद्य योजनाओं को अंतरिम आदेशों के ज़रिए अधिक जवाबदेह बनाया।
- प्रीलिम्स में तरीका: हर अंग-तंत्र को तीन स्तरों पर पढ़ें: संरचना, प्रक्रिया और गड़बड़ी। जैसे गुर्दे की संरचना में नेफ्रॉन है; प्रक्रिया निस्यंदन, पुनःअवशोषण और स्राव है; गड़बड़ी में निर्जलीकरण, गुर्दे खराब होना या लवण असंतुलन आ सकता है।
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अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. पित्त यकृत में बनता है और पित्ताशय में जमा रहता है। 2. पित्त में वसा पचाने वाला मुख्य एंजाइम होता है। 3. पित्त छोटी आंत में वसा को छोटे कणों में बांटने में मदद करता है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
पित्त यकृत में बनता है, पित्ताशय में जमा रहता है और वसा को छोटे कणों में बांटता है। वह एंजाइम नहीं है और उसमें वसा-पाचक एंजाइम मुख्य पाचन घटक नहीं होता।
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