भारतीय संवैधानिक ढांचे की अन्य देशों से तुलना
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ बनाता है; संघवाद मजबूत है, पर अमेरिकी ढांचे जैसा नहीं।
- अनुच्छेद 21 विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया कहता है, लेकिन मेनका गांधी 1978 ने उसे न्यायसंगत और उचित बनाया।
- अनुच्छेद 368 संसद को व्यापक संशोधन शक्ति देता है, पर केशवानंद भारती 1973 मूल ढांचे की रक्षा करता है।
- आपात प्रावधान तुलनात्मक अनुभवों से जुड़े हैं, पर 44वां संशोधन 1978 ने कई जोखिम घटाए।
- सातवीं अनुसूची, वित्तीय प्रावधान और अनुच्छेद 356 कई क्लासिक संघीय व्यवस्थाओं से अधिक केंद्रीय झुकाव बनाते हैं।
मुख्य बिंदु
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भारत ने संस्थागत विचार लिए, पर उन्हें संसदीय जवाबदेही वाले संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य में ढाला।
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अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ बनाता है; संघवाद मजबूत है, पर अमेरिकी ढांचे जैसा नहीं।
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अनुच्छेद 21 विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया कहता है, लेकिन मेनका गांधी 1978 ने उसे न्यायसंगत और उचित बनाया।
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अनुच्छेद 368 संसद को व्यापक संशोधन शक्ति देता है, पर केशवानंद भारती 1973 मूल ढांचे की रक्षा करता है।
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आपात प्रावधान तुलनात्मक अनुभवों से जुड़े हैं, पर 44वां संशोधन 1978 ने कई जोखिम घटाए।
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भारत प्रवर्तनीय मूल अधिकार, न्यायालय से सीधे प्रवर्तनीय न होने वाले नीति-निदेशक तत्व और मजबूत न्यायिक समीक्षा को साथ रखता है।
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सातवीं अनुसूची, वित्तीय प्रावधान और अनुच्छेद 356 कई क्लासिक संघीय व्यवस्थाओं से अधिक केंद्रीय झुकाव बनाते हैं।
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हाल की बहसें निर्वाचन नियुक्ति, एक साथ चुनाव, निजता कानून और आरक्षण से जुड़ी संवैधानिक सीमाओं पर हैं।
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तुलनात्मक ढांचा और संवैधानिक पहचान
- यह विषय उधार लिए गए प्रावधानों की सूची भर नहीं है। असली बात यह है कि भारत ने विदेशी संवैधानिक विचारों को उपनिवेशोत्तर, सामाजिक रूप से विविध और विशाल मतदाता वर्ग वाले गणराज्य के हिसाब से कैसे ढाला।
- प्रस्तावना पहचान बताती है: संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य; न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता। समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द 42वें संशोधन, 1976 से जोड़े गए, पर इनके मूल मूल्य संविधान की व्याख्या में पहले भी मौजूद माने गए और बाद में भी बने रहे।
- अनुच्छेद 1 कहता है कि भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा। यह शब्द-चयन सोचा-समझा है। अमेरिका की तरह यह पहले से संप्रभु राज्यों के समझौते से बना संघ नहीं है; और ब्रिटेन की तरह केवल संसदीय परंपरा पर चलने वाली व्यवस्था भी नहीं, क्योंकि यहां लिखित और सर्वोच्च संविधान है।
- भारत ने कई जगहों से विचार लिए: ब्रिटेन से संसदीय सरकार; अमेरिका से संघवाद, न्यायिक समीक्षा और अधिकारों की भाषा के कुछ तत्व; आयरलैंड से नीति-निदेशक तत्व; वाइमर जर्मनी से आपात प्रावधानों की प्रेरणा; ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची का विचार; और संशोधन में लचीलापन कई संविधानों से।
- इसलिए तुलना का केंद्र अनुकूलन है। ब्रिटिश कैबिनेट प्रणाली को लिखित और सर्वोच्च संविधान के भीतर रखा गया। संघीय ढांचे में मजबूत संघ बनाया गया। अधिकार प्रवर्तनीय हैं, पर सामाजिक सुधार, आरक्षण और उचित प्रतिबंधों को भी संवैधानिक जगह दी गई है।
- UPSC अक्सर यह भ्रम परखता है कि जहां से विचार आया, भारत में वही नियम जस-का-तस लागू है। ऐसा नहीं है। भारत में संसदीय जवाबदेही है, लेकिन न्यायालय कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है; अनुच्छेद 21 में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया है, पर 1978 के बाद न्यायिक व्याख्या ने उसे केवल प्रक्रिया नहीं रहने दिया।
- सही समझ यह है: भारत किसी एक देश की नकल नहीं और न ही बिखरा हुआ मिश्रण है। यह एक सोचा-समझा संवैधानिक ढांचा है, जो एकता, लोकतंत्र, सामाजिक बदलाव, प्रवर्तनीय अधिकारों और संस्थागत लचीलेपन को साथ रखता है।
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1MCQभारत और अमेरिका के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. दोनों में लिखित संविधान और न्यायिक समीक्षा है। 2. दोनों व्यवस्थाओं में अवशिष्ट विधायी शक्तियां राज्यों के पास हैं। 3. भारत में एक नागरिकता है, जो अमेरिकी संघीय परंपरा से अलग है। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
भारत और अमेरिका दोनों में लिखित संवैधानिकता और न्यायिक समीक्षा है। भारत में अनुच्छेद 248 और प्रविष्टि 97 से अवशिष्ट शक्तियां संसद के पास हैं, और एक नागरिकता है।
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