मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 124-147 संघीय न्यायपालिका का मुख्य ढांचा हैं; अनुच्छेद 141 उच्चतम न्यायालय की घोषित विधि को सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है।
  • अनुच्छेद 32 मूल अधिकारों को लागू कराता है; अनुच्छेद 226 अधिक व्यापक है क्योंकि वह अन्य कानूनी अधिकारों को भी समेटता है।
  • अनुच्छेद 136 की विशेष अनुमति विवेकाधीन है; यह अधिकार के रूप में सामान्य अपील नहीं है।
  • राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को 2015 में इसलिए असंवैधानिक घोषित किया गया क्योंकि न्यायिक स्वतंत्रता आधारभूत ढांचे का हिस्सा मानी गई।
  • अनुच्छेद 142 लंबित मामलों में पूर्ण न्याय की शक्ति देता है, पर इससे न्यायालय विधायिका नहीं बन जाता।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    अनुच्छेद 124-147 संघीय न्यायपालिका का मुख्य ढांचा हैं; अनुच्छेद 141 उच्चतम न्यायालय की घोषित विधि को सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है।

  2. 2

    अनुच्छेद 32 मूल अधिकारों को लागू कराता है; अनुच्छेद 226 अधिक व्यापक है क्योंकि वह अन्य कानूनी अधिकारों को भी समेटता है।

  3. 3

    केशवानंद भारती, मिनर्वा मिल्स और एल. चंद्र कुमार के बाद न्यायिक समीक्षा आधारभूत ढांचे का हिस्सा है।

  4. 4

    अनुच्छेद 136 की विशेष अनुमति विवेकाधीन है; यह अधिकार के रूप में सामान्य अपील नहीं है।

  5. 5

    राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को 2015 में इसलिए असंवैधानिक घोषित किया गया क्योंकि न्यायिक स्वतंत्रता आधारभूत ढांचे का हिस्सा मानी गई।

  6. 6

    PIL ने वास्तविक सार्वजनिक हित के मामलों में वाद दाखिल करने की पात्रता ढीली की, पर बलवंत सिंह चौफल ने दुरुपयोग पर चेतावनी दी।

  7. 7

    अनुच्छेद 142 लंबित मामलों में पूर्ण न्याय की शक्ति देता है, पर इससे न्यायालय विधायिका नहीं बन जाता।

  8. 8

    न्यायिक समीक्षा, न्यायिक सक्रियता और PIL व्यवहार में साथ दिख सकते हैं, फिर भी प्रीलिम्स के लिए तीनों अलग अवधारणाएं हैं।

संघीय न्यायपालिका की संवैधानिक रूपरेखा

  • भाग 5 का अध्याय 4 मुख्य ढांचा है: अनुच्छेद 124 से 147 उच्चतम न्यायालय की स्थापना, गठन, अधिकार-क्षेत्र, शक्तियां, नियम बनाने की शक्ति और व्याख्या की अंतिमता तय करते हैं। UPSC अक्सर पूछता है कि कोई शक्ति अनुच्छेद 32, 136, 141 या 142 में से किससे आती है, इसलिए इस समूह को बिखरे तथ्यों की तरह नहीं, एक जुड़े हुए ढांचे की तरह पढ़ना चाहिए।
  • अनुच्छेद 124 न्यायालय की स्थापना करता है: इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और संसद द्वारा तय संख्या के अन्य न्यायाधीशों की व्यवस्था है। न्यायाधीशों की मौजूदा स्वीकृत संख्या संविधान में स्थिर नहीं है; उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश संख्या अधिनियम, 1956 में समय-समय पर संशोधन हुए हैं और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन अध्यादेश, 2026 के बाद स्वीकृत कुल संख्या 38 है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं।
  • एकीकृत न्यायपालिका मूल व्यवस्था है: भारत में संवैधानिक कानून के लिए अलग-अलग संघीय और राज्य न्यायालय-श्रृंखलाएं नहीं हैं। उच्चतम न्यायालय शिखर पर है, उच्च न्यायालय राज्य न्यायिक व्यवस्था की निगरानी करते हैं और अनुच्छेद 141 के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होती है।
  • स्वतंत्रता को संस्थागत सुरक्षा मिली है: न्यायाधीशों को पद की सुरक्षा, भारित व्यय, सेवानिवृत्ति के बाद न्यायालयों में वकालत पर रोक और अनुच्छेद 124(4) के तहत कठिन हटाने की प्रक्रिया मिलती है। ये बातें इसलिए अहम हैं क्योंकि न्यायिक समीक्षा के लिए कार्यपालिका और विधायिका से संस्थागत दूरी चाहिए।
  • अनुच्छेद 129 में अभिलेख न्यायालय का दर्जा: उच्चतम न्यायालय अवमानना पर दंड दे सकता है और उसके अभिलेखों का प्रमाणिक महत्व है। इसे अनुच्छेद 141 से न मिलाएं; पहला दर्जे और अवमानना से जुड़ा है, दूसरा बाध्यकारी विधि से।
  • शक्तियों का पृथक्करण संतुलित है, कठोर दीवार नहीं: न्यायालय वैधता और संवैधानिकता की समीक्षा करते हैं, पर वे सामान्यतः निर्वाचित सरकार की नीति-राय को अपनी राय से बदलने से बचते हैं। परीक्षा में गलती यह होती है कि न्यायिक समीक्षा को हर सार्वजनिक प्रश्न पर न्यायिक सर्वोच्चता मान लिया जाता है; असल में समीक्षा तब सबसे मजबूत होती है जब अधिकार, संघीय सीमाएं, संवैधानिक प्रक्रिया या आधारभूत ढांचा दांव पर हों।
  • संस्थागत फर्क याद रखें: उच्चतम न्यायालय में मूल, अपीलीय, परामर्शी, पुनर्विचार और उपचारात्मक भूमिकाएं हैं। ये महत्व की सीढ़ियां नहीं, बल्कि न्यायालय तक पहुंचने या लौटने के अलग-अलग मार्ग हैं।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQअनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 32 स्वयं एक मूल अधिकार है। 2. अनुच्छेद 226 का उपयोग मूल अधिकारों के अलावा अन्य कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए भी हो सकता है। 3. अनुच्छेद 32 उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देता है। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2सही
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं। अनुच्छेद 32 मूल अधिकारों के लिए उच्चतम न्यायालय का मार्ग है; उच्च न्यायालय की रिट शक्ति अनुच्छेद 226 में है, अनुच्छेद 32 में नहीं।

~50 शब्द · 1 अंक