मुख्य तथ्य

  • भाग 18 में अनुच्छेद 352-360 हैं; मुख्य 3 आपात स्थितियां राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल हैं।
  • अनुच्छेद 352 में अब संघ मंत्रिमंडल की लिखित सलाह और 1 महीने के भीतर विशेष बहुमत से संसदीय मंज़ूरी चाहिए।
  • अनुच्छेद 358 से अनुच्छेद 19 केवल युद्ध या बाहरी आक्रमण वाले आपातकाल में अपने-आप निलंबित होता है, सशस्त्र विद्रोह में नहीं।
  • 44वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 359, अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन के लिए अदालत जाने का अधिकार निलंबित नहीं कर सकता।
  • एस. आर. बोम्मई के बाद अनुच्छेद 356 न्यायिक समीक्षा योग्य है; बहुमत सामान्यतः विधानसभा में जांचा जाना चाहिए।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    भाग 18 में अनुच्छेद 352-360 हैं; मुख्य 3 आपात स्थितियां राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल हैं।

  2. 2

    अनुच्छेद 352 में अब संघ मंत्रिमंडल की लिखित सलाह और 1 महीने के भीतर विशेष बहुमत से संसदीय मंज़ूरी चाहिए।

  3. 3

    अनुच्छेद 358 से अनुच्छेद 19 केवल युद्ध या बाहरी आक्रमण वाले आपातकाल में अपने-आप निलंबित होता है, सशस्त्र विद्रोह में नहीं।

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    44वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 359, अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन के लिए अदालत जाने का अधिकार निलंबित नहीं कर सकता।

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    एस. आर. बोम्मई के बाद अनुच्छेद 356 न्यायिक समीक्षा योग्य है; बहुमत सामान्यतः विधानसभा में जांचा जाना चाहिए।

  6. 6

    अनुच्छेद 360 के तहत भारत में वित्तीय आपातकाल कभी घोषित नहीं हुआ।

  7. 7

    अनुच्छेद 356 को 1 वर्ष से आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल और चुनाव आयोग का प्रमाण जरूरी है।

  8. 8

    44वें संशोधन ने आंतरिक अशांति की जगह सशस्त्र विद्रोह रखा और 1975 के बाद मुख्य सुरक्षा-उपाय जोड़े।

  9. 9

    अनुच्छेद 355 संघ-कर्तव्य का पुल है; संघ निर्देशों की अवहेलना पर अनुच्छेद 365, अनुच्छेद 356 को सहारा दे सकता है।

संवैधानिक ढांचा और प्रकार

भाग 18 कोई सामान्य प्रशासनिक अध्याय नहीं है। यह संविधान का संकट-कालीन ढांचा है: असाधारण स्थिति में शक्ति का अस्थायी केंद्रीकरण हो सकता है, लेकिन केवल लिखे हुए आधार, संसद की मंज़ूरी और न्यायिक सीमाओं के भीतर।

  • स्थान और दायरा: आपात उपबंध भाग 18, अनुच्छेद 352-360 में हैं। ये सामान्य संघ-राज्य शक्ति-विभाजन से अलग दिखते हैं, पर असर सीधे संघवाद, मूल अधिकार, विधायी क्षमता, राजस्व बंटवारे और निर्वाचित विधानसभाओं पर पड़ता है।
  • तीन संवैधानिक आपात स्थितियां: अनुच्छेद 352 युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़ा है। अनुच्छेद 356 किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन से जुड़ा है। अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से जुड़ा है, जब भारत की वित्तीय स्थिरता या साख पर खतरा हो।
  • सहायक अनुच्छेद: अनुच्छेद 353 राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव बताता है। अनुच्छेद 354 राजस्व बंटवारे की व्यवस्था में अस्थायी बदलाव की अनुमति देता है। अनुच्छेद 355 संघ पर राज्यों को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाने तथा वहां संवैधानिक शासन सुनिश्चित करने का कर्तव्य डालता है। अनुच्छेद 357 राष्ट्रपति शासन में विधायी शक्तियों का ढांचा देता है। अनुच्छेद 358 और 359 मूल अधिकारों पर प्रभाव बताते हैं।
  • UPSC के लिहाज़ से फर्क: अनुच्छेद 352 सुरक्षा-केंद्रित है, अनुच्छेद 356 संवैधानिक तंत्र-केंद्रित है और अनुच्छेद 360 वित्त-केंद्रित है। इन शब्दों को आपस में बदलकर नहीं पढ़ना चाहिए। केवल कानून-व्यवस्था की समस्या अपने-आप अनुच्छेद 356 नहीं बनती; केवल आर्थिक कठिनाई अपने-आप अनुच्छेद 360 नहीं बनती।
  • संघीय रचना: सामान्य समय में भारत मजबूत केंद्र वाला संघ है। आपातकाल में यह झुकाव और बढ़ता है: संसद राज्यों के विषयों पर कानून बना सकती है, संघ व्यापक निर्देश दे सकता है और विधानमंडलों की अवधि खास शर्तों पर बढ़ सकती है।
  • संवैधानिक नैतिकता: इन उपबंधों का उद्देश्य संविधान को बचाना है, न कि दलगत लाभ लेना। इसलिए बाद के संशोधनों और उच्चतम न्यायालय के फैसलों ने अस्पष्ट आधारों को सीमित किया और समीक्षा की गुंजाइश बनाई।
  • प्रीलिम्स में पकड़: आधार, उद्घोषणा कौन करता है, संसद की मंज़ूरी, अवधि, समाप्ति, अधिकारों पर असर और संघवाद से संबंध अलग-अलग याद रखें। ज़्यादातर गलतियां एक तरह के आपातकाल की बात को दूसरी तरह पर लागू करने से होती हैं।
  • अनुच्छेद 355 की पुल-भूमिका: अनुच्छेद 355 स्वयं उद्घोषणा वाला अनुच्छेद नहीं है, लेकिन यह संघ का संवैधानिक कर्तव्य बताता है: हर राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाना तथा यह सुनिश्चित करना कि राज्य सरकार संविधान के अनुसार चले। यही उपबंध सामान्य संघीय निर्देशों और अनुच्छेद 356 जैसे कठोर कदम के बीच पुल बनता है।
  • अनुसूची और सूची से संबंध: आपात उपबंध कोई नई अनुसूची नहीं बनाते। उनका असर सातवीं अनुसूची के ज़रिए दिखता है, क्योंकि अनुच्छेद 352 में संसद अस्थायी रूप से राज्य सूची के विषयों में प्रवेश कर सकती है; वित्तीय उपबंधों पर असर अनुच्छेद 354 में राजस्व बंटवारे के बदलाव से दिखता है।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQअनुच्छेद 352 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. उद्घोषणा के लिए संघ मंत्रिमंडल के निर्णय की लिखित सूचना जरूरी है। 2. संसदीय मंज़ूरी विशेष बहुमत से होनी चाहिए। 3. लोकसभा भंग हो तो केवल राज्यसभा की मंज़ूरी पर्याप्त है और नई लोकसभा के सामने रखना जरूरी नहीं। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2सही
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 2, 44वें संशोधन की सुरक्षा-व्यवस्था बताते हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि नई लोकसभा को अपनी पहली बैठक से 30 दिनों के भीतर मंज़ूरी देनी होती है।

~50 शब्द · 1 अंक