विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य
मुख्य तथ्य
- विजयनगर की शुरुआत 1336 में हरिहर प्रथम और बुक्का प्रथम के दौर में हुई; बहमनी राज्य 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने बनाया।
- कृष्णदेवराय का शासन, 1509-1529, विजयनगर की राजनीतिक और सांस्कृतिक ऊंचाई माना जाता है।
- महमूद गवां ने बहमनी प्रशासन में तरफों पर केंद्र का नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की; 1481 में उनका मृत्युदंड राज्य की गुटबाज़ी दिखाता है।
- 1565 के तालिकोटा युद्ध ने विजयनगर की सैन्य बढ़त तोड़ी, पर वंश उसी समय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
- हम्पी को 1986 में पहले, तीसरे और चौथे मानदंड के आधार पर UNESCO विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया।
मुख्य बिंदु
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विजयनगर की शुरुआत 1336 में हरिहर प्रथम और बुक्का प्रथम के दौर में हुई; बहमनी राज्य 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने बनाया।
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कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच का रायचूर दोआब दोनों शक्तियों की लंबी टकराहट का मुख्य इलाका था।
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कृष्णदेवराय का शासन, 1509-1529, विजयनगर की राजनीतिक और सांस्कृतिक ऊंचाई माना जाता है।
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महमूद गवां ने बहमनी प्रशासन में तरफों पर केंद्र का नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की; 1481 में उनका मृत्युदंड राज्य की गुटबाज़ी दिखाता है।
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विजयनगर स्थापत्य में द्रविड़ मंदिर रूप, बड़े मंडप, गोपुरम, बाजार और राजकीय परिसर साथ दिखते हैं।
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गुलबर्गा, बीदर और महमूद गवां मदरसे के ज़रिए बहमनी कला ने दकनी इंडो-इस्लामी स्थापत्य को आकार दिया।
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1565 के तालिकोटा युद्ध ने विजयनगर की सैन्य बढ़त तोड़ी, पर वंश उसी समय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
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हम्पी को 1986 में पहले, तीसरे और चौथे मानदंड के आधार पर UNESCO विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया।
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रूपरेखा, कालक्रम और स्रोत
- परिभाषा और जगह: विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य मध्यकालीन दकन की दो बड़ी शक्तियां थीं। ये दिल्ली सल्तनत की दक्षिणी पकड़ कमज़ोर होने के बाद उभरीं। विजयनगर का केंद्र तुंगभद्रा घाटी और हम्पी-विजयनगर रहा; बहमनी सत्ता पहले गुलबर्गा से चली और बाद में बीदर केंद्र बना।
- मुख्य तिथियां: विजयनगर की परंपरागत शुरुआत 1336 मानी जाती है और इसे संगम वंश के हरिहर प्रथम तथा बुक्का प्रथम से जोड़ा जाता है। बहमनी राज्य 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने बनाया, जब मुहम्मद बिन तुगलक की दक्षिणी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह सफल हुआ। 1565 का तालिकोटा युद्ध विजयनगर के लिए निर्णायक सैन्य झटका था। बहमनी शक्ति 15वीं सदी के अंत और 16वीं सदी की शुरुआत में दकनी सल्तनतों में बिखर गई।
- UPSC के लिहाज़ से दायरा: यह विषय केवल राजाओं की सूची नहीं है। इसमें मध्यकालीन राजव्यवस्था, कृषि-राजस्व, घुड़सवार सेना का व्यापार, मंदिर-नगर अर्थव्यवस्था, इंडो-इस्लामी स्थापत्य, फारसी दरबारी संस्कृति, क्षेत्रीय साहित्य और धरोहर संरक्षण जुड़ते हैं।
- अहम स्रोत: फ़रिश्ता जैसे फारसी इतिहासकार, निकोलो कोंटी, अब्दुर रज़्ज़ाक, डोमिंगो पायस और फर्नाओ नुनिज़ जैसे यात्री, अभिलेख, सिक्के, मंदिर अभिलेख और हम्पी, गुलबर्गा तथा बीदर के पुरातात्विक अवशेष साथ पढ़े जाने चाहिए। यात्रियों के विवरण जीवंत हैं, पर पूरी तरह निष्पक्ष नहीं; अभिलेख आश्रयदाता की प्रशंसा करते हैं; बाद के इतिहासकार कई घटनाओं को संक्षेप में रखते हैं।
- परीक्षा में सावधानी: विजयनगर को केवल धार्मिक प्रतिक्रिया मानना गलत है। इसके निर्माण में होयसळ, काकतीय, कंपिली और स्थानीय नायक-सरदार तंत्र भी शामिल थे। बहमनी राज्य भी केवल बाहरी आक्रमणकारी सत्ता नहीं था; वह दकन में जड़ें जमाने वाला राज्य बना, जिसमें स्थानीय सैनिक समूह, सूफी संबंध और क्षेत्रीय संस्कृति मौजूद थे।
- मुख्य शब्द: विजयनगर के लिए साम्राज्य शब्द इस्तेमाल करते समय याद रखें कि उसकी सत्ता नायकों, सरदारों और अधीन राज्यों के ज़रिए परतदार ढंग से चलती थी। बहमनी को राज्य या सल्तनत कहना ठीक है, पर तरफ नाम की प्रांतीय व्यवस्था और दरबारी गुटबाज़ी सुल्तान की सीधी शक्ति को सीमित करती थी।
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1MCQविजयनगर और बहमनी राज्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. विजयनगर बहमनी राज्य से पहले उभरा। 2. रायचूर दोआब कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच था। 3. 1425 में बहमनी राजधानी बीदर से गुलबर्गा ले जाई गई। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-से सही हैं?
व्याख्या
विजयनगर की तिथि 1336 और बहमनी की 1347 मानी जाती है। रायचूर दोआब कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच है। बहमनी राजधानी गुलबर्गा से बीदर गई थी, उल्टा नहीं।
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