प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और महान्यायवादी
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 74 संघ कार्यपालिका में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह को केंद्रीय बनाता है।
- अनुच्छेद 75 मंत्रिपरिषद को केवल लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जिम्मेदार बनाता है।
- 91वां संशोधन संघ मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य-संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है।
- गैर-सदस्य मंत्री को 6 लगातार महीनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता लेनी होती है।
- अनुच्छेद 76 महान्यायवादी का पद बनाता है, जो संघ का सर्वोच्च विधि अधिकारी है।
मुख्य बिंदु
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अनुच्छेद 74 संघ कार्यपालिका में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह को केंद्रीय बनाता है।
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अनुच्छेद 75 मंत्रिपरिषद को केवल लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जिम्मेदार बनाता है।
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91वां संशोधन संघ मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य-संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है।
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गैर-सदस्य मंत्री को 6 लगातार महीनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता लेनी होती है।
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कैबिनेट निर्णायक केंद्र है; मंत्रिपरिषद व्यापक निकाय है।
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अनुच्छेद 76 महान्यायवादी का पद बनाता है, जो संघ का सर्वोच्च विधि अधिकारी है।
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अनुच्छेद 88 मंत्री और महान्यायवादी को बोलने का अधिकार देता है, हर जगह मतदान का नहीं।
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प्रस्तावित 130वां संशोधन विधेयक, 2025 हिरासत-आधारित हटाने से जुड़ा है, मौजूदा कानून नहीं।
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संवैधानिक ढांचा और परीक्षा में पूछने का तरीका
भारत में संघ की कार्यपालिका संसदीय ढांचे पर चलती है। राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, लेकिन वास्तविक राजनीतिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है, और यह जिम्मेदारी लोकसभा के प्रति होती है।
- मुख्य अनुच्छेद: अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति का पद बनाता है; अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करता है, लेकिन अनुच्छेद 74 कहता है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होगी।
- अनुच्छेद 74 की बारीकी: 42वें संशोधन, 1976 के बाद राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार काम करने के लिए बाध्य हैं; 44वें संशोधन, 1978 के बाद राष्ट्रपति सलाह पर एक बार पुनर्विचार करने को कह सकते हैं, पर दोबारा दी गई सलाह माननी पड़ती है।
- अनुच्छेद 75 समूह: प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं; बाकी मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर होती है; मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं; मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जिम्मेदार होती है।
- अनुच्छेद 76 से जुड़ाव: महान्यायवादी मंत्री नहीं होता। वह संघ का सर्वोच्च विधि अधिकारी है, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी योग्यता रखता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है।
- अनुच्छेद 77 और 78: अनुच्छेद 77 भारत सरकार के कामकाज को राष्ट्रपति के नाम से चलाने की व्यवस्था करता है; अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संवैधानिक कड़ी बनाता है।
- अनुच्छेद 88: मंत्री और महान्यायवादी किसी भी सदन तथा उसकी समितियों में बोल सकते हैं और भाग ले सकते हैं, पर जिस सदन के सदस्य नहीं हैं, वहां मतदान नहीं कर सकते।
- अनुसूचियां: तीसरी अनुसूची संघ मंत्रियों की पद और गोपनीयता की शपथ देती है; दूसरी अनुसूची तब तक मंत्रियों के वेतन से जुड़ती है जब तक संसद कानून से व्यवस्था न करे।
- प्रीलिम्स के लिए ध्यान दें: सवाल अक्सर नियुक्ति, प्रसादपर्यंत पद, सामूहिक जिम्मेदारी, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, सलाह, पुनर्विचार और मतदान-अधिकार के फर्क पर बनते हैं।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
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1MCQअनुच्छेद 75 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. मंत्रिपरिषद संसद के दोनों सदनों के प्रति सामूहिक रूप से जिम्मेदार है। 2. गैर-सदस्य मंत्री को 6 लगातार महीनों के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना होता है। 3. संघ मंत्रियों की कुल संख्या पर संविधान में सीमा है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 गलत है, क्योंकि सामूहिक जिम्मेदारी केवल लोकसभा के प्रति है। कथन 2 और 3 अनुच्छेद 75(5) और अनुच्छेद 75(1A) पर आधारित हैं।
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