मुख्य तथ्य

  • उदारवादी प्रभुत्व मोटे तौर पर 1885 से 1905 तक रहा; कर्जन की नीतियों और बंगाल विभाजन के बाद उग्रवाद तेजी से उभरा।
  • बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ और स्वदेशी आंदोलन का तात्कालिक कारण बना।
  • 1906 के कलकत्ता अधिवेशन ने स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा को स्वीकार किया, पर धड़ों की समझ अलग थी।
  • 1907 का सूरत विभाजन केवल नेताओं का व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि रणनीति का टकराव था।
  • 1909 के सुधारों ने सीमित रियायत और पृथक निर्वाचन को साथ रखा; जिम्मेदार शासन नहीं दिया।

मुख्य बिंदु

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    उदारवादी प्रभुत्व मोटे तौर पर 1885 से 1905 तक रहा; कर्जन की नीतियों और बंगाल विभाजन के बाद उग्रवाद तेजी से उभरा।

  2. 2

    उदारवादियों ने याचिकाओं, बजट, परिषदों, प्रेस और आर्थिक आलोचना से अखिल भारतीय राजनीतिक भाषा बनाई।

  3. 3

    उग्रवादियों ने बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा, निष्क्रिय प्रतिरोध और सांस्कृतिक जुटान से राष्ट्रवादी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया।

  4. 4

    बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ और स्वदेशी आंदोलन का तात्कालिक कारण बना।

  5. 5

    1906 के कलकत्ता अधिवेशन ने स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा को स्वीकार किया, पर धड़ों की समझ अलग थी।

  6. 6

    1907 का सूरत विभाजन केवल नेताओं का व्यक्तिगत झगड़ा नहीं, बल्कि रणनीति का टकराव था।

  7. 7

    1909 के सुधारों ने सीमित रियायत और पृथक निर्वाचन को साथ रखा; जिम्मेदार शासन नहीं दिया।

  8. 8

    1911 में बंगाल विभाजन रद्द होने से मनोबल बढ़ा, पर राजधानी को दिल्ली ले जाना दिखाता है कि ब्रिटिश रणनीति जारी थी।

परीक्षा के लिहाज़ से चरणों का ढांचा

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 1885 से 1947 तक एक ही तरीके से चलने वाला संगठन मानकर नहीं पढ़ना चाहिए। यह समय के साथ बदलता हुआ राजनीतिक मंच था।
  • इस विषय का सरल ढांचा ऐसे रखें: 1885 से शुरुआती राष्ट्रीय राजनीति, 1885 से 1905 तक उदारवादी प्रभुत्व, 1905 से स्वदेशी दौर में तीखापन, 1907 में सूरत विभाजन, और 1915 तक कांग्रेस में फिर मेल-मिलाप। इसके बाद 1916 का लखनऊ समझौता और गांधी युग की जन-राजनीति आती है।
  • उदारवादी चरण ने अधिकार, प्रतिनिधित्व, बजट-आलोचना, सेवाओं के भारतीयकरण, प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक आंदोलन की भाषा बनाई। तरीका धीमा, अभिजात्य और याचिका-प्रधान था, पर इसी ने अलग-अलग प्रांतों की शिकायतों को एक अखिल भारतीय रूप दिया।
  • उग्रवादी चरण ने राष्ट्रवाद को नहीं छोड़ा; उसने इस भरोसे को चुनौती दी कि ब्रिटिश उदार जनमत अपने-आप औपनिवेशिक शासन को सुधार देगा। इस चरण ने बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा, निष्क्रिय प्रतिरोध, आत्मनिर्भरता और व्यापक जन-भागीदारी पर ज़ोर दिया।
  • 1905 का बंगाल विभाजन निर्णायक मोड़ है। इसी ने कांग्रेस की राजनीति को सालाना प्रस्तावों से निकालकर छात्रों, महिलाओं, मजदूरों, व्यापारियों, वकीलों, प्रेस, उत्सवों, गीतों, स्वयंसेवी दलों और स्वदेशी उद्योगों तक फैलाया।
  • UPSC में कालक्रम बार-बार फंसाता है: कांग्रेस की स्थापना 1885 में; बंगाल विभाजन की घोषणा और लागू होना 1905 में; 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वराज पर ज़ोर; 1907 में सूरत विभाजन; 1911 में बंगाल विभाजन रद्द।
  • अच्छे उत्तर में विचार, तरीका, सामाजिक आधार, नेता और ब्रिटिश प्रतिक्रिया अलग-अलग रखें। सभी उदारवादियों को सिर्फ राजभक्त या सभी उग्रवादियों को क्रांतिकारी राष्ट्रवादी मान लेना बड़ी गलती है।
  • दोनों चरणों को साथ रखकर समझें। उग्रवादियों ने उदारवादियों की बनाई अखिल भारतीय राजनीतिक भाषा और संगठनात्मक मंच का सहारा लिया। आगे गांधी युग ने संवैधानिक मांगों और जन-भागीदारी, दोनों को अपने ढंग से जोड़ा।
  • अक्सर पूछे जाने वाले नेता: दादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले, एम. जी. रानाडे, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविंद घोष और अश्विनी कुमार दत्त।
  • यह विषय भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के बड़े ढांचे में आता है। इसे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन, औपनिवेशिक आर्थिक आलोचना, प्रेस के विकास, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद और होम रूल चरण के साथ जोड़कर दोहराएं।
  • उपयोगी चरण-विभाजन केवल कालक्रम से नहीं, संगठनात्मक रूप से भी करें: शुरुआती कांग्रेस विचार-विमर्श का मंच थी, स्वदेशी दौर की कांग्रेस रणनीति-संघर्ष का मैदान बनी और सूरत के बाद राष्ट्रवाद दमन के बीच फिर एकता खोजने लगा।
  • इस विषय को स्थानीय और अंग्रेज़ी अखबारों के विकास से अलग न करें। अखबार प्रस्ताव छापते थे, सभाओं की खबर देते थे, अधिकारियों की आलोचना करते थे और एक प्रांत के नेताओं को दूसरे प्रांत के पाठकों तक पहुंचाते थे।
  • प्रीलिम्स में सबसे सुरक्षित आदत है कि घटना को तारीख और परिणाम, दोनों के साथ दोहराएं: 1905 ने जन-उभार का कारण दिया, 1906 ने कांग्रेस की भाषा बदली, 1907 ने संगठनात्मक एकता तोड़ी, 1909 ने नियंत्रित सुधार दिया और 1911 ने विभाजन को आंशिक रूप से पलटा।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQ1905 से 1907 के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. कलकत्ता अधिवेशन ने स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा को स्वीकार किया। 2. सूरत विभाजन बंगाल के औपचारिक विभाजन-विरोधी आंदोलन से पहले हुआ। 3. उदारवादी और उग्रवादी मुख्यतः बहिष्कार के तरीके और दायरे पर अलग थे। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 कलकत्ता 1906 के लिए सही है। कथन 2 गलत है, क्योंकि सूरत विभाजन 1907 में हुआ, 1905 के विभाजन-विरोधी उभार के बाद। कथन 3 रणनीतिक टकराव को सही पकड़ता है।

~50 शब्द · 1 अंक