मुख्य तथ्य

  • मौर्योत्तर भारत क्षेत्रीय शक्तियों और व्यापारिक संपर्कों का संसार था, मौर्य और गुप्त काल के बीच अंधकार युग नहीं।
  • कुषाण कालक्रम, खासकर कनिष्क का राज्यारोहण, विवादित है; उसके बौद्ध और कलात्मक प्रभाव पर ध्यान दें।
  • गांधार और मथुरा दोनों ने शुरुआती बुद्ध प्रतिमाओं को आकार दिया, पर उनकी सामग्री और दृश्य-भाषा अलग है।
  • गौतमीपुत्र सातकर्णि नासिक अभिलेख और नहपान सिक्कों पर पुनर्मुद्रण से जुड़ा है।
  • सातवाहन मातृनाम अभिजात पहचान की पद्धति दिखाते हैं, मातृसत्तात्मक राजनीतिक व्यवस्था नहीं।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    मौर्योत्तर भारत क्षेत्रीय शक्तियों और व्यापारिक संपर्कों का संसार था, मौर्य और गुप्त काल के बीच अंधकार युग नहीं।

  2. 2

    कुषाण कालक्रम, खासकर कनिष्क का राज्यारोहण, विवादित है; उसके बौद्ध और कलात्मक प्रभाव पर ध्यान दें।

  3. 3

    गांधार और मथुरा दोनों ने शुरुआती बुद्ध प्रतिमाओं को आकार दिया, पर उनकी सामग्री और दृश्य-भाषा अलग है।

  4. 4

    गौतमीपुत्र सातकर्णि नासिक अभिलेख और नहपान सिक्कों पर पुनर्मुद्रण से जुड़ा है।

  5. 5

    सातवाहन मातृनाम अभिजात पहचान की पद्धति दिखाते हैं, मातृसत्तात्मक राजनीतिक व्यवस्था नहीं।

  6. 6

    संगम इतिहास में कविताएं, तमिल-ब्राह्मी, बंदरगाह, महापाषाण और उत्खनन साथ पढ़ने पड़ते हैं।

  7. 7

    तमिलकम में रोमन व्यापार प्रमाण लेन-देन के संपर्क-जाल सिद्ध करते हैं, रोमन राजनीतिक शासन नहीं।

  8. 8

    अनुच्छेद 49, अनुच्छेद 51क(च), प्राचीन स्मारक अधिनियम और पुरावस्तु अधिनियम प्राचीन इतिहास के प्रमाणों की रक्षा करते हैं।

ढांचा, कालक्रम और स्रोत-आधार

  • मुख्य परिभाषा: मौर्योत्तर काल से आशय मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद की उन सदियों से है, लगभग 2वीं सदी ईसा पूर्व से 3री सदी ईस्वी तक, जब भारत किसी एक अखिल-भारतीय सत्ता से नहीं बल्कि कई क्षेत्रीय शक्तियों, व्यापारिक मार्गों और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़ा था।
  • यह विषय मध्यम महत्व का होते हुए भी अहम क्यों है: UPSC इस दौर से कला-शैलियों, सिक्कों, अभिलेखों, बंदरगाहों, बौद्ध धर्म के विकास, आरंभिक तमिल समाज और दक्कन की राजव्यवस्था पर सवाल बनाता है। प्रश्न अक्सर किसी वंश को अकेले नहीं, बल्कि प्रमाणों के साथ जोड़कर पूछता है।
  • इस नोट के 3 मुख्य आधार: उत्तर-पश्चिम और गंगा क्षेत्र से जुड़े कुषाण; दक्कन में फैले सातवाहन; और दक्षिण के संगम कालीन राज्य। इन सबको जोड़ने वाला सूत्र है मौर्य केंद्रीकरण के बाद व्यापार और संस्कृति का फैलता हुआ जाल।
  • स्रोतों का मेल: अभिलेख, सिक्के, उत्खनन-स्थल, विदेशी विवरण, बौद्ध ग्रंथ, प्राकृत अभिलेख, तमिल संगम साहित्य और कला-अवशेष साथ पढ़ने पड़ते हैं। केवल साहित्यिक दावा तब तक कमजोर है जब तक अभिलेखशास्त्र या पुरातत्त्व से सहारा न मिले।
  • कालक्रम में सावधानी: कुषाण काल, खासकर कनिष्क के राज्यारोहण की तिथि, विवादित है। पुराने UPSC सारांश उसे 78 ईस्वी और शक संवत से जोड़ते हैं; कई आधुनिक विद्वान कनिष्क को लगभग 127 ईस्वी के आसपास रखते हैं। सुरक्षित उत्तर उसके 2वीं सदी ईस्वी के व्यापक प्रभाव पर टिके।
  • संगम काल की अवधि: संगम साहित्य आरंभिक ऐतिहासिक तमिलकम को दिखाता है, जिसे सामान्यतः लगभग 300 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच रखा जाता है। इसमें रचना और संकलन की कई परतें हैं; हर कविता को सीधा तिथिबद्ध दरबारी दस्तावेज न मानें।
  • वैचारिक आधार: यह क्षेत्रीय राजसत्ताओं, मुद्रा-आधारित लेन-देन, भारत-रोमन और रेशम मार्ग संपर्क, धार्मिक संरक्षण और समाज के भीतर बढ़ते भेदों का दौर है। यह मौर्य और गुप्त काल के बीच का खाली अंतराल नहीं है।
  • प्रमाण पढ़ने का तरीका: सिक्के शासकों और व्यापार को बताते हैं; अभिलेख दान, उपाधि और दाताओं की जानकारी देते हैं; साहित्य आदर्शों, भू-दृश्यों और सामाजिक शब्दावली को पकड़ता है; पुरातत्त्व जांचता है कि साहित्य में दिखी समृद्धि जमीन पर कितनी थी।
  • संरक्षण-कानून का पहलू: इस काल का अध्ययन संरक्षित स्मारकों, उत्खनन प्रतिवेदनों, पुरावस्तु नियंत्रण और संग्रहालय व्यवस्था पर निर्भर है। अनुच्छेद 49, अनुच्छेद 51क(च), प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 और पुरावस्तु तथा कला निधि अधिनियम 1972 इसलिए अहम हैं क्योंकि इतिहास के प्रमाण इन्हीं से बचे रहते हैं।
  • प्रीलिम्स में सावधानी: कुषाण को केवल गांधार, सातवाहन को केवल दक्कन और संगम को केवल कविता मानकर न पढ़ें। हर खंड में राजनीति, अर्थव्यवस्था, धर्म और कला का साझा पक्ष है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

10 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें

संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQकुषाणों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. उनके सिक्कों पर केवल बौद्ध प्रतीक मिलते हैं। 2. उनकी शक्ति गांधार को मथुरा से जोड़ती थी। 3. कनिष्क के राज्यारोहण का सटीक कालक्रम कई आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार विवादित माना जाता है। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 2 और 3सही
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 गलत है क्योंकि कुषाण सिक्कों पर अनेक परंपराओं के देवता मिलते हैं। कथन 2 और 3 सही हैं।

~50 शब्द · 1 अंक