1857 का विद्रोह: कारण, नेतृत्व और परिणाम
मुख्य तथ्य
- 1857 का विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ और 11 मई को दिल्ली उसका प्रतीकात्मक केंद्र बनी।
- अवध का विलय 1856 में कथित कुशासन के आधार पर हुआ, डलहौजी की हड़प नीति से नहीं।
- भारत शासन अधिनियम 1858 ने कंपनी शासन खत्म कर भारत का शासन ब्रिटिश राजसत्ता को सौंपा।
- 1 नवंबर 1858 की रानी विक्टोरिया की घोषणा ने धर्म में हस्तक्षेप न करने और रियासती संधियों के सम्मान का वादा किया।
- 1857 के बाद यूरोपीय सैन्य नियंत्रण बढ़ा, भारतीयों की तोपखाने तक पहुंच घटी और रियासतों-जमीनदारों पर निर्भरता बढ़ी।
मुख्य बिंदु
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1857 का विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ और 11 मई को दिल्ली उसका प्रतीकात्मक केंद्र बनी।
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अवध का विलय 1856 में कथित कुशासन के आधार पर हुआ, डलहौजी की हड़प नीति से नहीं।
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एनफील्ड कारतूस तत्काल चिंगारी था; विलय, राजस्व, सैनिक शिकायतें और धार्मिक डर गहरे कारण थे।
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मुख्य केंद्र दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झांसी, बरेली, जगदीशपुर, आरा, ग्वालियर और बुंदेलखंड-अवध के हिस्से थे।
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भारत शासन अधिनियम 1858 ने कंपनी शासन खत्म कर भारत का शासन ब्रिटिश राजसत्ता को सौंपा।
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1 नवंबर 1858 की रानी विक्टोरिया की घोषणा ने धर्म में हस्तक्षेप न करने और रियासती संधियों के सम्मान का वादा किया।
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विद्रोह में नागरिक भागीदारी थी, पर फैलाव असमान था; बंगाल, बंबई, मद्रास और कई रियासतें व्यापक रूप से नहीं जुड़ीं।
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1857 के बाद यूरोपीय सैन्य नियंत्रण बढ़ा, भारतीयों की तोपखाने तक पहुंच घटी और रियासतों-जमीनदारों पर निर्भरता बढ़ी।
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इतिहासलेखन में इसे सैनिक बगावत से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम तक कहा गया; संतुलित दृष्टि मिश्रित लक्ष्यों वाला बड़ा कंपनी-विरोधी प्रतिरोध मानती है।
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परिभाषा, दायरा और UPSC के लिहाज़ से महत्व
- 1857 का विद्रोह ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को दी गई बड़ी सशस्त्र चुनौती थी। शुरुआत सिपाहियों की बगावत से हुई, पर उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में रियासतों, तालुकेदारों, किसानों, कारीगरों, धार्मिक व्यक्तियों और शहरी समूहों ने भी इसमें हिस्सा लिया।
- प्रीलिम्स के लिए सबसे सुरक्षित परिभाषा संतुलित है: यह केवल कारतूस-कांड नहीं था, और न ही पूरी तरह आधुनिक अर्थ में राष्ट्रवादी आंदोलन था; यह कंपनी शासन के विरुद्ध व्यापक विद्रोह था, जिसमें क्षेत्रीय नेतृत्व, पुरानी निष्ठाएं और औपनिवेशिक शासन के प्रति बढ़ता रोष साथ-साथ दिखते हैं।
- सैन्य स्तर पर खुली शुरुआत 10 मई 1857 को मेरठ में हुई। 11 मई 1857 को विद्रोही सैनिक दिल्ली पहुंचे और बहादुर शाह द्वितीय को प्रतीकात्मक राजनीतिक मुखिया बनाया गया।
- विश्लेषण में मानक शब्द 1857 का विद्रोह है। सिपाही बगावत कहने से घटना सैनिकों तक सीमित हो जाती है; प्रथम स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रीय स्मृति को दिखाता है, पर इसे बिना सावधानी के लिखने से वैचारिक एकता बढ़ा-चढ़ाकर दिख सकती है।
- इसकी कानूनी-राजनीतिक पृष्ठभूमि में चार्टर अधिनियम 1833 के बाद कंपनी का केंद्रीकृत ढांचा, डलहौजी की हड़प नीति, 1856 में अवध का विलय, सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम 1856, धार्मिक अयोग्यता अधिनियम 1850 और हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 जैसी व्यवस्थाएं आती हैं।
- संवैधानिक परिणाम भारत शासन अधिनियम 1858 था। इस अधिनियम ने कंपनी शासन खत्म किया, भारत सचिव का पद बनाया, उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यों की भारत परिषद बनाई और लंदन से नियंत्रण को और मजबूत किया।
- 1 नवंबर 1858 की रानी विक्टोरिया की घोषणा में धर्म में हस्तक्षेप न करने, रियासतों से हुए समझौतों का सम्मान करने, कानून की बराबर सुरक्षा जैसे वादे और आगे अंधाधुंध विलय से बचने का संकेत था। ये लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि साम्राज्यवादी शासन को स्थिर करने के वादे थे।
- UPSC इस विषय को कारणों की श्रेणी, केंद्र-नेता जोड़ी, कालक्रम, विद्रोह की सीमाएं और 1858 के बाद के प्रशासनिक बदलावों से पूछता है। सबसे बड़ी सावधानी यह है कि हर क्षेत्र, रियासत या सामाजिक समूह को विद्रोही न मान लें; कई रियासतें, सिख समूह, गुरखा सैनिक, बंगाल, बंबई और मद्रास के बड़े हिस्से विद्रोह से बाहर रहे या अंग्रेजों के साथ खड़े रहे।
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1MCQ1857 के विद्रोह के कारणों पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अवध का विलय हड़प नीति के तहत किया गया। 2. सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम 1856 ने समुद्र पार सेवा को लेकर सिपाहियों की चिंता बढ़ाई। 3. एनफील्ड कारतूस विवाद अकेला कारण नहीं, बल्कि तत्काल चिंगारी था। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या
अवध का विलय कथित कुशासन के आधार पर हुआ, हड़प नीति से नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।
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