शासन, सार्वजनिक नीति, डिजिटल शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 19(1)(a) जानने के अधिकार को सहारा देता है; अनुच्छेद 21 गरिमा, निजता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया को आधार देता है।
- RTI अधिनियम, 2005 नागरिक आवेदन, स्वप्रेरित प्रकटीकरण, अपील, अपवाद और दंड को जोड़ता है।
- 2024 के चुनावी बॉन्ड निर्णय ने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को मतदाता के सूचना अधिकार से जोड़ा।
- डीपीडीपी अधिनियम, 2023 और नियम, 2025 डेटा संरक्षण को डिजिटल शासन और कल्याणकारी सेवा से जोड़ते हैं।
मुख्य बिंदु
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शासन सरकार से व्यापक है; इसमें वैधता, जवाबदेही, पारदर्शिता, भागीदारी, संवेदनशीलता और परिणाम शामिल हैं।
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अनुच्छेद 19(1)(a) जानने के अधिकार को सहारा देता है; अनुच्छेद 21 गरिमा, निजता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया को आधार देता है।
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RTI अधिनियम, 2005 नागरिक आवेदन, स्वप्रेरित प्रकटीकरण, अपील, अपवाद और दंड को जोड़ता है।
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डिजिटल शासन निगरानी बेहतर करता है, पर बहिष्करण, निजता और साइबर सुरक्षा के जोखिम भी बना सकता है।
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लोकपाल, केंद्रीय सतर्कता आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, न्यायालय, संसद और सामाजिक अंकेक्षण अलग जवाबदेही देते हैं।
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सार्वजनिक नीति में मुद्दा, नीति-रचना, वित्त, लागू करना, मूल्यांकन और प्रतिक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।
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तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संशोधन भाग IX और IXA के जरिए शासन को स्थानीय भागीदारी से जोड़ते हैं।
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2024 के चुनावी बॉन्ड निर्णय ने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को मतदाता के सूचना अधिकार से जोड़ा।
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डीपीडीपी अधिनियम, 2023 और नियम, 2025 डेटा संरक्षण को डिजिटल शासन और कल्याणकारी सेवा से जोड़ते हैं।
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शासन का आधार और संवैधानिक ढांचा
शासन का अर्थ केवल दफ्तर चलाना नहीं है; यह सार्वजनिक शक्ति को कानून, संस्थाओं, नागरिक भागीदारी, तकनीक और निगरानी के भीतर रखकर इस्तेमाल करने की व्यवस्था है।
- परीक्षा में अर्थ: प्रशासन पूछता है कि काम किसने किया; शासन पूछता है कि काम कानूनसम्मत, जवाबदेह, पारदर्शी, समावेशी और असरदार था या नहीं।
- मुख्य लक्षण: विधि का शासन, संवैधानिकता, भागीदारी, समानता, संवेदनशीलता, सर्वसम्मति-उन्मुखता, प्रभावशीलता, दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही।
- संवैधानिक आधार: शासन किसी एक अनुच्छेद में बंद नहीं है; प्रस्तावना, मूल अधिकार, नीति-निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य, स्थानीय स्वशासन और स्वतंत्र निगरानी संस्थाएं मिलकर इसका ढांचा बनाते हैं।
- अधिकारों का आधार: अनुच्छेद 14 मनमानी रोकता है; अनुच्छेद 19(1)(a) जानने के अधिकार को सहारा देता है; अनुच्छेद 21 गरिमा, निजता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया की रक्षा करता है; अनुच्छेद 32 और 226 अधिकारों को लागू कराते हैं।
- नीति-निदेशक आधार: अनुच्छेद 38 कल्याण और असमानता घटाने की दिशा देता है; अनुच्छेद 39A न्याय तक समान पहुंच जोड़ता है; अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों की बात करता है; अनुच्छेद 41, 43 और 47 कल्याणकारी नीति का संकेत देते हैं।
- जवाबदेही का आधार: अनुच्छेद 75(3) और 164(2) मंत्रिपरिषद को निर्वाचित सदन के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह बनाते हैं; अनुच्छेद 148-151 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के जरिए लेखा-परीक्षा कराते हैं; अनुच्छेद 280 वित्त आयोग को नियमबद्ध हस्तांतरण से जोड़ता है।
- विकेंद्रीकरण का आधार: तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संशोधन, 1992 ने भाग IX और IXA जोड़े; ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के 29 विषय और बारहवीं अनुसूची में नगर निकायों के 18 विषय हैं।
- कानूनी औजार: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005; लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013; केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 जिसका 2018 में संशोधन हुआ; आधार अधिनियम, 2016; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023।
- सूक्ष्म अंतर: सुशासन मूल्य-मानक है; डिजिटल शासन तकनीकी औजारों का समूह है; सार्वजनिक नीति वह पूरी प्रक्रिया है जिसमें राज्य समस्या पहचानता, विकल्प चुनता, पैसा देता, लागू करता और परिणाम जांचता है।
- UPSC के लिहाज से सावधानी: पारदर्शिता अपने-आप जवाबदेही नहीं बनती। सूचना मिलना पहला कदम है; जवाबदेही के लिए मंच, जवाब, सुधार या दंड भी चाहिए।
- सीमा: कल्याणकारी उद्देश्य भी कानून, अनुपातिकता, समता और निजता से ऊपर नहीं जा सकता; तकनीक संवैधानिक सुरक्षा की जगह नहीं लेती।
- प्रमुख मामले: एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ, 1981 ने न्यायाधीश स्थानांतरण संदर्भ में खुले शासन की सोच को आगे बढ़ाया; सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल, 1995 ने सूचना प्राप्त करने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा।
- प्रशासनिक कानून संबंध: प्राकृतिक न्याय, कारणयुक्त आदेश, वैध अपेक्षा और अनुपातिकता अलग डिब्बे नहीं हैं; इन्हीं से वैधानिक विवेकाधिकार वाले शासन-निर्णय जांचे जाते हैं।
- संस्थागत ढांचा: अच्छा शासन तंत्र प्राधिकरण का नाम बताता है, प्रक्रिया तय करता है, अभिलेख बचाता है, अपील बनाता है, मानक प्रकाशित करता है और लेखा रिकॉर्ड छोड़ता है। इनमें कमी बाद की जवाबदेही कमजोर करती है।
- परीक्षा सावधानी: कल्याण, सुरक्षा और दक्षता वैध सार्वजनिक उद्देश्य हो सकते हैं, पर प्रश्न यह पूछ सकता है कि चुना गया साधन बहुत व्यापक, भेदभावपूर्ण या कानून-विहीन तो नहीं है।
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1MCQभारत में शासन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 19(1)(a) को न्यायालयों ने नागरिक के जानने के अधिकार से जोड़ा है। 2. अनुच्छेद 21 का डिजिटल कल्याणकारी सेवाओं से कोई संबंध नहीं है। 3. अनुच्छेद 14 मनमाने सेवा-इनकार की जांच में काम आ सकता है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 2 गलत है, क्योंकि गरिमा, निजता और जरूरी लाभों तक पहुंच अनुच्छेद 21 का प्रश्न बना सकती है।
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