मुख्य तथ्य

  • 1905 के बंगाल विभाजन ने स्थानीय क्रांतिकारी समूहों को स्वदेशी युग की व्यापक राजनीतिक धारा में बदला।
  • औपनिवेशिक दमन में IPC धारा 121-124A, शस्त्र अधिनियम 1878, पत्र-पत्रिका कानून, भारत रक्षा अधिनियम 1915 और रॉलेट अधिनियम 1919 इस्तेमाल हुए।
  • एचआरए 1924 में बना; 1928 की फिरोजशाह कोटला बैठक के बाद वह समाजवादी गणतांत्रिक दिशा वाले एचएसआरए में बदला।
  • चिटगांव शस्त्रागार छापा 18 अप्रैल 1930 को सूर्य सेन के नेतृत्व में हुआ; इसे आजाद हिंद फौज से अलग रखें।
  • स्वतंत्र भारत अनुच्छेद 19 में असहमति की रक्षा करता है, पर लोक-व्यवस्था, राज्य सुरक्षा और संप्रभुता-अखंडता के लिए प्रतिबंध देता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    क्रांतिकारी राष्ट्रवाद में गुप्त गुट और बल-प्रयोग दिखता है; उग्र राष्ट्रवाद में सार्वजनिक बहिष्कार, स्वदेशी और निष्क्रिय प्रतिरोध भी आते हैं।

  2. 2

    1905 के बंगाल विभाजन ने स्थानीय क्रांतिकारी समूहों को स्वदेशी युग की व्यापक राजनीतिक धारा में बदला।

  3. 3

    अनुशीलन समिति, युगांतर, अभिनव भारत, गदर, एचआरए, एचएसआरए और चिटगांव समूह को अलग-अलग याद रखें।

  4. 4

    औपनिवेशिक दमन में IPC धारा 121-124A, शस्त्र अधिनियम 1878, पत्र-पत्रिका कानून, भारत रक्षा अधिनियम 1915 और रॉलेट अधिनियम 1919 इस्तेमाल हुए।

  5. 5

    एचआरए 1924 में बना; 1928 की फिरोजशाह कोटला बैठक के बाद वह समाजवादी गणतांत्रिक दिशा वाले एचएसआरए में बदला।

  6. 6

    भगत सिंह का महत्व वैचारिक बदलाव में है: समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिकता-विरोध और मुकदमे को प्रचार-मंच बनाना।

  7. 7

    चिटगांव शस्त्रागार छापा 18 अप्रैल 1930 को सूर्य सेन के नेतृत्व में हुआ; इसे आजाद हिंद फौज से अलग रखें।

  8. 8

    स्वतंत्र भारत अनुच्छेद 19 में असहमति की रक्षा करता है, पर लोक-व्यवस्था, राज्य सुरक्षा और संप्रभुता-अखंडता के लिए प्रतिबंध देता है।

अवधारणा, दायरा और प्रारंभिक परीक्षा रूपरेखा

क्रांतिकारी और उग्र राष्ट्रवाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की वह धारा थी जिसने केवल अर्ज़ी और प्रार्थना वाली राजनीति को पर्याप्त नहीं माना और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अनुशासित टकराव, गुप्त संगठन, बहिष्कार, प्रचार, राजनीतिक हत्या, धन जुटाने के लिए डकैती और कुछ स्थितियों में सशस्त्र विद्रोह को रास्ते के रूप में अपनाया।

  • परिभाषा: क्रांतिकारी राष्ट्रवाद से सामान्यतः ऐसे गुप्त या अर्ध-गुप्त संगठित प्रयास समझे जाते हैं जिनका लक्ष्य बल या विद्रोह से ब्रिटिश शासन खत्म करना था; उग्र राष्ट्रवाद इससे व्यापक था, जिसमें स्वदेशी, बहिष्कार, निष्क्रिय प्रतिरोध और बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल तथा लाला लाजपत राय जैसे नेताओं की दबाव वाली जन-राजनीति भी आती है।
  • मुख्य फर्क: हर क्रांतिकारी उग्र था, पर हर उग्रवादी क्रांतिकारी नहीं था। तिलक की सार्वजनिक लामबंदी, गणपति और शिवाजी उत्सव, तथा बहिष्कार की राजनीति अपने-आप भूमिगत हिंसा नहीं बन जाती।
  • कालक्रम: पहला बड़ा दौर 1890 के दशक से 1910 के दशक तक महाराष्ट्र और बंगाल के आसपास उभरा; दूसरा दौर 1920 के दशक में बंगाल, पंजाब, संयुक्त प्रांत और बिहार को जोड़ता है; विदेशों में लंदन, पेरिस, उत्तरी अमेरिका, बर्लिन, काबुल और दक्षिण-पूर्व एशिया तक नेटवर्क बने।
  • तत्काल कारण: कर्ज़नकालीन केंद्रीकरण, 1905 का बंगाल विभाजन, नस्ली अहंकार, दमनकारी कानून, संवैधानिक रियायतों पर कमजोर भरोसा और आयरिश, रूसी, इतालवी तथा जापानी राष्ट्रवाद के उदाहरणों ने इस मनोभाव को तीखा किया।
  • सामाजिक आधार: इसमें शिक्षित मध्यवर्गीय युवा, छात्र, छोटे पेशेवर, कुछ दौरों में शहरी मजदूर और विदेशों में बसे भारतीय देशभक्त प्रमुख थे; यह लंबे समय तक किसान-आधारित राष्ट्रीय सेना नहीं बन सका।
  • UPSC के लिहाज़ से: संगठन-वर्ष-स्थान-नेता का मिलान, व्यक्तिगत वीरता से समाजवादी गणतांत्रिक सोच तक बदलाव, कानूनी दमन, और कांग्रेस, स्वदेशी आंदोलन, गदर, आजाद हिंद फौज तथा गांधीवादी जन आंदोलनों से संबंध अक्सर पूछे जाने वाले क्षेत्र हैं।
  • संवैधानिक विरासत: आज संविधान अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) में अभिव्यक्ति, सभा और संगठन की स्वतंत्रता देता है, पर अनुच्छेद 19(2), 19(3) और 19(4) में युक्तिसंगत प्रतिबंध भी हैं; 16वां संशोधन, 1963 ने भारत की संप्रभुता और अखंडता को स्पष्ट आधार बनाया।
  • संतुलित समझ: यह विषय हिंसा का महिमामंडन नहीं है। प्रारंभिक परीक्षा में इसे औपनिवेशिक दमन, सीमित लोकतांत्रिक जगह, वैचारिक प्रयोग और बलिदान-आधारित लामबंदी की खोज से बनी ऐतिहासिक धारा के रूप में पढ़ें।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. सभी क्रांतिकारी राष्ट्रवादी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उग्रवादी गुट का हिस्सा थे। 2. उग्र राष्ट्रवाद में खुला बहिष्कार और स्वदेशी राजनीति शामिल थी। 3. क्रांतिकारी संगठन अक्सर शपथबद्ध गुप्त गुटों का उपयोग करते थे। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 2 और 3सही
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 बहुत व्यापक है। क्रांतिकारी गतिविधि के कांग्रेस से संबंध थे, पर वह केवल उग्रवादी गुट नहीं थी। कथन 2 और 3 सही हैं।

~50 शब्द · 1 अंक