गवर्नर-जनरल और वायसराय: प्रमुख घटनाएं और नीतियां
मुख्य तथ्य
- रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ने बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया; चार्टर अधिनियम 1833 ने भारत का गवर्नर-जनरल बनाया।
- भारत शासन अधिनियम 1858 ने कंपनी शासन समाप्त किया और गवर्नर-जनरल को क्राउन प्रतिनिधि वायसराय भी बनाया।
- सी. राजगोपालाचारी भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे, 26 जनवरी 1950 तक पद पर रहे।
- कर्जन बंगाल विभाजन 1905, विश्वविद्यालय नियंत्रण और स्मारक संरक्षण से जुड़ते हैं; हार्डिंग ने 1911 में बंगाल विभाजन रद्द कराया।
- मिंटो 1909 ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल शुरू किया; चेम्सफोर्ड 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन दिया।
मुख्य बिंदु
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रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ने बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया; चार्टर अधिनियम 1833 ने भारत का गवर्नर-जनरल बनाया।
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भारत शासन अधिनियम 1858 ने कंपनी शासन समाप्त किया और गवर्नर-जनरल को क्राउन प्रतिनिधि वायसराय भी बनाया।
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कैनिंग पहले वायसराय थे; माउंटबेटन अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे।
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सी. राजगोपालाचारी भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे, 26 जनवरी 1950 तक पद पर रहे।
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डलहौजी हड़प नीति, रेल, तार और डाक सुधार से जुड़े हैं; अवध को कुशासन के आधार पर मिलाया गया, हड़प नीति से नहीं।
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रिपन और लिटन का फर्क याद रखें: स्थानीय स्वशासन और प्रेस-प्रतिबंध हटाना बनाम वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट और साम्राज्यवादी दावा।
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कर्जन बंगाल विभाजन 1905, विश्वविद्यालय नियंत्रण और स्मारक संरक्षण से जुड़ते हैं; हार्डिंग ने 1911 में बंगाल विभाजन रद्द कराया।
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मिंटो 1909 ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल शुरू किया; चेम्सफोर्ड 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन दिया।
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अनुच्छेद 395 ने भारत के लिए औपनिवेशिक संवैधानिक अधिनियम निरस्त किए; अनुच्छेद 52 और 53 ने गणतांत्रिक कार्यपालिका का ढांचा दिया।
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पद की रूपरेखा और कानूनी आधार
गवर्नर-जनरल और वायसराय को केवल नामों की सूची की तरह पढ़ना ठीक नहीं है। UPSC इस हिस्से में यह देखता है कि अभ्यर्थी व्यक्ति, अधिनियम और नीति-परिणाम को साथ जोड़ पा रहा है या नहीं।
- कंपनी शासन, 1773-1858: रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ने बंगाल के गवर्नर-जनरल का पद बनाया और उसके साथ 4 सदस्यों की परिषद रखी। वॉरेन हेस्टिंग्स इस पद के पहले धारक बने। युद्ध और कूटनीति में मद्रास तथा बंबई को बंगाल के अधीन रखकर केंद्रीकरण की शुरुआत हुई।
- पिट्स इंडिया अधिनियम 1784: ब्रिटेन में नियंत्रण बोर्ड बना। कंपनी के पास व्यापार और स्थानीय प्रशासन रहा, पर राजनीतिक नियंत्रण ब्रिटिश सरकार के हाथ में गया। यही द्वैध नियंत्रण की व्यवस्था थी।
- चार्टर अधिनियम 1833: बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया। इसलिए लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत के पहले गवर्नर-जनरल माने जाते हैं और विधायी शक्ति कलकत्ता में केंद्रित हुई।
- चार्टर अधिनियम 1853: गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी काम अलग किए गए। सिविल सेवा भर्ती में अधिक खुली प्रतियोगिता की दिशा बनी। प्रत्यक्ष क्राउन शासन से पहले यह अहम संवैधानिक पड़ाव है।
- भारत शासन अधिनियम 1858: 1857 के विद्रोह के बाद कंपनी शासन समाप्त हुआ, शासन क्राउन को गया, भारत सचिव और भारत परिषद बने, और गवर्नर-जनरल क्राउन के प्रतिनिधि के रूप में वायसराय भी कहलाने लगा।
- भारतीय परिषद अधिनियम 1861: प्रेसीडेंसी क्षेत्रों की विधायी शक्तियां लौटीं, वायसराय की परिषद विस्तृत हुई और लॉर्ड कैनिंग से जुड़ी विभागीय व्यवस्था को कानूनी आधार मिला।
- भारत शासन अधिनियम 1919: प्रांतों में द्वैध शासन आया और प्रतिनिधित्व बढ़ा, पर केंद्र की कार्यकारी शक्ति बड़े पैमाने पर गवर्नर-जनरल के अधीन रही।
- भारत शासन अधिनियम 1935: अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव, प्रांतीय स्वायत्तता, विशेष जिम्मेदारियां और विवेकाधीन शक्तियां इसी अधिनियम से जुड़ी थीं। 1950 तक यही मुख्य संवैधानिक आधार रहा।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947: 15 अगस्त 1947 से भारत और पाकिस्तान डोमिनियन बने। हर डोमिनियन में गवर्नर-जनरल था, पर अब यह पद साम्राज्यवादी कार्यपालिका नहीं, डोमिनियन की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा था।
- संवैधानिक अंत: संविधान के अनुच्छेद 395 ने भारत पर लागू भारत शासन अधिनियम 1935 और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को निरस्त किया। 26 जनवरी 1950 से अनुच्छेद 52 और 53 के तहत राष्ट्रपति ने डोमिनियन गवर्नर-जनरल का स्थान लिया।
- प्रीलिम्स में सावधानी: बंगाल का गवर्नर-जनरल, भारत का गवर्नर-जनरल, वायसराय और डोमिनियन गवर्नर-जनरल एक ही बात नहीं हैं। वर्ष, कानूनी आधार और जवाबदेही-श्रृंखला अलग-अलग है।
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1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ने भारत का गवर्नर-जनरल बनाया। 2. चार्टर अधिनियम 1833 ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया। 3. लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
1773 के अधिनियम ने बंगाल का गवर्नर-जनरल बनाया, भारत का नहीं। 1833 के अधिनियम ने भारत का गवर्नर-जनरल बनाया और बेंटिंक पहले पदधारक थे।
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