मुख्य तथ्य

  • भाग I अनुच्छेद 1-4 को समेटता है; भाग II अनुच्छेद 5-11 को और नागरिकता अधिनियम, 1955 से संबंध बताता है।
  • अनुच्छेद 3 में राष्ट्रपति की सिफारिश और राज्य विधानमंडल की राय चाहिए, राज्य की सहमति नहीं।
  • अनुच्छेद 4 बताता है कि अनुच्छेद 2-3 के कानून, पहली या चौथी अनुसूची बदलने पर भी अनुच्छेद 368 संशोधन नहीं हैं।
  • भारतीय क्षेत्र किसी दूसरे देश को देना आंतरिक पुनर्गठन से अलग है; बेरुबारी, 1960 में संविधान संशोधन जरूरी माना गया।
  • नागरिकता अधिनियम, 1955 जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण और क्षेत्र-समावेशन के रास्ते देता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    भाग I अनुच्छेद 1-4 को समेटता है; भाग II अनुच्छेद 5-11 को और नागरिकता अधिनियम, 1955 से संबंध बताता है।

  2. 2

    अनुच्छेद 3 में राष्ट्रपति की सिफारिश और राज्य विधानमंडल की राय चाहिए, राज्य की सहमति नहीं।

  3. 3

    अनुच्छेद 4 बताता है कि अनुच्छेद 2-3 के कानून, पहली या चौथी अनुसूची बदलने पर भी अनुच्छेद 368 संशोधन नहीं हैं।

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    भारतीय क्षेत्र किसी दूसरे देश को देना आंतरिक पुनर्गठन से अलग है; बेरुबारी, 1960 में संविधान संशोधन जरूरी माना गया।

  5. 5

    भारत एकल नागरिकता अपनाता है; राज्य अलग नागरिकता नहीं बनाते।

  6. 6

    नागरिकता अधिनियम, 1955 जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण और क्षेत्र-समावेशन के रास्ते देता है।

  7. 7

    धारा 8-10 के तहत नागरिकता त्याग, समाप्ति या वंचन से खत्म हो सकती है।

  8. 8

    2024 नियम, 2024 धारा 6A निर्णय और 2025 आव्रजन अधिनियम हाल की बहसों के बिंदु हैं।

क्षेत्र और नागरिकता की संवैधानिक रूपरेखा

  • दो जुड़े हुए हिस्से: भाग I बताता है कि भारत का संवैधानिक क्षेत्र क्या है; भाग II बताता है कि संविधान लागू होते समय कौन भारतीय नागरिक माना गया। उसके बाद नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता पाने, छोड़ने, खोने, प्रवासी भारतीय नागरिकता और असम से जुड़े विशेष प्रावधानों का मुख्य कानून बनता है।
  • अनुच्छेद 1 से शुरुआत होती है: भारत को राज्यों का संघ कहा गया है, संप्रभु इकाइयों के समझौते से बना संघ नहीं। भारत के क्षेत्र में राज्यों के क्षेत्र, पहली अनुसूची में दिए संघ राज्यक्षेत्र और आगे अर्जित किया जाने वाला कोई भी क्षेत्र शामिल है।
  • अनुच्छेद 2 बाहर से जुड़ने की स्थिति संभालता है: संसद कानून बनाकर नए राज्यों को संघ में प्रवेश दे सकती है या स्थापित कर सकती है। जब कोई राजनीतिक इकाई या अर्जित क्षेत्र भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में आता है, तब यह अनुच्छेद अहम हो जाता है।
  • अनुच्छेद 3 भीतर के पुनर्गठन की प्रक्रिया देता है: संसद नए राज्य बना सकती है, क्षेत्र बढ़ा या घटा सकती है, सीमाएं बदल सकती है या नाम बदल सकती है। विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश से ही आता है, और प्रभावित राज्य विधानमंडल से तय समय में राय मांगी जाती है।
  • अनुच्छेद 4 में परीक्षा का बड़ा फर्क छिपा है: अनुच्छेद 2 और 3 के कानून पहली और चौथी अनुसूची में बदलाव तथा पूरक, प्रासंगिक और परिणामी प्रावधान कर सकते हैं; ऐसे कानूनों को अनुच्छेद 368 वाला संविधान संशोधन नहीं माना जाता।
  • भाग II संक्रमणकालीन है, पर परीक्षा में अहम है: अनुच्छेद 5-11 ने संविधान लागू होने के समय नागरिकता तय की और संसद को आगे कानून बनाने की शक्ति दी। अनुच्छेद 11 ही नागरिकता अधिनियम, 1955 से जोड़ता है, इसलिए UPSC संवैधानिक और कानूनी दोनों रास्ते साथ पूछ सकता है।
  • भारत में नागरिकता एकल है: पारंपरिक संघीय व्यवस्थाओं की तरह अलग राज्य नागरिकता नहीं है। राज्य निवास के आधार पर कुछ लाभ या नियम बना सकते हैं, पर वे अलग नागरिकता नहीं बनाते और उन्हें मूल अधिकारों की सीमा माननी पड़ती है।
  • मौजूदा तथ्यात्मक स्थिति: जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लागू होने के बाद भारत में 28 राज्य और 8 संघ राज्यक्षेत्र हैं। इसे वर्तमान तथ्य की तरह पढ़ें, किसी स्थायी संवैधानिक संख्या की तरह नहीं।
  • प्रीलिम्स में पढ़ने का तरीका: अनुच्छेद 1 को अनुच्छेद 2-4, पहली अनुसूची, चौथी अनुसूची, अनुच्छेद 368 और अनुच्छेद 5-11 के साथ जोड़कर पढ़ें। अधिकांश गलतियां क्षेत्र देने, क्षेत्र लेने, आंतरिक पुनर्गठन और नागरिकता-स्थिति को मिलाने से होती हैं।
  • परीक्षा में स्रोतों का क्रम: पहले संविधान, फिर नागरिकता अधिनियम, 1955, और उसके बाद नियमों या पोर्टल को पढ़ना चाहिए। अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने की शक्ति देता है, लेकिन वह कानून फिर भी समता, विधिक प्रक्रिया और न्यायिक समीक्षा जैसी संवैधानिक सीमाओं में रहेगा।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQसंविधान के अनुच्छेद 3 के बारे में निम्न कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 3 के तहत विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश जरूरी है। 2. संसद द्वारा विधेयक पारित करने से पहले प्रभावित राज्य विधानमंडल की सहमति अनिवार्य है। 3. अनुच्छेद 3 के तहत कानून पहली और चौथी अनुसूची बदल सकता है और फिर भी उसे अनुच्छेद 368 संशोधन नहीं माना जाता। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

जहां लागू हो, राज्य की राय ली जाती है, पर सहमति अनिवार्य नहीं। अनुच्छेद 3 और 4 अनुसूची बदलाव को अनुच्छेद 368 संशोधन नहीं मानते।

~50 शब्द · 1 अंक