संवैधानिक निकाय: चुनाव आयोग, लोक सेवा आयोग, वित्त आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और विधि-अधिकारी
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 324 भारत के चुनाव आयोग को राष्ट्रीय और राज्य विधानमंडल चुनावों का दायरा देता है, पंचायत या नगरपालिका चुनावों का नहीं।
- अनुच्छेद 280 का वित्त आयोग कर हस्तांतरण, सहायता-अनुदान और स्थानीय निकाय संसाधन-वृद्धि पर सिफारिश करता है।
- अनुच्छेद 148-151 का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक लेखा-परीक्षा कर रिपोर्ट देता है; विधायी समितियां जवाबदेही बनाती हैं।
- संघ और राज्य लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315 के निकाय हैं; राज्य आयोग सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति करता है।
- अनुच्छेद 76 का महान्यायवादी संसद में बिना वोट भाग लेता है; राज्यों में महाधिवक्ता समान भूमिका निभाता है।
मुख्य बिंदु
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अनुच्छेद 324 भारत के चुनाव आयोग को राष्ट्रीय और राज्य विधानमंडल चुनावों का दायरा देता है, पंचायत या नगरपालिका चुनावों का नहीं।
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी विधि से हटाया जाता है; अन्य आयुक्तों के लिए उसकी सिफारिश चाहिए।
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अनुच्छेद 280 का वित्त आयोग कर हस्तांतरण, सहायता-अनुदान और स्थानीय निकाय संसाधन-वृद्धि पर सिफारिश करता है।
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अनुच्छेद 148-151 का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक लेखा-परीक्षा कर रिपोर्ट देता है; विधायी समितियां जवाबदेही बनाती हैं।
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संघ और राज्य लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315 के निकाय हैं; राज्य आयोग सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति करता है।
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अनुच्छेद 76 का महान्यायवादी संसद में बिना वोट भाग लेता है; राज्यों में महाधिवक्ता समान भूमिका निभाता है।
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अनूप बरनवाल, 2023 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 नियुक्ति-स्वतंत्रता को समसामयिक बहस बनाते हैं।
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लोक सेवा आयोग की सलाह और वित्त आयोग की सिफारिशें सलाहकारी हैं; चुनाव आयोग के संचालनात्मक आदेश कानून के भीतर तुरंत असर डाल सकते हैं।
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संवैधानिक निकाय: एक नज़र में और UPSC के लिए ज़रूरी बातें
यह विषय उन संस्थाओं का समूह है जिन्हें संविधान ने सीधे जगह दी है, ताकि चुनाव, भर्ती, लेखा-परीक्षा, राजस्व-बंटवारा और सरकारी विधिक सलाह केवल रोज़मर्रा की कार्यपालिका पर निर्भर न रहें।
- अर्थ: संवैधानिक निकाय वह है जिसका आधार सीधे संविधान के किसी अनुच्छेद में हो; वैधानिक निकाय संसद या राज्य विधानमंडल के अधिनियम से बनता है। UPSC अक्सर इसी फर्क को मिलते-जुलते नामों से पूछता है।
- चुनाव समूह: अनुच्छेद 324-329 चुनाव आयोग, मतदाता-सूची, वयस्क मताधिकार, चुनावों पर विधायी शक्ति और चुनाव-प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत की दखल-सीमा बताते हैं।
- भर्ती समूह: अनुच्छेद 315-323 संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग और संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग को शामिल करते हैं।
- वित्तीय जवाबदेही समूह: अनुच्छेद 280 वित्त आयोग बनाता है; अनुच्छेद 148-151 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को बनाते हैं और लेखा-परीक्षा रिपोर्टों को विधायिका तक पहुंचाते हैं।
- विधिक सलाह समूह: अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी का पद बनाता है; अनुच्छेद 165 हर राज्य के महाधिवक्ता का पद बनाता है।
- स्थानीय शासन की कड़ी: 73वें और 74वें संशोधन के बाद जुड़े अनुच्छेद 280(3)(bb) और 280(3)(c) संघ वित्त आयोग को पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधनों से जोड़ते हैं।
- परीक्षा की गलती: ये सभी संवैधानिक निकाय हैं, पर उनकी सिफारिशें समान रूप से बाध्यकारी नहीं हैं। वित्त आयोग की सिफारिशें स्वीकार होने तक सलाहकारी हैं; लोक सेवा आयोग की सलाह भी सलाहकारी है; नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट विधायी समितियों से असरदार होती है; चुनाव आयोग का निर्देश तभी टिकाऊ होता है जब वह कानून की खाली जगह भरता है, कानून से टकराता नहीं।
- स्वतंत्रता की बनावट: संवैधानिक दर्जा, कठिन हटाने की प्रक्रिया, भारित व्यय, पद छोड़ने के बाद रोक और विधायिका को रिपोर्ट भेजने जैसे उपाय अलग-अलग निकायों में अलग ढंग से लगाए गए हैं। हर निकाय में हर सुरक्षा मान लेना गलत है।
- UPSC के लिहाज़ से: निकाय को नियुक्ति-प्राधिकारी, हटाने की विधि, अनुच्छेद-सीमा, रिपोर्ट किसे भेजी जाती है, कार्यकाल और संरचना से जोड़कर याद रखें।
- सीमा तय करने का तरीका: किसी भी अनजान संस्था पर पहले संवैधानिक स्रोत पहचानें, फिर वह कानून देखें जो कामकाजी विवरण देता है। इससे चुनाव आयोग और चुनाव-चिह्न आदेश, वित्त आयोग और 1951 अधिनियम, तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और 1971 अधिनियम अलग दिखते हैं, जबकि उनका संवैधानिक दर्जा बना रहता है।
- यह क्यों अहम है: UPSC प्रायः केवल “क्या यह संवैधानिक है?” नहीं पूछता। वह पूछता है कि संविधान द्वारा निकाय बनाने के बाद साधारण कानून नियुक्ति, योग्यता, सेवा-शर्त या प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकता है या नहीं। सही उत्तर अक्सर यही होता है कि संवैधानिक निर्माण और वैधानिक विवरण साथ-साथ चल सकते हैं।
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1MCQभारत के चुनाव आयोग पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 324 पंचायत और नगरपालिका चुनावों को अपने दायरे में लाता है। 2. अन्य निर्वाचन आयुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाए जा सकते। 3. अन्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त होने पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त अध्यक्ष की तरह काम करता है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
अनुच्छेद 324 स्थानीय निकाय चुनावों को अपने दायरे में नहीं लाता; वे अनुच्छेद 243K और 243ZA में हैं। कथन 2 और 3 अनुच्छेद 324(5) और 324(3) से मेल खाते हैं।
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